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Charkhi Dadri News: नशा छोड़ने के लिए 7 माह में अस्पताल पहुंचे 2,000 लोग, 90 मुख्य धारा में लाैटे
Fri, 27 Jun 2025 01:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Fri, 27 Jun 2025 01:37 AM IST
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हनी सोनी
चरखी दादरी। नशे की लत से ग्रस्त लोग उपचार करवाकर इससे तौबा कर सकते हैं। पिछले सात माह में जिले के 90 लोग नशे से छुटकारा पाकर समाज की मुख्यधारा से जुड़े हैं। इनमें से 70 ने काम करना भी शुरू कर दिया है। करीब डेढ़ हजार लोगों की काउंसलिंग की जा रही है। उन्हें भी नशे की लत से जल्द छुटकारा दिलाया जाएगा।
दादरी नागरिक अस्पताल में मनाेरोग ओपीडी नवंबर 2024 से शुरू हुई थी। शुरुआती माह में यहां की दैनिक ओपीडी 30 रही लेकिन अब रोज करीब 45 मरीज पहुंच रहे हैं। पिछले सात माह की ओपीडी में करीब 2,000 लोग नशा छोड़ने पहुंचे हैं। विशेषज्ञ के परामर्श पर दवा लेकर इनमें से 90 ने नशा छोड़ दिया है।
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. राममेहर के मुताबिक रोजाना करीब आठ लोग शराब छोड़ने और पांच से छह लोग हेरोइन (चिट्टा), गांजा और सुल्फा छोड़ने का संकल्प लेकर उनके पास पहुंच रहे हैं।
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डॉ. राममेहर ने बताया कि नशे की लत से ग्रस्त कुल मरीजों में से आधे शराब की लत के शिकार हैं। करीब 35 फीसदी मरीजों में चिट्टा लेने की लत हैं। इससे स्वयं समेत उनका पूरा परिवार परेशान है। जिन 90 मरीजों ने नशे से तौबा किया है, उनमें से 70 ने अपना पुश्तैनी धंधा या नौकरी शुरू कर ली है, ताकि खुद को व्यस्त रखकर वह नशे से दूरी बना सकें।
मनारोग विशेषज्ञ डॉ. राममेहर ने बताया कि नशा छोड़ने के इच्छुक व्यक्ति के उपचार की तीन प्रक्रिया हैं। पहली प्रक्रिया फार्मेकोथैरेपी है और इसमें तीन प्रकार की दवाएं दी जाती हैं। दूसरी प्रक्रिया साइकोथैरेपी यानी काउंसलिंग हैं और तीसरी प्रक्रिया पुनर्वास है। फिलहाल दादरी में पुनर्वास की सुविधा नहीं है और एक माह तक शुरू होने की उम्मीद है।
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चरखी दादरी। नशे की लत से ग्रस्त लोग उपचार करवाकर इससे तौबा कर सकते हैं। पिछले सात माह में जिले के 90 लोग नशे से छुटकारा पाकर समाज की मुख्यधारा से जुड़े हैं। इनमें से 70 ने काम करना भी शुरू कर दिया है। करीब डेढ़ हजार लोगों की काउंसलिंग की जा रही है। उन्हें भी नशे की लत से जल्द छुटकारा दिलाया जाएगा।
दादरी नागरिक अस्पताल में मनाेरोग ओपीडी नवंबर 2024 से शुरू हुई थी। शुरुआती माह में यहां की दैनिक ओपीडी 30 रही लेकिन अब रोज करीब 45 मरीज पहुंच रहे हैं। पिछले सात माह की ओपीडी में करीब 2,000 लोग नशा छोड़ने पहुंचे हैं। विशेषज्ञ के परामर्श पर दवा लेकर इनमें से 90 ने नशा छोड़ दिया है।
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मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. राममेहर के मुताबिक रोजाना करीब आठ लोग शराब छोड़ने और पांच से छह लोग हेरोइन (चिट्टा), गांजा और सुल्फा छोड़ने का संकल्प लेकर उनके पास पहुंच रहे हैं।
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डॉ. राममेहर ने बताया कि नशे की लत से ग्रस्त कुल मरीजों में से आधे शराब की लत के शिकार हैं। करीब 35 फीसदी मरीजों में चिट्टा लेने की लत हैं। इससे स्वयं समेत उनका पूरा परिवार परेशान है। जिन 90 मरीजों ने नशे से तौबा किया है, उनमें से 70 ने अपना पुश्तैनी धंधा या नौकरी शुरू कर ली है, ताकि खुद को व्यस्त रखकर वह नशे से दूरी बना सकें।
मनारोग विशेषज्ञ डॉ. राममेहर ने बताया कि नशा छोड़ने के इच्छुक व्यक्ति के उपचार की तीन प्रक्रिया हैं। पहली प्रक्रिया फार्मेकोथैरेपी है और इसमें तीन प्रकार की दवाएं दी जाती हैं। दूसरी प्रक्रिया साइकोथैरेपी यानी काउंसलिंग हैं और तीसरी प्रक्रिया पुनर्वास है। फिलहाल दादरी में पुनर्वास की सुविधा नहीं है और एक माह तक शुरू होने की उम्मीद है।