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Chandigarh-Haryana News: 1680 निजी स्कूलों पर लटकी तलवार
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एमआईएस पोर्टल पर सत्यापन के दौरान मान्यता नहीं दिखाकर सके ये स्कूल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग की अनदेखी जगजाहिर है। 22 जिलों में 1680 निजी स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं। इन स्कूल संचालकों ने शिक्षा विभाग के मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एमआईएस) पोर्टल पर स्कूलों का पंजीकरण करवा लिया था। इसी आधार पर ये स्कूल बच्चों के स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) काटने की सुविधा तक लेते थे। शिक्षा विभाग के पोर्टल पर सत्यापन के दौरान मान्यता नहीं जमा करने पर अब इन स्कूलों को एमआईएस पोर्टल से हटा दिया गया है। इससे इन स्कूलों पर ताला लगने की तलवार लटक गई है। हालांकि, इस पर आखिरी फैसला सरकार लेगी।
शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों को शिक्षा के अधिकार के तहत दाखिले करने के लिए अपनी जानकारी एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे। 30 मई से 8 जून तक सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों की स्कूलों के दस्तावेजों को जांच करने की जिम्मेदारी निर्धारित की गई थी। प्रदेश में 10,744 निजी स्कूल संचालित हैं। इनमें से 1684 स्कूलों ने अपने दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड नहीं किए। इसके अलावा 1680 स्कूलों की मान्यता के दस्तावेज नहीं मिले। इन स्कूलों की जांच जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों से कराई गई।
पहली से आठवीं तक के स्कूल
बिना मान्यता प्राप्त चलने वाले 1680 स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। ज्यादातर गांवों व कस्बों में चलने वाले छोटे श्रेणी के स्कूल हैं। इन स्कूलों ने नए शैक्षणिक सत्र में दाखिले भी कर लिए हैं। हालांकि, इसको लेकर शिक्षा विभाग ने पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए थे कि जिन स्कूलों पर कार्रवाई होगी, उनमें पढ़न वाले बच्चों का पास के सरकारी स्कूलों में दाखिला कराया जाएगा।
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शिक्षा में सुधार को लेकर सरकार की तरफ से कई अहम फैसले लिए जा रहे हैं। बच्चों के बेहतर भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई की जा रही है। बिना मान्यता चलने वाले स्कूलों को लेकर पहले भी विभाग निर्देश दे चुका है। आगे भी सभी पक्षों को सुनकर उचित फैसला लिया जाएगा।
महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री, हरियाणा
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश में निजी स्कूलों की मनमानी पर शिक्षा विभाग की अनदेखी जगजाहिर है। 22 जिलों में 1680 निजी स्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं। इन स्कूल संचालकों ने शिक्षा विभाग के मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एमआईएस) पोर्टल पर स्कूलों का पंजीकरण करवा लिया था। इसी आधार पर ये स्कूल बच्चों के स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) काटने की सुविधा तक लेते थे। शिक्षा विभाग के पोर्टल पर सत्यापन के दौरान मान्यता नहीं जमा करने पर अब इन स्कूलों को एमआईएस पोर्टल से हटा दिया गया है। इससे इन स्कूलों पर ताला लगने की तलवार लटक गई है। हालांकि, इस पर आखिरी फैसला सरकार लेगी।
शिक्षा निदेशालय ने निजी स्कूलों को शिक्षा के अधिकार के तहत दाखिले करने के लिए अपनी जानकारी एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए थे। 30 मई से 8 जून तक सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों की स्कूलों के दस्तावेजों को जांच करने की जिम्मेदारी निर्धारित की गई थी। प्रदेश में 10,744 निजी स्कूल संचालित हैं। इनमें से 1684 स्कूलों ने अपने दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड नहीं किए। इसके अलावा 1680 स्कूलों की मान्यता के दस्तावेज नहीं मिले। इन स्कूलों की जांच जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों से कराई गई।
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पहली से आठवीं तक के स्कूल
बिना मान्यता प्राप्त चलने वाले 1680 स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। ज्यादातर गांवों व कस्बों में चलने वाले छोटे श्रेणी के स्कूल हैं। इन स्कूलों ने नए शैक्षणिक सत्र में दाखिले भी कर लिए हैं। हालांकि, इसको लेकर शिक्षा विभाग ने पहले ही निर्देश जारी कर दिए गए थे कि जिन स्कूलों पर कार्रवाई होगी, उनमें पढ़न वाले बच्चों का पास के सरकारी स्कूलों में दाखिला कराया जाएगा।
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शिक्षा में सुधार को लेकर सरकार की तरफ से कई अहम फैसले लिए जा रहे हैं। बच्चों के बेहतर भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले निजी स्कूलों पर कार्रवाई की जा रही है। बिना मान्यता चलने वाले स्कूलों को लेकर पहले भी विभाग निर्देश दे चुका है। आगे भी सभी पक्षों को सुनकर उचित फैसला लिया जाएगा।
महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री, हरियाणा