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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Housing Board did not inform allottees for 2 years, now recalculation will have to be done within 30 days.

Chandigarh-Haryana News: हाउसिंग बोर्ड ने 2 साल तक आवंटी को नहीं दी सूचना, अब 30 दिनों में करनी होगी दोबारा से गणना

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हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने मामले की सुनवाई करते हुए पांच हजार रुपये क्षतिपूर्ति प्रदान करने के आदेश दिए
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चंडीगढ़। हरियाणा राइट टू सर्विस कमीशन ने हाउसिंग बोर्ड को बड़ी लापरवाही बरतने पर सख्त आदेश दिए हैं। कमीशन ने हरियाणा हाउसिंग बोर्ड को आदेश दिए कि शिकायतकर्ता के खाते में दर्ज बकाया राशि की पुनः गणना करके उसे 30 दिनों के अंदर संशोधित विवरण उपलब्ध कराएं। इसके साथ ही शिकायतकर्ता को पांच हजार रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान करने का भी आदेश दिया है। संबंधित राशि का भुगतान हाउसिंग बोर्ड के वही अधिकारी करेंगे जिन्होंने दो वर्षों तक आवश्यक आदेश जारी नहीं किए।
आयोग के अनुसार हाउसिंग बोर्ड ने 3 अगस्त 2022 की जीएसटी (वस्तु व सेवाकर) अधिसूचना के आधार पर अतिरिक्त कर और ब्याज तो लगा दिया लेकिन दो वर्ष तक किसी भी आवंटी को इस संबंध में कोई नोटिस जारी नहीं किया। इस बीच बगैर किसी सूचना के ब्याज वसूलना न केवल न्यायसंगत प्रक्रिया के विपरीत है बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण भी है। बोर्ड के माध्यम से प्रशासनिक बाधाओं के तर्क को कमीशन ने अस्वीकार कर दिया और बताया कि बोर्ड ने कोई तथ्य प्रस्तुत नहीं किए।
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यह भी बताया कि जीएसटी की मूल राशि वैध है और इसका भुगतान शिकायतकर्ता को करना होगा लेकिन जिस अवधि में कोई नोटिस जारी नहीं किया गया उस दौरान का ब्याज शिकायतकर्ता पर नहीं डाला जा सकता। सीजीएसटी के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रावधान का पालन न करना कानून की भावना के विपरीत है। कमीशन ने स्पष्ट किया कि आवेदक के खाते में दर्ज बकाया सीधे इसी सेवा से संबंधित हैं तो आयोग वित्तीय गणना की वैधता और निष्पक्षता की जांच करने का पूर्ण अधिकार रखता है।
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कमीशन ने अपने आदेश में कहा कि हाउसिंग बोर्ड और शिकायतकर्ता के बीच वर्ष 2022 के बाद कोई सक्रिय कानूनी अनुबंध भी नहीं था ऐसे में अतिरिक्त कर लगाने से पहले आवंटी को सूचना देना और उसकी देयता स्पष्ट करना अनिवार्य था। कमीशन ने हाउसिंग बोर्ड को 19 दिसंबर 2025 तक आदेश की अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए भी कहा है। कमीशन ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में आदेशों का पालन नहीं किया गया या सक्षम न्यायालय से स्थगन या निरस्तीकरण आदेश नहीं लिया गया तो आयोग को हाउसिंग बोर्ड के मुख्य प्रशासक के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई भी शुरू कर सकता है।
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