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Haryana: नायाब मंत्रिमंडल पर मनोहर छाप, टिकट वितरण से लेकर मंत्री बनाने तक में पर्दे के पीछे रहकर लिखी पटकथा
Fri, 18 Oct 2024 08:52 AM IST
नवीन दलाल
सोमदत्त शर्मा, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, चंडीगढ़
Published by: नवीन दलाल
Updated Fri, 18 Oct 2024 08:52 AM IST
सार
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को चारों खाने चित करने के बाद भविष्य में भी भाजपा उसको वापसी करने कोई मौका नहीं देना चाहती है। बेशक मनोहर लाल केंद्र में मंत्री बन हों, लेकिन मनोहर लाल का हरियाणा में दखल कम नहीं हुआ है।
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पूर्व सीएम मनोहर लाल
- फोटो : संवाद
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विस्तार
हरियाणा के नए मंत्रिमंडल गठन में भाजपा हाईकमान की दूरदर्शी सोच के साथ-साथ केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल की पूरी छाप है। अधिकतर पुराने और नए चेहरों की एंट्री मनोहर लाल की तरफ से पर्दे के पीछे रहकर लिखी गई पटकथा से ही हो पाई है। पूरी कैबिनेट में एक भी चेहरा ऐसा नहीं है, जिसकी मनोहर लाल के साथ नजदीकियां नहीं हों। इंद्रजीत और किरण चौधरी जरूर अपनी पारिवारिक विरासत और रसूख के दम पर अपनी बेटियों को मंत्रिमंडल में स्थान दिला पाए हैं, लेकिन ये भी मनोहर की रजामंदी का ही परिणाम है।
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विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को चारों खाने चित करने के बाद भविष्य में भी भाजपा उसको वापसी करने कोई मौका नहीं देना चाहती है। बेशक मनोहर लाल केंद्र में मंत्री बन हों, लेकिन मनोहर लाल का हरियाणा में दखल कम नहीं हुआ है। इसी कारण मंत्रिमंडल गठन के पीछे उनके समेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह व सैनी की कूटनीति साफ दिखाई देती है।
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चुनाव से पहले मनोहर लाल के नेतृत्व में किरण चौधरी ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा और भाजपा ने उनकी बेटी श्रुति को तोशाम से टिकट दिया। अब जीत के बाद मनोहर के चलते ही उनको मंत्री पद से भी नवाजा गया है। इसी प्रकार, कृष्ण लाल पंवार को मनोहर ही भाजपा में लाए थे और राज्यसभा सांसद बनाया था। मनोहर के आशीर्वाद से ही वे इसराना से विधानसभा का चुनाव लड़े और अब मंत्री पद भी पाने में कामयाब रहे।
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महिपाल ढांडा पहले से ही मनोहर के साथ रहे हैं। पिछली बार मनोहर लाल ने विपुल गोयल और राव नरबीर के टिकट कटवाए थे, लेकिन इस बार दोनों को टिकट भी दिलाया और अब मंत्रिमंडल मेंं भी उनकी रजामंदी काम आई है। कृष्ण बेदी, रणबीर गंगवा मनोहर के नजदीकी रहे हैं। अरविंद शर्मा के साथ जरूर मनोहर की अनबन रही है। पहरावर जमीन विवाद को लेकर दोनों आमने-सामने हो गए थे, लेकिन शर्मा की मोदी से नजदीकी काम आई है।
करनाल की मनोहर ने अपने पास रखी कमाननया मंत्रिमंडल गठन करनाल जिले के लिए कुछ खास नहीं रहा। एक तो करनाल से सीएम सिटी का दर्जा छिन गया, दूसरा पांचों सीट भाजपा को देने के बावजूद किसी भी विधायक को मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला है। चूंकि मनोहर लाल खुद करनाल से सांसद हैं तो मनोहर ने करनाल की कमान अपने पास ही रखी है। घरौंडा से विधायक हरविंद्र कल्याण का नाम जरूर स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के लिए चल रहा है।
नायब सैनी ने निभाई दोस्ती
मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की दोस्ती की झलक भी दिख रही है। यमुनानगर जिले की रादौर सीट से विधायक श्याम सिंह राणा सैनी के दोस्त हैं। वे इनेलो के टिकट पर प्रत्याशी भी घोषित कर दिए थे, लेकिन ऐन मौके पर सैनी उनको भाजपा में लाए और टिकट दिलाया। अब जीत के बाद उनको कैबिनेट मंत्री भी बनवाया है। राणा सैनी की लाडवा सीट के पड़ोसी भी हैं।