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17 से बढ़ाकर 20 फीसदी की जाए धान में नमी की सीमा : पेटवाड़
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फोटो -
- एक क्विंटल धान के बदले मिलर्स से 58-59 किलो चावल लेने की मांग, बोले- इससे किसान और आढ़ती दोनों को मिलेगी राहत
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने धान खरीद में नमी की सीमा 17 से बढ़ाकर 20 फीसदी करने और मिलर्स से एक क्विंटल धान के बदले 58-59 किलो चावल लेने की मांग उठाई है। चंडीगढ़ स्थित हरियाणा एमएलए हॉस्टल में बुधवार को प्रेसवार्ता के दौरान जस्सी ने कहा कि मौजूदा शर्तों के कारण किसान और आढ़ती दोनों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि एक क्विंटल धान के बदले 67 किलो चावल निकलना मुश्किल है। वहीं, मंडियों में नमी के नाम पर किसानों को परेशान किया जा रहा है और धान का उठान भी धीमा है। सरकार को दोनों शर्तों में राहत देनी चाहिए। पेटवाड़ ने कहा कि सरकार का धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल खरीदने का वादा भी अधूरा है। सरकारी पोर्टल पर गलत फसल दर्ज होने से किसानों को परेशानी हो रही है। विधायक ने कहा कि हरियाणा में नशा खरीदने जाओ तो कोई प्रूफ नहीं चाहिए मगर मंडियों में किसानों को फसल बेचने के लिए तीन गवाह अनिवार्य किए हुए हैं। सरकार स्पष्ट करे कि किसानों पर सत्यापन की शर्तें क्यों लगाई जा रही हैं।
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- एक क्विंटल धान के बदले मिलर्स से 58-59 किलो चावल लेने की मांग, बोले- इससे किसान और आढ़ती दोनों को मिलेगी राहत
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। कांग्रेस विधायक जस्सी पेटवाड़ ने धान खरीद में नमी की सीमा 17 से बढ़ाकर 20 फीसदी करने और मिलर्स से एक क्विंटल धान के बदले 58-59 किलो चावल लेने की मांग उठाई है। चंडीगढ़ स्थित हरियाणा एमएलए हॉस्टल में बुधवार को प्रेसवार्ता के दौरान जस्सी ने कहा कि मौजूदा शर्तों के कारण किसान और आढ़ती दोनों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि एक क्विंटल धान के बदले 67 किलो चावल निकलना मुश्किल है। वहीं, मंडियों में नमी के नाम पर किसानों को परेशान किया जा रहा है और धान का उठान भी धीमा है। सरकार को दोनों शर्तों में राहत देनी चाहिए। पेटवाड़ ने कहा कि सरकार का धान 3100 रुपये प्रति क्विंटल खरीदने का वादा भी अधूरा है। सरकारी पोर्टल पर गलत फसल दर्ज होने से किसानों को परेशानी हो रही है। विधायक ने कहा कि हरियाणा में नशा खरीदने जाओ तो कोई प्रूफ नहीं चाहिए मगर मंडियों में किसानों को फसल बेचने के लिए तीन गवाह अनिवार्य किए हुए हैं। सरकार स्पष्ट करे कि किसानों पर सत्यापन की शर्तें क्यों लगाई जा रही हैं।
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