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Charkhi Dadri News: एक जैसा एजेंडा लेकर प्रचार में जुटे बार प्रधान पद के तीनों दावेदार, दो हमउम्र
Sat, 15 Feb 2025 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sat, 15 Feb 2025 11:45 PM IST
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फोटो- 20
बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुरेंद्र मैहड़ा।
फोटो- 21
बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान ऋषिपाल पहल।
फोटो-22
अधिवक्ता सुखवंत सिंह।
:::::::::::::::
- बार और बेंच के बीच संतुलन बनाना तीनों उम्मीदवारों का प्रमुख मुद्दा, अधिवक्ताओं को सुविधाओं के वादे कर लुभा रहे उम्मीदवार
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिला बार एसोसिएशन चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने से उम्मीदवारों की स्थिति एकदम स्पष्ट हो गई है। 28 फरवरी को मतदान होना है। उसी दिन पांचों पदों के विजेता प्रत्याशियों की घोषणा होनी है। बार प्रधान पद के तीनों दावेदार प्रचार में जुट चुके हैं। सुरेंद्र मैहड़ा को पांच चुनाव लड़ने का अनुभव है। उम्मीदवार अधिवक्ताओं को सुविधाओं के वादे कर वोट बैंक बनाने में जुटे हैं।
बता दें प्रधान पद के लिए तीन उम्मीदवारों में से दो हमउम्र हैं। अंतर इतना है कि उम्मीदवार सुरेंद्र मैहड़ा के पास दो बार सचिव और तीन दफा बार के प्रधान बनने का अनुभव है। वहीं, दूसरे उम्मीदवार सुखवंत सिंह के पास वकालत का लंबा अनुभव है। तीसरे उम्मीदवार ऋषिपाल पहल को भी चुनाव लड़ने का अनुभव है। वह भी पहले बार एसोसिएशन के प्रधान रह चुके हैं। हालांकि, बार का सरताज बनने के लिए तीनों कोई कसर छोड़ने के मूड में नहीं हैं। वोट बैंक मजबूत करने के लिए पसीना बहाना शुरू कर दिए हैं। इस बार एसोसिएशन के पांचों पदों के लिए 13 उम्मीदवार मैदान में हैं।
प्रधान पद के तीनों उम्मीदवारों से जुड़ी जानकारी
1- जीत की हैट्रिक लगाने वाले पहले प्रधान हैं सुरेंद्र मैहड़ा
जिला बार एसोसिएशन बनने के बाद सभी उम्मीदवारों को केवल एक बार ही प्रधान बनने का मौका मिला है। अधिवक्ता सुरेंद्र मैहड़ा लगातार तीन बार प्रधान पद बने रहे। उन्होंने वर्ष 2020 में पहली बार प्रधान पद का चुनाव लड़ा। इसमें जीत हुई। वर्ष 2023 तक प्रधान पद कायम रखा। सुरेंद्र गांव मैहड़ा के निवासी हैं। उन्होंने भिवानी से एमए साइकोलॉजी की है। वर्ष 2002 से वकालत शुरू की। इसके बाद साल 2003 व 2004 में दो बार सचिव रहे। बाद में साल 2005 में सरपंच बने और पांच साल तक पद पर बने रहे। अब तक वह पांच बार जिला बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ चुके हैं। अब छठी बार मैदान में उतरे हैं। उनका कहना है कि बार और बेंच के रिश्तों में मधुरता लाना, अधिवक्ताओं को सम्मान दिलाना, रुके विकास कार्यों को शुरू करवाना, उनके प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
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2- ऋषिपाल को दो चुनाव लड़ने का अनुभव, एक बार जीत तो दूसरी बार हुई हार
अधिवक्ता ऋषिपाल पहल अब 42 वर्ष के हो चुके हैं। वह शहर के निवासी हैं। वर्ष 2008 से वकालत शुरू की। बीए, एलएलबी की डिग्री है। इससे पहले वह दो बार चुनाव लड़ चुके हैं। इसमें उन्होंने पहला चुनाव साल 2019 में लड़ा था। इसमें सफलता मिली। इसके बाद दूसरा चुनाव साल 2020 में लड़ा, लेकिन, सफल नहीं हो पाए। अब तीसरी बार चुनावी मैदान में कदम रखे हैं। इस बार हार और जीत दोनों से मिले को साझा कर चुनावी पत्ते बिछाएंगे। उनका कहना है कि प्राथमिकता अधिवक्ताओं को सम्मान दिलाना है। साथ ही बार और बेंच के संतुलन बनाकर रखना उनका प्रमुख लक्ष्य रहेगा। इसके साथ उन्हें अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी अन्य मूलभूत सुविधाएं दिलाने के लिए जोर रहेगा।
3- सुखवंत को वकालत का 25 साल का अनुभव, चुनाव में पहली बार उतरे
अधिवक्ता सुखवंत सिंह मूल रूप से गांव ढाणी फोगाट के निवासी हैं। उनकी उम्र 50 की है। वकालत का 25 साल का अनुभव रखते हैं। उन्होंने बीएससी, एलएलबी और एलएलएम की डिग्री हासिल की। वर्ष 1999 में वकालत शुरू की थी। इस बार पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं। चुनाव में वह अपनी वकालत और उम्र का अनुभव प्रयोग करेंगे। उनका कहना है कि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो बार व बेंच में संतुलन कराएंगे। अधिवक्ताओं को उनका सम्मान भी दिलाएंगे। अधिवक्ताओं के लिए बैंक शाखा स्थापना, आर्थिक संसाधन सृजित करना, नए अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड दिलाना, 40 साल कार्य कर चुके अधिवक्ताओं को पेंशन दिलाना उनके प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
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बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुरेंद्र मैहड़ा।
फोटो- 21
बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान ऋषिपाल पहल।
फोटो-22
अधिवक्ता सुखवंत सिंह।
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- बार और बेंच के बीच संतुलन बनाना तीनों उम्मीदवारों का प्रमुख मुद्दा, अधिवक्ताओं को सुविधाओं के वादे कर लुभा रहे उम्मीदवार
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। जिला बार एसोसिएशन चुनाव की सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने से उम्मीदवारों की स्थिति एकदम स्पष्ट हो गई है। 28 फरवरी को मतदान होना है। उसी दिन पांचों पदों के विजेता प्रत्याशियों की घोषणा होनी है। बार प्रधान पद के तीनों दावेदार प्रचार में जुट चुके हैं। सुरेंद्र मैहड़ा को पांच चुनाव लड़ने का अनुभव है। उम्मीदवार अधिवक्ताओं को सुविधाओं के वादे कर वोट बैंक बनाने में जुटे हैं।
बता दें प्रधान पद के लिए तीन उम्मीदवारों में से दो हमउम्र हैं। अंतर इतना है कि उम्मीदवार सुरेंद्र मैहड़ा के पास दो बार सचिव और तीन दफा बार के प्रधान बनने का अनुभव है। वहीं, दूसरे उम्मीदवार सुखवंत सिंह के पास वकालत का लंबा अनुभव है। तीसरे उम्मीदवार ऋषिपाल पहल को भी चुनाव लड़ने का अनुभव है। वह भी पहले बार एसोसिएशन के प्रधान रह चुके हैं। हालांकि, बार का सरताज बनने के लिए तीनों कोई कसर छोड़ने के मूड में नहीं हैं। वोट बैंक मजबूत करने के लिए पसीना बहाना शुरू कर दिए हैं। इस बार एसोसिएशन के पांचों पदों के लिए 13 उम्मीदवार मैदान में हैं।
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प्रधान पद के तीनों उम्मीदवारों से जुड़ी जानकारी
1- जीत की हैट्रिक लगाने वाले पहले प्रधान हैं सुरेंद्र मैहड़ा
जिला बार एसोसिएशन बनने के बाद सभी उम्मीदवारों को केवल एक बार ही प्रधान बनने का मौका मिला है। अधिवक्ता सुरेंद्र मैहड़ा लगातार तीन बार प्रधान पद बने रहे। उन्होंने वर्ष 2020 में पहली बार प्रधान पद का चुनाव लड़ा। इसमें जीत हुई। वर्ष 2023 तक प्रधान पद कायम रखा। सुरेंद्र गांव मैहड़ा के निवासी हैं। उन्होंने भिवानी से एमए साइकोलॉजी की है। वर्ष 2002 से वकालत शुरू की। इसके बाद साल 2003 व 2004 में दो बार सचिव रहे। बाद में साल 2005 में सरपंच बने और पांच साल तक पद पर बने रहे। अब तक वह पांच बार जिला बार एसोसिएशन का चुनाव लड़ चुके हैं। अब छठी बार मैदान में उतरे हैं। उनका कहना है कि बार और बेंच के रिश्तों में मधुरता लाना, अधिवक्ताओं को सम्मान दिलाना, रुके विकास कार्यों को शुरू करवाना, उनके प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
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2- ऋषिपाल को दो चुनाव लड़ने का अनुभव, एक बार जीत तो दूसरी बार हुई हार
अधिवक्ता ऋषिपाल पहल अब 42 वर्ष के हो चुके हैं। वह शहर के निवासी हैं। वर्ष 2008 से वकालत शुरू की। बीए, एलएलबी की डिग्री है। इससे पहले वह दो बार चुनाव लड़ चुके हैं। इसमें उन्होंने पहला चुनाव साल 2019 में लड़ा था। इसमें सफलता मिली। इसके बाद दूसरा चुनाव साल 2020 में लड़ा, लेकिन, सफल नहीं हो पाए। अब तीसरी बार चुनावी मैदान में कदम रखे हैं। इस बार हार और जीत दोनों से मिले को साझा कर चुनावी पत्ते बिछाएंगे। उनका कहना है कि प्राथमिकता अधिवक्ताओं को सम्मान दिलाना है। साथ ही बार और बेंच के संतुलन बनाकर रखना उनका प्रमुख लक्ष्य रहेगा। इसके साथ उन्हें अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर संबंधी अन्य मूलभूत सुविधाएं दिलाने के लिए जोर रहेगा।
3- सुखवंत को वकालत का 25 साल का अनुभव, चुनाव में पहली बार उतरे
अधिवक्ता सुखवंत सिंह मूल रूप से गांव ढाणी फोगाट के निवासी हैं। उनकी उम्र 50 की है। वकालत का 25 साल का अनुभव रखते हैं। उन्होंने बीएससी, एलएलबी और एलएलएम की डिग्री हासिल की। वर्ष 1999 में वकालत शुरू की थी। इस बार पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं। चुनाव में वह अपनी वकालत और उम्र का अनुभव प्रयोग करेंगे। उनका कहना है कि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो बार व बेंच में संतुलन कराएंगे। अधिवक्ताओं को उनका सम्मान भी दिलाएंगे। अधिवक्ताओं के लिए बैंक शाखा स्थापना, आर्थिक संसाधन सृजित करना, नए अधिवक्ताओं को स्टाइपेंड दिलाना, 40 साल कार्य कर चुके अधिवक्ताओं को पेंशन दिलाना उनके प्रमुख मुद्दे रहेंगे।