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Chandigarh-Haryana News: पेपरलेस रजिस्ट्री...लोग झेल रहे परेशानी पर दूर होगी पेचीदगी
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पेपरलेस रजिस्ट्री...लोग झेल रहे परेशानी पर दूर होगी पेचीदगी
-ऑनलाइन सिस्टम में तकनीकी दिक्कतें, गलत दस्तावेजों के कारण 327 आवेदन अस्वीकृत
-सरकार ने नियमों में किए कई सुधार, अपलोड सीमा 10 एमबी से बढ़ाकर 40 एमबी की
नंबरगेम-- 927 रजिस्ट्री ही अब तक पूरी हो सकीं
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। 1 नवंबर से शुरू की गई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था फिलहाल लोगों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। पहले एक दिन में औसतन चार हजार रजिस्ट्री होती थीं, वहीं अब ऑनलाइन प्रणाली से सिर्फ 927 रजिस्ट्री पूरी हो सकी हैं। विभाग को अब तक 2,778 आवेदन मिले हैं, जिनमें 495 को तिथि आवंटित की गई है जबकि 327 आवेदन अधूरे या गलत दस्तावेजों के कारण खारिज कर दिए गए हैं।
राजस्व मंत्री विपुल गोयल ने बताया कि राज्य के सभी रजिस्ट्री कार्यालय पूरी तरह कार्यरत हैं और किसी भी पेपरलेस सेवा को निलंबित नहीं किया गया है। नए प्रावधानों के तहत आवेदन के बाद दस्तावेजों के सत्यापन के लिए पांच कार्य दिवस तय किए गए हैं।
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि जनता और अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर कई सुधार किए गए हैं। कुछ गांवों में भूमि रिकॉर्ड की गलत प्रविष्टियां ठीक कर दी गई हैं। नगर पालिका क्षेत्रों में एनओसी की पुरानी प्रक्रिया ही लागू रहेगी। लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों का डाटा शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए अपडेट कर दिया गया है जबकि ग्रामीण कॉलोनियों की समीक्षा नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के परामर्श से की जाएगी।
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हाउसिंग बोर्ड और एचएसवीपी के लिए नई सुविधा
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड और एचएसवीपी मामलों में अब खेवट-खतौनी विवरण देना जरूरी नहीं है। इसके बजाय नगर निकायों की संपत्ति आईडी से पंजीकरण होगा। लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों में सही लाइसेंस नंबर डालते ही सिस्टम संबंधित डाटा स्वतः प्रदर्शित करेगा। पुराने शहरी रिकॉर्ड से खेवट-खसरा कॉलम हटाए जा चुके हैं, जिससे नागरिक अगले दिन से ही अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं।
अपलोड सीमा बढ़ी, नई सुविधा 12 नवंबर से
पेपरलेस रजिस्ट्री में सबसे बड़ी दिक्कत दस्तावेज अपलोड की सीमा थी। पहले यह 10 एमबी थी जिसे अब 40 एमबी कर दिया गया है।
भूमि जोत एवं चकबंदी निदेशक यशपाल ने बताया कि साझेदारी या सहयोग विलेखों के लिए वर्ण सीमा 500 से बढ़ाकर 10,000 कर दी गई है ताकि शर्तें पूरी तरह दर्ज की जा सकें। 12 नवंबर से आपत्ति सहित वापस करें फीचर शुरू होगा, जिससे आवेदक बिना अतिरिक्त शुल्क दिए संशोधित दस्तावेज दोबारा अपलोड कर सकेंगे, बशर्ते पहले गलत जानकारी न दी गई हो। नामों में मामूली अंतर होने पर आवेदन अब रद्द नहीं किया जाएगा।
जीपीए विकल्प चालू, सोमवार से बुक होंगे अपॉइंटमेंट्स
यशपाल ने बताया कि जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) का विकल्प पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। अब इसे और सरल बनाया गया है। नागरिक सोमवार से अपॉइंटमेंट बुक कर सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषक कॉलम के आधार पर स्वामित्व परिवर्तन नहीं किया जा सकता, हालांकि पुराने मामलों की समीक्षा की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्थान संबंधी डाटा को सटीक बताया गया है, फिर भी नागरिक हेल्पडेस्क के जरिए सुधार का अनुरोध कर सकते हैं।
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-ऑनलाइन सिस्टम में तकनीकी दिक्कतें, गलत दस्तावेजों के कारण 327 आवेदन अस्वीकृत
-सरकार ने नियमों में किए कई सुधार, अपलोड सीमा 10 एमबी से बढ़ाकर 40 एमबी की
नंबरगेम
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। 1 नवंबर से शुरू की गई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था फिलहाल लोगों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। पहले एक दिन में औसतन चार हजार रजिस्ट्री होती थीं, वहीं अब ऑनलाइन प्रणाली से सिर्फ 927 रजिस्ट्री पूरी हो सकी हैं। विभाग को अब तक 2,778 आवेदन मिले हैं, जिनमें 495 को तिथि आवंटित की गई है जबकि 327 आवेदन अधूरे या गलत दस्तावेजों के कारण खारिज कर दिए गए हैं।
राजस्व मंत्री विपुल गोयल ने बताया कि राज्य के सभी रजिस्ट्री कार्यालय पूरी तरह कार्यरत हैं और किसी भी पेपरलेस सेवा को निलंबित नहीं किया गया है। नए प्रावधानों के तहत आवेदन के बाद दस्तावेजों के सत्यापन के लिए पांच कार्य दिवस तय किए गए हैं।
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राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्त आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि जनता और अधिकारियों से मिले सुझावों के आधार पर कई सुधार किए गए हैं। कुछ गांवों में भूमि रिकॉर्ड की गलत प्रविष्टियां ठीक कर दी गई हैं। नगर पालिका क्षेत्रों में एनओसी की पुरानी प्रक्रिया ही लागू रहेगी। लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों का डाटा शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के लिए अपडेट कर दिया गया है जबकि ग्रामीण कॉलोनियों की समीक्षा नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग के परामर्श से की जाएगी।
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हाउसिंग बोर्ड और एचएसवीपी के लिए नई सुविधा
डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड और एचएसवीपी मामलों में अब खेवट-खतौनी विवरण देना जरूरी नहीं है। इसके बजाय नगर निकायों की संपत्ति आईडी से पंजीकरण होगा। लाइसेंस प्राप्त कॉलोनियों में सही लाइसेंस नंबर डालते ही सिस्टम संबंधित डाटा स्वतः प्रदर्शित करेगा। पुराने शहरी रिकॉर्ड से खेवट-खसरा कॉलम हटाए जा चुके हैं, जिससे नागरिक अगले दिन से ही अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं।
अपलोड सीमा बढ़ी, नई सुविधा 12 नवंबर से
पेपरलेस रजिस्ट्री में सबसे बड़ी दिक्कत दस्तावेज अपलोड की सीमा थी। पहले यह 10 एमबी थी जिसे अब 40 एमबी कर दिया गया है।
भूमि जोत एवं चकबंदी निदेशक यशपाल ने बताया कि साझेदारी या सहयोग विलेखों के लिए वर्ण सीमा 500 से बढ़ाकर 10,000 कर दी गई है ताकि शर्तें पूरी तरह दर्ज की जा सकें। 12 नवंबर से आपत्ति सहित वापस करें फीचर शुरू होगा, जिससे आवेदक बिना अतिरिक्त शुल्क दिए संशोधित दस्तावेज दोबारा अपलोड कर सकेंगे, बशर्ते पहले गलत जानकारी न दी गई हो। नामों में मामूली अंतर होने पर आवेदन अब रद्द नहीं किया जाएगा।
जीपीए विकल्प चालू, सोमवार से बुक होंगे अपॉइंटमेंट्स
यशपाल ने बताया कि जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) का विकल्प पहले की तरह उपलब्ध रहेगा। अब इसे और सरल बनाया गया है। नागरिक सोमवार से अपॉइंटमेंट बुक कर सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषक कॉलम के आधार पर स्वामित्व परिवर्तन नहीं किया जा सकता, हालांकि पुराने मामलों की समीक्षा की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्थान संबंधी डाटा को सटीक बताया गया है, फिर भी नागरिक हेल्पडेस्क के जरिए सुधार का अनुरोध कर सकते हैं।