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हरियाणा में पराली से तैयार होंगी ईंटें: भट्ठों में बायोमास पेलेट का उपयोग अनिवार्य, इन आठ जिलों को आदेश जारी
Thu, 03 Jul 2025 08:20 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 03 Jul 2025 08:20 PM IST
सार
हरियाणा के सभी गैर-एनसीआर जिलों अम्बाला, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, सिरसा एवं यमुनानगर को पत्र के माध्यम से ईंट भट्ठों में धान की पराली आधारित बायोमास पेलेट के उपयोग को अनिवार्य करने हेतु निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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- फोटो : Istock
विस्तार
हरियाणा के गैर एनसीआर जिलों में स्थित ईंट भट्ठों में धान की पराली आधारित बायोमास पेलेट के उपयोग को अनिवार्य कर दिया गया है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने हाल ही में इस बाबत आदेश जारी किए हैं। इसके बाद आज खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने सभी जिलों को पत्र जारी किया है।
एनसीआर क्षेत्रों में बायोमास ईंधन के प्रयोग का नियम पहले से ही लागू है। इसके साथ ही पराली से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए अब हरियाणा के सभी जिलों में स्थित ईंट भट्ठों में धान की पराली आधारित बायोमास पेलेट के उपयोग अनिवार्य हो गया है।
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर ने बताया कि हरियाणा के गैर-एनसीआर क्षेत्रों सभी ईंट भट्टों में धान की पराली आधारित बायोमास पेलेट के 50% सम्मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें न्यूनतम उपयोग का लक्ष्य निम्न प्रकार है:
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* 01.11.2025 से — कम से कम 20% सम्मिश्रण
* 01.11.2026 से — कम से कम 30% सम्मिश्रण
* 01.11.2027 से — कम से कम 40% सम्मिश्रण
* 01.11.2028 से — कम से कम 50% सम्मिश्रण
उन्होंने कहा कि इस क्रम में हरियाणा के सभी गैर-एनसीआर जिलों अम्बाला, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, सिरसा एवं यमुनानगर को पत्र के माध्यम से त्वरित अनुपालन हेतु निर्देश जारी कर दिए गए हैं। ‘बायोमास पेलेट’ एक प्रकार से ठोस ईंधन हैं। लकड़ी, कृषि अवशेषों और अन्य चीजों को छोटे और बेलनाकार छर्रों का रूप दिया जाता है।
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एनसीआर क्षेत्रों में बायोमास ईंधन के प्रयोग का नियम पहले से ही लागू है। इसके साथ ही पराली से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए अब हरियाणा के सभी जिलों में स्थित ईंट भट्ठों में धान की पराली आधारित बायोमास पेलेट के उपयोग अनिवार्य हो गया है।
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खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर ने बताया कि हरियाणा के गैर-एनसीआर क्षेत्रों सभी ईंट भट्टों में धान की पराली आधारित बायोमास पेलेट के 50% सम्मिश्रण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें न्यूनतम उपयोग का लक्ष्य निम्न प्रकार है:
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* 01.11.2025 से — कम से कम 20% सम्मिश्रण
* 01.11.2026 से — कम से कम 30% सम्मिश्रण
* 01.11.2027 से — कम से कम 40% सम्मिश्रण
* 01.11.2028 से — कम से कम 50% सम्मिश्रण
उन्होंने कहा कि इस क्रम में हरियाणा के सभी गैर-एनसीआर जिलों अम्बाला, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला, सिरसा एवं यमुनानगर को पत्र के माध्यम से त्वरित अनुपालन हेतु निर्देश जारी कर दिए गए हैं। ‘बायोमास पेलेट’ एक प्रकार से ठोस ईंधन हैं। लकड़ी, कृषि अवशेषों और अन्य चीजों को छोटे और बेलनाकार छर्रों का रूप दिया जाता है।