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Charkhi Dadri News: यूरिया खाद के 7300 बैग पहुंचे पोर्टल के अनुसार होगा वितरण
Sun, 17 May 2026 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Sun, 17 May 2026 01:48 AM IST
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नगर स्थित जमीदारा सोसायटी कार्यालय में ट्रक से यूरिया के बैग उतारते हुए श्रमिक।
- फोटो : 1
चरखी दादरी। खरीफ सीजन के लिए यूरिया खाद की बड़ी खेप पहुंच गई है। जिले में यूरिया खाद के 7300 बैग पहुंचे हैं। सरकारी व प्राइवेट विक्रेताओं के जरिए खाद वितरित की जाएगी। मेरी फसल, मेरा ब्योरा पोर्टल पर दर्ज जमीन के विवरण के हिसाब से खाद मिलेगी। खरीफ सीजन में करीब 1.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बिजाई होने का अनुमान है।
खरीफ सीजन में जिले में डीएपी 15 हजार व यूरिया खाद की 35 हजार एमटी की जरूरत रहेगी। अगस्त माह में सर्वाधिक 12000 एमटी खाद की जरूरत पड़ेगी। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा 1,22,368 हेक्टेयर क्षेत्र है। खरीफ सीजन में जिले में बाजरा, कपास, ग्वार व ज्वार की खेती होती है। हर साल सर्वाधिक औसत 1.5 लाख एकड़ में बाजरा की बिजाई होती है। फिलहाल जिले में डीएपी खाद नहीं पहुंची है।
इस समय कपास की बिजाई चल रही है। आजकल किसान प्रत्येक फसल में रासायनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं ताकि बढि़या पैदावार मिल सके। कपास की बिजाई करीब 30 हजार एकड़ में होती है। डीएपी का संकट रबी सीजन के दौरान भी बना रहा था। अब खरीफ सीजन में भी काफी मात्रा में खाद की जरूरत है।
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यूरिया खाद की तो अगस्त व सितंबर माह तक जरूरत बनी रहेगी। डीएपी की खरीफ सीजन में 15 हजार एमटी की जरूरत रहेगी जबकि जून माह में 4000 एमटी की जरूरत पड़ेगी। इसी प्रकार यूरिया की खरीफ सीजन में कुल जरूरत 35 हजार एमटी है जबकि जून माह में यूरिया की 5000 एमटी की जरूरत रहेगी।
जिले में करीब 15 पैक्स समितियों व शहर में जमीदारा सोसायटी की ओर से खाद का वितरण किया जाता है। जिन किसानों ने फसल का पंजीकरण पोर्टल पर दर्ज करवा रखा है उसी के हिसाब से खाद बांटी जाती है। पोर्टल पर दर्ज जमीन के अनुपात में यूरिया व डीएपी खाद का वितरण किया जाता है। शून्य से एक एकड़ तक एक बैग, दो एकड़ तक दो बैग व तीन एकड़ फसल के लिए तीन बैग दिए जाते हैं। पांच एकड़ से ज्यादा फसल होने पर जरूरत के अनुसार ज्यादा दिया जा सकता है।
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खरीफ सीजन में जिले में डीएपी 15 हजार व यूरिया खाद की 35 हजार एमटी की जरूरत रहेगी। अगस्त माह में सर्वाधिक 12000 एमटी खाद की जरूरत पड़ेगी। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा 1,22,368 हेक्टेयर क्षेत्र है। खरीफ सीजन में जिले में बाजरा, कपास, ग्वार व ज्वार की खेती होती है। हर साल सर्वाधिक औसत 1.5 लाख एकड़ में बाजरा की बिजाई होती है। फिलहाल जिले में डीएपी खाद नहीं पहुंची है।
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इस समय कपास की बिजाई चल रही है। आजकल किसान प्रत्येक फसल में रासायनिक खाद का इस्तेमाल करते हैं ताकि बढि़या पैदावार मिल सके। कपास की बिजाई करीब 30 हजार एकड़ में होती है। डीएपी का संकट रबी सीजन के दौरान भी बना रहा था। अब खरीफ सीजन में भी काफी मात्रा में खाद की जरूरत है।
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यूरिया खाद की तो अगस्त व सितंबर माह तक जरूरत बनी रहेगी। डीएपी की खरीफ सीजन में 15 हजार एमटी की जरूरत रहेगी जबकि जून माह में 4000 एमटी की जरूरत पड़ेगी। इसी प्रकार यूरिया की खरीफ सीजन में कुल जरूरत 35 हजार एमटी है जबकि जून माह में यूरिया की 5000 एमटी की जरूरत रहेगी।
जिले में करीब 15 पैक्स समितियों व शहर में जमीदारा सोसायटी की ओर से खाद का वितरण किया जाता है। जिन किसानों ने फसल का पंजीकरण पोर्टल पर दर्ज करवा रखा है उसी के हिसाब से खाद बांटी जाती है। पोर्टल पर दर्ज जमीन के अनुपात में यूरिया व डीएपी खाद का वितरण किया जाता है। शून्य से एक एकड़ तक एक बैग, दो एकड़ तक दो बैग व तीन एकड़ फसल के लिए तीन बैग दिए जाते हैं। पांच एकड़ से ज्यादा फसल होने पर जरूरत के अनुसार ज्यादा दिया जा सकता है।