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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Unions express displeasure over new labor rules, sending objections and suggestions to the government

Chandigarh-Haryana News: नए श्रम नियमों पर यूनियनों की नाराजगी बढ़ी, सरकार को भेजे आपत्तियां व सुझाव

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- सीआईटीयू समेत कई श्रमिक संगठनों ने कहा- प्रस्तावित नियमों से छोटी यूनियनों की आवाज दबेगी, सरकारी दखल बढ़ेगा
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राज्य सरकार द्वारा जारी इंडस्ट्रियल रिलेशंस रूल्स-2026 के मसौदे पर श्रमिक संगठनों की आपत्तियां और सुझाव बड़ी संख्या में सरकार तक पहुंच चुके हैं। सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीआईटीयू) सहित कई संगठनों की तरफ से भेजे गए आपत्तियों व सुझाव में कहा गया है कि प्रस्तावित नियमों के कुछ प्रावधान मजदूरों और छोटी यूनियनों के हितों को प्रभावित कर सकते हैं।

सीआईटीयू हरियाणा के राज्य प्रधान जयभगवान के मुताबिक 30 दिन के अंदर आपत्तियां व सुझाव देने का समय था। सबसे बड़ी आपत्ति उस प्रस्ताव पर है जिसमें किसी कंपनी में केवल उसी ट्रेड यूनियन को मान्यता देने की बात कही गई है जिसके पास कम से कम 30 फीसदी कर्मचारियों का समर्थन हो। यूनियनों के अनुसार इससे छोटी और स्वतंत्र यूनियनें प्रबंधन से बातचीत की प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगी। उनका सुझाव है कि मान्यता के लिए सदस्यता की सीमा कम रखी जाए ताकि सभी संगठनों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिल सके।
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राज्य स्तरीय यूनियन के पंजीकरण के लिए 50 हजार सदस्यों की अनिवार्यता पर भी सवाल उठाए गए हैं। सीआईटीयू के अनुसार अभी कम सदस्य संख्या के साथ भी यूनियनें काम कर रही हैं। नई शर्त लागू होने पर छोटे और क्षेत्रीय संगठन पंजीकरण नहीं करा पाएंगे। इसलिए इस सीमा को काफी कम करने की मांग की गई है। इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल बनाने के प्रस्ताव पर यूनियनों ने कहा है कि इससे श्रमिकों के लिए न्याय पाने के विकल्प सीमित हो सकते हैं। उनका सुझाव है कि कर्मचारियों को अदालत का रास्ता चुनने का अधिकार भी बना रहना चाहिए।
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यूनियनों ने ऑडिट प्रक्रिया में सरकारी हस्तक्षेप पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि यूनियनें स्वतंत्र संगठन हैं और उनके आंतरिक मामलों में सरकारी नियंत्रण नहीं बढ़ना चाहिए। इसके अलावा डिजिटल चुनाव और सदस्यता सत्यापन को लेकर भी सुझाव दिए गए हैं। यूनियनों का कहना है कि तकनीकी व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और सभी श्रमिकों की पहुंच में होनी चाहिए। यूनियन का तर्क है कि जल्दबाजी में लागू किए गए नियम भविष्य में विवाद का कारण बन सकते हैं।


यूनियनों की ओर से आपत्तियां और सुझाव आए हैं। इन्हें एक साथ कमेटी के सामने रखा जाएगा ताकि सभी सुझाव व आपत्तियों पर विचार किया जा सकेगा। इनमें से जो सुझाव व आपत्तियां जायज होंगी उनके आधार पर नियमावली में जरूरी संशोधन किया जाएगा।
परमजीत ढुल, संयुक्त श्रम आयुक्त, हरियाणा
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