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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Recovery of damages from employee without charge sheet and departmental inquiry is illegal: High Court

बिना चार्जशीट और विभागीय जांच के कर्मचारी से नुकसान की वसूली अवैध : हाईकोर्ट

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कर्मचारी की विधवा को 1.70 लाख बकाया 6 प्रतिशत ब्याज सहित देने का आदेश
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दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम ने रोकी थी याची के पति की बकाया राशि

अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सरकारी कर्मचारी के वेतन व सेवानिवृत्ति लाभों से की गई कटौती पर कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि बिना चार्जशीट जारी किए और बिना विभागीय जांच कराए किसी कर्मचारी से कथित नुकसान की वसूली अवैध और मनमानी है। अदालत ने दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह मृत कर्मचारी की पत्नी को रोके गए 1,70,068 रुपये 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित जारी करें। साथ ही पहले से रोकी गई ग्रेच्युटी की राशि पर भी ब्याज दे।
याचिकाकर्ता रेनू शर्मा के पति सुभाष चंद्र शर्मा दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम में जूनियर इंजीनियर (इलेक्ट्रिकल) थे। वे 28 फरवरी 2017 को सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के बाद निगम ने ट्रांसफार्मरों में तेल की कथित कमी और कुछ पुर्जों के गायब होने का आरोप लगाते हुए कुल 7,12,658 की राशि काट ली। इसमें 1,70,068 वेतन से और 5,42,590 सेवानिवृत्ति लाभों से वसूल की गई। यह पूरी कार्रवाई बिना किसी चार्जशीट और बिना विभागीय जांच के की गई।
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अदालत ने रिकार्ड का हवाला देते हुए विशेष रूप से रेखांकित किया कि स्वयं निगम के एक्सईएन (सब-अर्बन डिवीजन, सिरसा) की जांच में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि कथित नुकसान के लिए कर्मचारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। इसके बावजूद निगम की ओर से वसूली करना न्यायालय के अनुसार गैरकानूनी और मनमानी था। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद या बिना चार्जशीट जारी किए किसी कर्मचारी के ग्रेच्युटी या अन्य वैधानिक लाभ रोके नहीं जा सकते। अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता को शेष बकाया राशि की जानकारी बाद में सरकारी पत्रों के माध्यम से मिली। इसलिए देरी को अनुचित माना गया। हाई कोर्ट ने निगम को निर्देश दिया कि 1,70,068 की बकाया राशि पर सेवानिवृत्ति की तारीख के दो माह बाद से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाए। पहले से जारी की गई 5,42,590 की राशि पर भी 28 फरवरी 2017 से 25 जुलाई 2025 तक ब्याज का भुगतान किया जाए।
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