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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा में शिशु मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत के बराबर पहुंची
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एसआरएस के मुताबिक आईएमआर 1,000 जीवित जन्मों पर 24 रह गई है, पंजाब से तेज सुधार
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट 2024 के अनुसार राज्य की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) घटकर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 24 रह गई है जो अब राष्ट्रीय औसत के बराबर है। यह उपलब्धि राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में हुए निरंतर सुधार को दर्शाती है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में राज्य की शिशु मृत्यु दर 28 से घटकर 24 हो गई है यानी लगभग 14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि यह सुधार मजबूत स्वास्थ्य अवसंरचना, बेहतर नवजात देखभाल और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का परिणाम है। हरियाणा ने कई बड़े राज्यों की तुलना में बेहतर सुधार दर हासिल की है। इस अवधि में पंजाब में शिशु मृत्यु दर 18 से घटकर 16 हुई जबकि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में यह दर अभी भी लगभग 35 से 36 के आसपास बनी हुई है।
राज्य में इस सुधार का श्रेय स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट्स (एसएनसीयू), न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट्स (एनबीएसयू), न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर्स (एनआरसी), कंगारू मदर केयर (केएमसी), नवजात देखभाल कक्ष और होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर सेवाओं के विस्तार को दिया गया है। साथ ही संस्थागत प्रसव में वृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं ने भी अहम भूमिका निभाई है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि राज्य सरकार अब एसएनसीयू और एनबीएसयू जैसी इकाइयों को और मजबूत करने व कई केंद्रों को मातृ एवं नवजात देखभाल इकाइयों (एमएनसीयू) में अपग्रेड करने पर काम कर रही है। पिछले एक दशक में राज्य की शिशु मृत्यु दर 41 से घटकर 24 तक पहुंचना स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधार का संकेत है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) रिपोर्ट 2024 के अनुसार राज्य की शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) घटकर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर 24 रह गई है जो अब राष्ट्रीय औसत के बराबर है। यह उपलब्धि राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में हुए निरंतर सुधार को दर्शाती है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि पिछले पांच वर्षों में राज्य की शिशु मृत्यु दर 28 से घटकर 24 हो गई है यानी लगभग 14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि यह सुधार मजबूत स्वास्थ्य अवसंरचना, बेहतर नवजात देखभाल और सामुदायिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का परिणाम है। हरियाणा ने कई बड़े राज्यों की तुलना में बेहतर सुधार दर हासिल की है। इस अवधि में पंजाब में शिशु मृत्यु दर 18 से घटकर 16 हुई जबकि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में यह दर अभी भी लगभग 35 से 36 के आसपास बनी हुई है।
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राज्य में इस सुधार का श्रेय स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट्स (एसएनसीयू), न्यूबॉर्न स्टेबिलाइजेशन यूनिट्स (एनबीएसयू), न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर्स (एनआरसी), कंगारू मदर केयर (केएमसी), नवजात देखभाल कक्ष और होम-बेस्ड न्यूबॉर्न केयर सेवाओं के विस्तार को दिया गया है। साथ ही संस्थागत प्रसव में वृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं ने भी अहम भूमिका निभाई है। डॉ. मिश्रा ने बताया कि राज्य सरकार अब एसएनसीयू और एनबीएसयू जैसी इकाइयों को और मजबूत करने व कई केंद्रों को मातृ एवं नवजात देखभाल इकाइयों (एमएनसीयू) में अपग्रेड करने पर काम कर रही है। पिछले एक दशक में राज्य की शिशु मृत्यु दर 41 से घटकर 24 तक पहुंचना स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधार का संकेत है।
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