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नैनो यूरिया किसानों के साथ धोखाधड़ी : अभय चौटाला
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने नैनो यूरिया को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार किसानों पर नैनो यूरिया थोपकर उनके साथ धोखाधड़ी कर रही है। नैनो यूरिया असल में फोका पानी है जिसका इस्तेमाल फसल की उपज को बढ़ाने के बजाय घटा देता है। इनेलो ने नैनो यूरिया की जबरन बिक्री के खिलाफ राज्यभर में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।
चौटाला ने दावा किया कि नैनो यूरिया की 500 एमएल बोतल में सिर्फ 4 फीसदी नाइट्रोजन होता है जो धरती को सिर्फ 20 ग्राम नाइट्रोजन दे पाता है। जबकि धान और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों को प्रति एकड़ 45 किलोग्राम पारंपरिक यूरिया की जरूरत होती है जिसमें 46 फीसदी नाइट्रोजन होता है। ऐसे में सरकार का यह दावा झूठा है कि 20 ग्राम नाइट्रोजन पारंपरिक यूरिया के 20 किलोग्राम के बराबर है।
उन्होंने कहा कि पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी और अन्य अनुसंधान संस्थानों की रिपोर्टें स्पष्ट कर चुकी हैं कि नैनो यूरिया के दो स्प्रे और 50 फीसदी नाइट्रोजन ट्रीटमेंट से चावल की पैदावार 13 फीसदी और गेहूं की पैदावार 17.2 फीसदी तक कम हो गई। जबकि पारंपरिक तरीके से 100 फीसदी नाइट्रोजन देने पर उपज में कोई कमी नहीं आई।
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चंडीगढ़। इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी अभय सिंह चौटाला ने नैनो यूरिया को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार किसानों पर नैनो यूरिया थोपकर उनके साथ धोखाधड़ी कर रही है। नैनो यूरिया असल में फोका पानी है जिसका इस्तेमाल फसल की उपज को बढ़ाने के बजाय घटा देता है। इनेलो ने नैनो यूरिया की जबरन बिक्री के खिलाफ राज्यभर में विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है।
चौटाला ने दावा किया कि नैनो यूरिया की 500 एमएल बोतल में सिर्फ 4 फीसदी नाइट्रोजन होता है जो धरती को सिर्फ 20 ग्राम नाइट्रोजन दे पाता है। जबकि धान और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों को प्रति एकड़ 45 किलोग्राम पारंपरिक यूरिया की जरूरत होती है जिसमें 46 फीसदी नाइट्रोजन होता है। ऐसे में सरकार का यह दावा झूठा है कि 20 ग्राम नाइट्रोजन पारंपरिक यूरिया के 20 किलोग्राम के बराबर है।
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उन्होंने कहा कि पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी और अन्य अनुसंधान संस्थानों की रिपोर्टें स्पष्ट कर चुकी हैं कि नैनो यूरिया के दो स्प्रे और 50 फीसदी नाइट्रोजन ट्रीटमेंट से चावल की पैदावार 13 फीसदी और गेहूं की पैदावार 17.2 फीसदी तक कम हो गई। जबकि पारंपरिक तरीके से 100 फीसदी नाइट्रोजन देने पर उपज में कोई कमी नहीं आई।
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