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Chandigarh-Haryana News: दिव्यांंग कर्मियों से भेदभाव पर हाईकोर्ट ने एचवीपीएनएल को लगाई फटकार
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- कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दिव्यांग कर्मचारियों को तबादले का बराबर विकल्प देने के आदेश
- दिव्यांग कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगा : कोर्ट
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड को दिव्यांग कर्मचारियों के साथ असंवेदनशील और उदासीन रवैया अपनाने पर नाराजगी जताते हुए फटकार लगाई है। कोर्ट ने आदेश दिया कि दिव्यांग कर्मचारियों को भी उतने ही तबादला विकल्प उपलब्ध कराए जाएं जितने सक्षम कर्मचारियों को दिए जाते हैं।
कोर्ट ने कहा कि कार्यालयों को दिव्यांगों के लिए सुलभ बनाया जाना चाहिए। उन्हें गृह जिले या सुविधानुसार स्थान पर तैनाती का अवसर दिया जाए और निवास व कार्यस्थल के बीच की दूरी को भी ध्यान में रखा जाए। कोर्ट ने यह सारी प्रक्रिया दो महीने में पूरा करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।मामला दो अभियंताओं से जुड़़ा हैं और दोनों 40 और 80 प्रतिशत तक स्थायी शारीरिक दिव्यांगता से ग्रस्त हैं।
उनका कहना था कि एचवीपीएनएल ने राज्य सरकार की 23 मई को जारी माॅडल ऑॅनलाइन ट्रांसफर पाॅलिसी को पूरी तरह से अपनाने के बावजूद दिव्यांग कर्मचारियों को सक्षम कर्मचारियों की तुलना में बेहद कम विकल्प दिए हैं। याचिका में बताया कि सक्षम कर्मचारियों को तबादले के लिए 392 विकल्प दिए गए जबकि पहले याची को केवल 15 और दूसरे को सिर्फ 6 विकल्प ही दिए गए।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यह न केवल दिव्यांग अधिकार अधिनियम, 2016 और नीति का उल्लंघन है बल्कि संवैधानिक मूल्यों व समानता के सिद्धांतों के भी खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार केवल पशु-स्तर के अस्तित्व तक सीमित नहीं है बल्कि गरिमा और सार्थक जीवन जीने के अधिकार को भी समाहित करता है। कोर्ट ने राज्य सरकार और निगम को अपनी नीतियों में संशोधन करने का आदेश दिया और कहा कि दिव्यांग कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगा।
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- दिव्यांग कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगा : कोर्ट
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड को दिव्यांग कर्मचारियों के साथ असंवेदनशील और उदासीन रवैया अपनाने पर नाराजगी जताते हुए फटकार लगाई है। कोर्ट ने आदेश दिया कि दिव्यांग कर्मचारियों को भी उतने ही तबादला विकल्प उपलब्ध कराए जाएं जितने सक्षम कर्मचारियों को दिए जाते हैं।
कोर्ट ने कहा कि कार्यालयों को दिव्यांगों के लिए सुलभ बनाया जाना चाहिए। उन्हें गृह जिले या सुविधानुसार स्थान पर तैनाती का अवसर दिया जाए और निवास व कार्यस्थल के बीच की दूरी को भी ध्यान में रखा जाए। कोर्ट ने यह सारी प्रक्रिया दो महीने में पूरा करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।मामला दो अभियंताओं से जुड़़ा हैं और दोनों 40 और 80 प्रतिशत तक स्थायी शारीरिक दिव्यांगता से ग्रस्त हैं।
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उनका कहना था कि एचवीपीएनएल ने राज्य सरकार की 23 मई को जारी माॅडल ऑॅनलाइन ट्रांसफर पाॅलिसी को पूरी तरह से अपनाने के बावजूद दिव्यांग कर्मचारियों को सक्षम कर्मचारियों की तुलना में बेहद कम विकल्प दिए हैं। याचिका में बताया कि सक्षम कर्मचारियों को तबादले के लिए 392 विकल्प दिए गए जबकि पहले याची को केवल 15 और दूसरे को सिर्फ 6 विकल्प ही दिए गए।
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हाईकोर्ट ने कहा कि यह न केवल दिव्यांग अधिकार अधिनियम, 2016 और नीति का उल्लंघन है बल्कि संवैधानिक मूल्यों व समानता के सिद्धांतों के भी खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार केवल पशु-स्तर के अस्तित्व तक सीमित नहीं है बल्कि गरिमा और सार्थक जीवन जीने के अधिकार को भी समाहित करता है। कोर्ट ने राज्य सरकार और निगम को अपनी नीतियों में संशोधन करने का आदेश दिया और कहा कि दिव्यांग कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगा।