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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   It is not right to withdraw the promotion of officers who have held high positions for a long time: High Court

लंबे समय तक उच्च पद पर रह चुके अधिकारियों की पदोन्नति वापस लेना ठीक नहीं: हाईकोर्ट

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हरियाणा पुलिस के अधिकारियों की एडहाक पदोन्नति को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार
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2008 की ओआरपी नीति के तहत इन्हें दी गई थी एडहॉक पदोन्नति

चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा पुलिस के कई अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी एडहाॅक पदोन्नतियों को बरकरार रखने के आदेश दे दिए है। जस्टिस जगमोहन बंसल की एकल पीठ ने कहा कि इतने लंबे समय तक उच्च पदों पर रह चुके इन अधिकारियों से पदोन्नतियों को वापस लेना न तो न्यायोचित है और न ही व्यावहारिक। इतने वर्षों बाद यह उनके मनोबल और कार्य परिस्थितियों दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा।



अमरेंद्र सिंह व अन्य ने याचिका दाखिल करते हुए बताया था कि उन्हें 2008 की ओआरपी नीति के तहत अस्थायी रूप से उच्च पदों पर पदोन्नत किया गया था। बाद में इस नीति में 2013 में संशोधन किया गया जिसके तहत पात्र पुलिस कर्मियों को उनके प्रदर्शन और सेवा की अवधि के आधार पर एडहाॅक के रूप में एएसआई या एसआई जैसे पदों पर पदोन्नति दी जा सकती थी। हालांकि इस नीति के अंतर्गत उन्हें उच्च पद का प्रतीकात्मक दर्जा तो मिलता था लेकिन उनके वेतनमान में कोई वृद्धि नहीं की जाती थी।
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सरकार ने दिसंबर 2017 में इन अधिकारियों को शो-काॅज नोटिस जारी किए जिसमें कहा गया कि कई एडहाॅक पदोन्नति निर्धारित पात्रता मानकों का पालन किए बिना दी गई थीं। इन नोटिसों के पीछे जगमिंदर सिंह केस में आए एक पुराने फैसले का हवाला दिया गया था जिसमें हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने भाई-भतीजावाद और पक्षपात के चलते दी गई पदोन्नतियों पर गंभीर टिप्पणी की थी। अदालत ने उस समय राज्य सरकार को ऐसे सभी मामलों की समीक्षा करने और अनुचित लाभ वापस लेने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यद्यपि राज्य सरकार को ओआरपी नीति की समीक्षा करने का अधिकार है लेकिन यह समीक्षा इतने लंबे समय बाद की जा रही है जब अधिकांश अधिकारी पिछले 11 वर्षों से उच्च पदों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब यदि इन अधिकारियों को उनके मूल पद पर वापस भेजा गया तो यह न केवल उनके लिए मनोवैज्ञानिक रूप से कठिन होगा, बल्कि कार्यस्थल पर भी असहजता उत्पन्न करेगा, क्योंकि उन्हें उन्हीं सहयोगियों के साथ काम करना होगा जिन्हें वे वर्षों से वरिष्ठता के आधार पर निर्देश देते रहे हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश का उद्देश्य किसी अधिकारी को अनुचित लाभ देना नहीं है, बल्कि सेवा में स्थिरता और प्रशासनिक व्यवहारिकता को बनाए रखना है। साथ ही, कोर्ट ने यह भी कहा कि इस निर्णय का असर अधिकारियों की नियमित पदोन्नति प्रक्रिया या उनके खिलाफ लंबित किसी भी विभागीय कार्रवाई पर नहीं पड़ेगा। अदालत ने राज्य सरकार को यह निर्देश दिया कि वह ओआरपी नीति के अंतर्गत दी गई पुरानी एडहाक पदोन्नतियों को छेड़े बिना, भविष्य में पदोन्नति के मामलों में पारदर्शिता और योग्यता के सिद्धांतों को सुनिश्चित करे।
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