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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Land acquisition compensation cannot be reduced without the opinion of the collector: High Court

भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में कलेक्टर की राय के बिना नहीं की जा सकती कटौती: हाईकोर्ट

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- 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 26 की हाईकोर्ट ने की महत्वपूर्ण व्याख्या
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- दिल्ली मेट्रो ट्रैक के लिए गुरुग्राम में भूमि अधिग्रहण से जुड़ा हुआ है मामला


चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने भूमि अधिग्रहण मामलों में कटौती सिद्धांत के प्रयोग पर यह स्पष्ट किया है कि 2013 के भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास व पुनर्स्थापन अधिनियम की धारा 26 के तहत कलेक्टर की ओर से स्पष्ट राय दर्ज किए बिना औसत बिक्री मूल्य पर कोई कटौती लागू नहीं की जा सकती है।



जस्टिस हरकेश मनूजा ने यह फैसला दिल्ली मेट्रो रेल ट्रैक के लिए गुरुग्राम के मोहम्मदपुर झारसा गांव की भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में सुनाया है। कोर्ट ने रेफरेंस कोर्ट की ओर से 40 प्रतिशत कटौती को गलत ठहराते हुए केवल 10 प्रतिशत कटौती को वैध माना। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2013 अधिनियम के तहत बाजार मूल्य निर्धारित करने का तरीका पूरी तरह से सांख्यिकीय और विधिसम्मत है न कि 1894 अधिनियम की तरह न्यायालयीय विवेक पर आधारित। कोर्ट ने कहा कि 2013 का कानून औसत बिक्री मूल्य पर किसी भी तरह की न्यायिक कटौती की अनुमति नहीं देते जब तक कलेक्टर यह राय दे कि बिक्री मूल्य असामान्य रूप से अधिक है।
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कोर्ट ने कहा कि इस मामले में कलेक्टर ने कोई ऐसी राय दर्ज नहीं की थी, इसलिए रेफरेंस कोर्ट की ओर से 40 प्रतिशत की कटौती लगाना कानूनन गलत है।

वर्तमान मामले में भूमि अधिग्रहण वर्ष 2013–2014 की अधिसूचनाओं के तहत किया गया। कलेक्टर ने 13 जनवरी 2017 को मुआवजा 1.90 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तय किया था। रेफरेंस कोर्ट ने इसे बढ़ाकर 2.04 करोड़ रुपये प्रति एकड़ किया लेकिन 40 प्रतिशत की कटौती लगा दी। भूमि मालिकों ने इस कटौती को चुनौती दी, वहीं एचएसआईआईडीसी ने कम मूल्य वाली बिक्री का हवाला देकर मुआवजा घटाने की मांग की।
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एचएसआईआईडीसी ने 1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की लगती जमीन के बिक्री दस्तावेज पेश किएए जिसे अदालत ने खारिज करते हुए कहा कि कलेक्टर रेट से नीचे के सौदे असली नहीं माने जा सकते। कोर्ट ने कहा कि मेट्रो ट्रैक के लिए अधिग्रहण कोई विकास व्यय नहीं, इसलिए भारी कटौती का सवाल ही नहीं उठता। कोर्ट ने कहा कि जब तक कलेक्टर यह नहीं कहता कि औसत कीमत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई है, अदालत कोई कटौती नहीं लगा सकती। कोर्ट ने मुआवजे को बढ़ाकर 3.06 करोड़ रुपये प्रति एकड़ कर दिया और 10 प्रतिशत की लागू करने का आदेश दिया।
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