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Haryana: निजी अस्पतालों को वॉर्निंग... इलाज से मना किया तो जुर्माना और पैनल से होंगे बाहर

Sat, 09 Aug 2025 02:02 PM IST
चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चण्डीगढ़-हरियाणा ब्यूरो Updated Sat, 09 Aug 2025 02:02 PM IST
सार

हरियाणा सरकार ने निजी अस्पतालों पर सख्ती की है। सरकार की तरफ से चेतावनी दी गई है कि अगर मरीजों का इलाज बंद किया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आयुष्मान भारत योजना के तहत सभी लंबित बकाया राशि का विधिवत भुगतान होगा।

 

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Haryana Govt warn to private hospital for refuse treatment will be fined and removed from panel
हरियाणा के सीएम नायब सैनी - फोटो : X @NayabSainiBJP

विस्तार

आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लाभार्थियों का इलाज नहीं करने वाले निजी अस्पतालों को हरियाणा सरकार ने चेतावनी जारी की है। हरियाणा की स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) संगीता तेतरवाल ने बयान जारी कर कहा कि पैनल से जुड़े अस्पताल के खिलाफ अगर मरीजों का इलाज करने से मना किए जाने की शिकायत मिलती है तो जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा उनको आयुष्मान भारत के पैनल से बाहर करने व लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

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उन्होंने चेतावनी दी कि अगर फीस लेने संबंधी भी कोई शिकायत मिलती है तो उन पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) और एसएचए द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार सख्ती बरती जाएगी।
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दूसरी तरफ प्रदेश के निजी अस्तपालों मेंं लगातार दूसरे दिन योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं हुआ। किसी भी जिले में ऑपरेशन नहीं किया गया। डॉक्टर दो दिन से इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की हरियाणा शाखा के आह्वान पर बकाया भुगतान की मांग को लेकर विरोध जता रहे हैं। उन्होंने सभी 22 जिलाें में सभी सेवाएं बंद कर रखी हैं। उनकी बकाया राशि को लेकर राज्य की स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए) के मुताबिक, सूचीबद्ध अस्पतालों को सभी भुगतान एफआईएफओ (पहले आओ पहले पाओ) पद्धति के अनुसार जारी किए जा रहे हैं। निजी अस्पतालों को कहा गया है कि सभी लंबित बकाया राशि का विधिवत भुगतान किया जाएगा।
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जल्द से जल्द होगा भुगतान
सीईओ ने बताया कि एसएचए जिला कार्यान्वयन इकाइयों और अन्य माध्यमों से सभी सूचीबद्ध अस्पतालों के साथ निरंतर संपर्क में है। राज्यभर के सूचीबद्ध अस्पतालों को आश्वस्त किया गया है कि लंबित भुगतान जल्द से जल्द जारी कर दिया जाएगा।

एसएचए ने कहा-जायज मांगें मानी, तभी कमेटियों में शामिल किया
एसएचए का कहना है कि आईएमए और सूचीबद्ध अस्पतालों की कई जायज मांगों पर विचार किया गया है और उनका समाधान भी किया गया है। उनकी मांगों के अनुसार ही आईएमए के सदस्यों व निजी अस्पतालों के कई प्रतिनिधियों को राज्य पैनल समिति, राज्य शिकायत निवारण समिति और जिला शिकायत निवारण समितियों में शामिल किया गया है। साथ ही उनके नवीनतम पैकेज की बात भी मानी गई है। एसएचए के मुताबिक यदि उन्हें सीएम विंडो, जन संवाद पोर्टल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म/एसएमजीटी पोर्टल, ईमेल या किसी अन्य चैनलों के माध्यम से शिकायत मिली तो सख्ती की जाएगी।

सरकार का दावा-इलाज जारी है, कई अस्पतालों ने हिस्सा नहीं लिया
स्टेट हेल्थ एजेंसी के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवाएं निलंबित करने का कोई वैध कारण नहीं है, क्योंकि उनकी सभी मांग व मुद्दों का पहले ही समाधान कर दिया है। कई सूचीबद्ध अस्पतालों ने यह भी सूचित किया है कि वे इस योजना के तहत सेवाओं को वापस लेने के आईएमए के आह्वान में भाग नहीं ले रहे हैं। सरकार की ओर से यह भी दावा किया गया है कि जिस दिन हड़ताल का दावा किया जा रहा है, उस दिन यानी सात अगस्त को निजी अस्पतालों से 2.5 करोड़ रुपये के पूर्व-अधिकृत क्लेम (दावे) प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा मई 2025 के पहले सप्ताह तक के भुगतान मंजूर कर दिए गए हैं।


आईएमए का दावा-सभी निजी अस्पताल हड़ताल में शामिल
आईएमए के पूर्व प्रधान डाॅ. अजय महाजन ने दावा किया कि राज्य के सभी निजी अस्पताल हड़ताल में शामिल हैं। राज्य सरकार की ओर जानबूझ कर भ्रम फैला रही है। जिन मरीजों को पहले तारीख दी जा चुकी है, सिर्फ उन्हीं का इलाज किया जा रहा है। नए मरीजों का इलाज अस्पताल नहीं कर रहे हैं। जो भुगतान का दावा किया जा रहा है, वह पहले के क्लेम हैं।

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