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Chandigarh-Haryana News: बंधुआ मजदूरी के शिकार बिहार के किशोर को 10 लाख रुपये का मुआवजा
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मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप से मिली राहत
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप से बंधुआ मजदूरी, बाल शोषण और अमानवीय व्यवहार का शिकार हुए 15 वर्षीय किशोर को 10 लाख रुपये का मुआवजा मिला है। आयोग के निर्देश पर हरियाणा सरकार ने विशेष मामले के रूप में यह राशि मंजूर की है। आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। बिहार के किशनगंज निवासी बालक अपने साथियों से बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर बिछड़ गया था। आरोप है कि एक व्यक्ति उसे नौकरी का झांसा देकर अपने साथ ले गया और डेयरी फार्म पर दो महीने से अधिक समय तक बंधुआ मजदूर की तरह काम कराया। इस दौरान उससे चारा काटने वाली मशीन पर काम सहित कई खतरनाक कार्य करवाए गए। काम करते समय मशीन की चपेट में आने से बालक का बायां हाथ कोहनी के नीचे से कट गया।
आरोप है कि उपचार कराने के बजाय उसे घायल अवस्था में सुनसान जगह पर छोड़ दिया गया। किसी तरह वह नूंह पहुंचा जहां एक शिक्षक ने उसकी मदद कर इलाज और पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित कराई। आयोग ने जांच में इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना और पुलिस, श्रम विभाग, जिला प्रशासन तथा बाल संरक्षण एजेंसियों से रिपोर्ट तलब की। जांच के बाद बहादुरगढ़ जीआरपी थाने में दर्ज प्राथमिकी मामले में आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया।
आयोग ने बालक की स्थायी विकलांगता और पुनर्वास की जरूरत को देखते हुए 10 लाख रुपये मुआवजे की सिफारिश की। आमतौर पर हरियाणा पीड़ित मुआवजा योजना में ऐसे मामलों में अधिकतम दो लाख रुपये का प्रावधान है लेकिन राज्य सरकार ने विशेष छूट देकर 10 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की। आयोग ने अपराध का पर्दाफाश करने व पीड़ित का पता लगाने में जांच अधिकारी द्वारा किए गए प्रयासों की भी सराहना की है।पुलिस अधीक्षक नितिका गहलौत को प्रशंसा पत्र जारी किया गया है जबकि जांच अधिकारी इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश को प्रशस्ति/पुरस्कार प्रदान करने का मामला सक्षम प्राधिकारी के विचाराधीन है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप से बंधुआ मजदूरी, बाल शोषण और अमानवीय व्यवहार का शिकार हुए 15 वर्षीय किशोर को 10 लाख रुपये का मुआवजा मिला है। आयोग के निर्देश पर हरियाणा सरकार ने विशेष मामले के रूप में यह राशि मंजूर की है। आयोग ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। बिहार के किशनगंज निवासी बालक अपने साथियों से बहादुरगढ़ रेलवे स्टेशन पर बिछड़ गया था। आरोप है कि एक व्यक्ति उसे नौकरी का झांसा देकर अपने साथ ले गया और डेयरी फार्म पर दो महीने से अधिक समय तक बंधुआ मजदूर की तरह काम कराया। इस दौरान उससे चारा काटने वाली मशीन पर काम सहित कई खतरनाक कार्य करवाए गए। काम करते समय मशीन की चपेट में आने से बालक का बायां हाथ कोहनी के नीचे से कट गया।
आरोप है कि उपचार कराने के बजाय उसे घायल अवस्था में सुनसान जगह पर छोड़ दिया गया। किसी तरह वह नूंह पहुंचा जहां एक शिक्षक ने उसकी मदद कर इलाज और पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित कराई। आयोग ने जांच में इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना और पुलिस, श्रम विभाग, जिला प्रशासन तथा बाल संरक्षण एजेंसियों से रिपोर्ट तलब की। जांच के बाद बहादुरगढ़ जीआरपी थाने में दर्ज प्राथमिकी मामले में आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया गया।
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आयोग ने बालक की स्थायी विकलांगता और पुनर्वास की जरूरत को देखते हुए 10 लाख रुपये मुआवजे की सिफारिश की। आमतौर पर हरियाणा पीड़ित मुआवजा योजना में ऐसे मामलों में अधिकतम दो लाख रुपये का प्रावधान है लेकिन राज्य सरकार ने विशेष छूट देकर 10 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत की। आयोग ने अपराध का पर्दाफाश करने व पीड़ित का पता लगाने में जांच अधिकारी द्वारा किए गए प्रयासों की भी सराहना की है।पुलिस अधीक्षक नितिका गहलौत को प्रशंसा पत्र जारी किया गया है जबकि जांच अधिकारी इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश को प्रशस्ति/पुरस्कार प्रदान करने का मामला सक्षम प्राधिकारी के विचाराधीन है।
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