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चरखी दादरी का सूबेदार सूडान में शहीद
चरखी दादरी/ब्यूरो
Updated Fri, 20 Dec 2013 10:54 PM IST
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दक्षिणी सूडान में संयुक्त राष्ट्र के शांतिबलों के कैंप पर वीरवार देर रात
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हुए हमले में चरखी दादरी का एक लाल और भारतीय सेना का जवान भी शहीद हो
गया।
सूबेदार धर्मेश सांगवान छह माह से सूडान में शांति सैनिक के रूप में तैनात थे और वहां डिनके समुदाय के लोगों को बचाते हुए उन्होंने शहादत पाई। ग्रामीणों ने कहा कि चरखी दादरी ने अपना एक होनहार जवान और नौकायान का बेहतरीन राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी खो दिया है।
चरखी दादरी के गांव खेड़ी बत्तर निवासी सूबेदार धर्मेश सांगवान की शहादत की खबर मिलने के बाद गांव में गर्व के साथ-साथ शोक का भी माहौल है। शहीद के चचेरे भाई धर्मेंद्र ने बताया कि धर्मेश का परिवार दिल्ली में रहता है, जबकि माता-पिता गांव में हैं। धर्मेश को दस जनवरी को लौटना था, लेकिन उससे पहले ही शुक्रवार को दिल्ली के सेना सेंटर ने उन्हें फोन पर जानकारी दी।
धर्मेश 12 साल पहले सूबेदार की पोस्ट पर सेना में भर्ती हुए थे। धर्मेंद्र ने बताया कि धर्मेश नौकायन के अच्छे खिलाड़ी भी थे। उन्होंने राष्ट्रीय खेलों में 17 मेडल जीते हुए हैं। धर्मेश का एक 12 साल का बेटा है और एक सात साल की बेटी है। अभी शहीद की पत्नी को शहादत के बारे में सूचना नहीं दी गई है।
अभी नहीं पता कब पहुंचेगा शव
शहीद के परिजनों ने बताया कि अभी उन्हें यह नहीं पता चल पाया है कि गांव में शहीद के शव को कब लाया जाएगा। वहीं, ग्रामीणों ने कहा कि उनकी शहादत पर सभी गांववासियों को गर्व है।
सूबेदार धर्मेश सांगवान छह माह से सूडान में शांति सैनिक के रूप में तैनात थे और वहां डिनके समुदाय के लोगों को बचाते हुए उन्होंने शहादत पाई। ग्रामीणों ने कहा कि चरखी दादरी ने अपना एक होनहार जवान और नौकायान का बेहतरीन राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी खो दिया है।
चरखी दादरी के गांव खेड़ी बत्तर निवासी सूबेदार धर्मेश सांगवान की शहादत की खबर मिलने के बाद गांव में गर्व के साथ-साथ शोक का भी माहौल है। शहीद के चचेरे भाई धर्मेंद्र ने बताया कि धर्मेश का परिवार दिल्ली में रहता है, जबकि माता-पिता गांव में हैं। धर्मेश को दस जनवरी को लौटना था, लेकिन उससे पहले ही शुक्रवार को दिल्ली के सेना सेंटर ने उन्हें फोन पर जानकारी दी।
धर्मेश 12 साल पहले सूबेदार की पोस्ट पर सेना में भर्ती हुए थे। धर्मेंद्र ने बताया कि धर्मेश नौकायन के अच्छे खिलाड़ी भी थे। उन्होंने राष्ट्रीय खेलों में 17 मेडल जीते हुए हैं। धर्मेश का एक 12 साल का बेटा है और एक सात साल की बेटी है। अभी शहीद की पत्नी को शहादत के बारे में सूचना नहीं दी गई है।
अभी नहीं पता कब पहुंचेगा शव
शहीद के परिजनों ने बताया कि अभी उन्हें यह नहीं पता चल पाया है कि गांव में शहीद के शव को कब लाया जाएगा। वहीं, ग्रामीणों ने कहा कि उनकी शहादत पर सभी गांववासियों को गर्व है।