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Chandigarh-Haryana News: नूंह में समानांतर बिजली लाइसेंस के खिलाफ प्रदर्शन, आवेदन रद्द करने की मांग
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फोटो संख्या : 11
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नूंह में बिजली वितरण के लिए समानांतर लाइसेंस के विरोध में सोमवार को बिजली इंजीनियरों, कर्मचारियों, किसानों और उपभोक्ताओं ने रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने निजी कंपनी के आवेदन को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
हरियाणा पावर रेगुलेटरी कमीशन के सचिव को संबोधित एक ज्ञापन कार्यकारी अभियंता कुलदीप यादव को सौंपा। ज्ञापन में आयोग द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति को भी तत्काल भंग करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह समिति मनमाने और असंवैधानिक तरीके से गठित की गई है जो निष्पक्ष निर्णय लेने में सक्षम नहीं है। रैली में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा गया कि निजी कंपनियों को लाइसेंस दिए जाने से सार्वजनिक विद्युत वितरण व्यवस्था कमजोर होगी। इससे आम उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ बढ़ेगा और क्रॉस सब्सिडी व्यवस्था समाप्त होगी।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे और इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों को केवल लाभकारी उपभोक्ताओं को चुनने की अनुमति देने से सार्वजनिक वितरण निगम आर्थिक रूप से कमजोर होंगे। इससे किसानों, घरेलू और छोटे व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। कर्मचारी नेताओं ने जोर दिया कि बिजली एक अनिवार्य सार्वजनिक सेवा है इसलिए इसे निजी लाभ का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनहित की इन मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नूंह में बिजली वितरण के लिए समानांतर लाइसेंस के विरोध में सोमवार को बिजली इंजीनियरों, कर्मचारियों, किसानों और उपभोक्ताओं ने रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने निजी कंपनी के आवेदन को तत्काल निरस्त करने की मांग की।
हरियाणा पावर रेगुलेटरी कमीशन के सचिव को संबोधित एक ज्ञापन कार्यकारी अभियंता कुलदीप यादव को सौंपा। ज्ञापन में आयोग द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति को भी तत्काल भंग करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह समिति मनमाने और असंवैधानिक तरीके से गठित की गई है जो निष्पक्ष निर्णय लेने में सक्षम नहीं है। रैली में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा गया कि निजी कंपनियों को लाइसेंस दिए जाने से सार्वजनिक विद्युत वितरण व्यवस्था कमजोर होगी। इससे आम उपभोक्ताओं पर बिजली दरों का बोझ बढ़ेगा और क्रॉस सब्सिडी व्यवस्था समाप्त होगी।
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ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे और इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने रैली को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियों को केवल लाभकारी उपभोक्ताओं को चुनने की अनुमति देने से सार्वजनिक वितरण निगम आर्थिक रूप से कमजोर होंगे। इससे किसानों, घरेलू और छोटे व्यावसायिक उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। कर्मचारी नेताओं ने जोर दिया कि बिजली एक अनिवार्य सार्वजनिक सेवा है इसलिए इसे निजी लाभ का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनहित की इन मांगों की अनदेखी की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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