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Charkhi Dadri News: दादरी में पांच साल में 90,000 मरीजों ने करवाई फिजियोथेरेपी
Wed, 23 Oct 2024 04:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Wed, 23 Oct 2024 04:05 AM IST
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दादरी के अस्पताल की मरीज की फिजियोथेरेपी करते लोकेश मलिक।
चरखी दादरी। नागरिक अस्पताल की क्षमता 100 बेड की है। इसमें फिजियोथेरेपी इकाई शुरू हुए पांच साल हो चुके हैं। इस अवधि में 90,000 मरीजों ने यहां पहुंचकर फिजियोथेरेपी करवाई है। खास बात यह है कि इनमें से 45,000 मरीज सर्वाइकल का शिकार बने हैं। वह असहनीय दर्द से कराहते लोग उपचार करवाने पहुंच रहे हैं।
वर्ष 2019 से पहले नागरिक अस्पताल में फिजियोथेरेपी इकाई नहीं थी। उस दौरान मरीज निजी केंद्रों या फिर भिवानी या रोहतक पीजीआई जाने के लिए मजबूर थे। इस समस्या को सुलझाने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने दादरी अस्पताल में ही यह सुविधा शुरू की। इसके लिए पुरानी ओपीडी विंग में एक ब्लॉक तैयार किया गया। तब से यहां डॉ. लोकेश मलिक फिजियोथेरेपी करा रहे हैं। इस फिजियोथेरेपी इकाई में सभी जरूरी मशीन और बेड उपलब्ध हैं। यहां फिजियोथेरेपिस्ट के अलावा स्टाफ नर्स और सहायक भी तैनात हैं।
इस इकाई के शुरू होने का लाभ मरीजों को भरपूर मिला है। अब उन्हें फिजियोथेरेपी के लिए निजी केंद्रों पर जाकर जेब ढीली नहीं करनी पड़ रही। भिवानी और रोहतक पीजीआई की भागदौड़ से भी छुटकारा मिल गया है जबकि निजी केंद्र पर एक बार में मरीज के करीब पांच सौ रुपये खर्च होते हैं।
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हर साल पहुंच रहे औसतन 18,000 मरीज : फिजियोथेरेपी इकाई में हर साल औसतन 18,000 मरीज पहुंच रहे हैं। एक माह की दैनिक ओपीडी करीब 1,500 तक रहती है। एक मरीज को करीब पांच से छह विजिट करनी होती हैं और अंतिम तीन विजिट तीन से चार दिन के अंतराल में होती हैं।
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वर्ष 2019 से पहले नागरिक अस्पताल में फिजियोथेरेपी इकाई नहीं थी। उस दौरान मरीज निजी केंद्रों या फिर भिवानी या रोहतक पीजीआई जाने के लिए मजबूर थे। इस समस्या को सुलझाने के लिए जिला स्वास्थ्य विभाग ने दादरी अस्पताल में ही यह सुविधा शुरू की। इसके लिए पुरानी ओपीडी विंग में एक ब्लॉक तैयार किया गया। तब से यहां डॉ. लोकेश मलिक फिजियोथेरेपी करा रहे हैं। इस फिजियोथेरेपी इकाई में सभी जरूरी मशीन और बेड उपलब्ध हैं। यहां फिजियोथेरेपिस्ट के अलावा स्टाफ नर्स और सहायक भी तैनात हैं।
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इस इकाई के शुरू होने का लाभ मरीजों को भरपूर मिला है। अब उन्हें फिजियोथेरेपी के लिए निजी केंद्रों पर जाकर जेब ढीली नहीं करनी पड़ रही। भिवानी और रोहतक पीजीआई की भागदौड़ से भी छुटकारा मिल गया है जबकि निजी केंद्र पर एक बार में मरीज के करीब पांच सौ रुपये खर्च होते हैं।
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हर साल पहुंच रहे औसतन 18,000 मरीज : फिजियोथेरेपी इकाई में हर साल औसतन 18,000 मरीज पहुंच रहे हैं। एक माह की दैनिक ओपीडी करीब 1,500 तक रहती है। एक मरीज को करीब पांच से छह विजिट करनी होती हैं और अंतिम तीन विजिट तीन से चार दिन के अंतराल में होती हैं।