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165 खस्ताहाल कमरों को कंडम घोषित किया नहीं, दो साल में तीसरी बार मांगा ब्योरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 11 Sep 2021 11:47 PM IST
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165 dilapidated rooms were not declared as conduit, details sought for the third time in two years
सरकारी स्कूल का कड़म भवन। - फोटो : CharkhiDadri
चरखी दादरी। शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली भी कमाल है। पहले मांगी स्कूलों के कंडम कमरों की रिपोर्ट पर कार्रवाई की नहीं फिर से कंडम भवनों का ब्योरा मांगा है। पिछले दो साल में तीसरी बार कंडम भवनों की जानकारी मांगी गई है, जबकि पिछले वर्ष भेजी 165 खस्ताहाल कमरों की रिपोर्ट के बाद अब तक उन्हें कंडम घोषित नहीं किया गया है। अब खस्ताहाल स्कूली कमरों का आंकड़ा 200 तक पहुंच चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से कुछ जगह तो खस्ताहाल कमरों का इस्तेमाल भी किया जा रहा है और उनमें बच्चे पढ़ रहे है। यह जानकारी शिक्षा विभाग के यूडीआईएस पोर्टल पर अपडेट करनी होगी।
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जिले में 365 प्राइमरी, मिडिल, हाई व सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं। अधिकतर सरकारी स्कूल 40 से 50 वर्ष पुराने हैं। अब इन स्कूलों के भवन जवाब दे चुके है, किसी स्कूल में कमरों की छत कंडम हो चुकी हैं, तो कही कमरों की दीवारों में दरारें बनी हुई हैं। कई स्कूलों में चाहरदीवारी टूटी हैं। चाहरदीवारी नहीं होने से स्कूल में लगे पौधों को लावारिस पशु नष्ट कर देेेते हैं। कई ऐसे भी स्कूल हैं, जिनका लेवल काफी नीचा होने की वजह से जलभराव की समस्या बन जाती है। इससे कई दिनों तक स्कूल बंद करने पड़ते हैं। विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होती है। सरकार की ओर से कंडम स्कूलों का विवरण तो मांगा जा रहा है, लेकिन धरातल पर काम नहीं हो पा रहा है। कंडम कमरों में विद्यार्थियों की पढ़ाई करवाना खतरे से कम नहीं है। अब सरकार की ओर से दोबारा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों के पास पत्र जारी किए गए हैं, जिसमें स्कूलों के कंडम कमरों का विवरण मांगा गया है। पत्र में कहा गया है कि जो स्कूल शिक्षा विभाग के यूडीआइएस पोर्टल पर दर्ज हैं उन स्कूलों के मुखिया स्कूल में कंडम कमरे, रेजिंग, चाहरदीवारी, हॉल आदि की जानकारी शीघ्र उपलब्ध करवाएं ताकि इनको कंडम घोषित कर नए सिरे से निर्माण करवाया जा सके।
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कंडम घोषित हुए सालों बीते, नहीं हुआ निर्माण
विदित रहे शहर में स्थित शहीद दलबीर सिंह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय भवन को कंडम घोषित हुए कई साल हो गए हैं, लेकिन इसकी जगह नया भवन नहीं बनाया जा सका है। इस कंडम घोषित भवन में ही बीईओ व डीईओ के कार्यालय चला रखे हैं। इससे खासकर बारिश के मौसम में खतरा बना रहता है।
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पर्याप्त हो व्यवस्थाएं
राजकीय अध्यापक संघ नेता संजय शास्त्री व रमेश जाखड़ का कहना है कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता की बात तो कर रही है, लेकिन इसके लिए सबसे पहले इंफ्रास्ट्रक्चर तो पर्याप्त होना चाहिए। स्कूलों के कंडम कमरों का निर्माण करवाना चाहिए। अध्यापक नेता संजय शास्त्री का कहना है कि राज्य के सरकारी स्कूलों में इस सत्र में विद्यार्थी संख्या 3.25 लाख बढ़ गई है। जिले में विद्यार्थी संख्या 7510 बढ़ी हैं, ऐसे में पर्याप्त भवन का होना जरूरी है।
कंडम कमरों का विवरण हेड ऑफिस जाएगा। हेड ऑफिस से जो भी निर्देश मिलेंगे, उसके अनुरूप अगली प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जलधीर सिंह कलकल, बीईओ, शिक्षा विभाग
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