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Chandigarh-Haryana News: झुग्गियां गिराने पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, यथास्थिति बहाल करने का निर्देश
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-सिरसा के भरोखान गांव में झुग्गियां गिराने का मामला पहुंचा था हाईकोर्ट
-आरोप के अनुसार बिना किसी पूर्व सूचना के सुबह-सुबह की गई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के सिरसा जिले में भूमिहीनों की झुग्गियां ढहाने के मामले को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर यथास्थिति बहाल करने का आदेश दिया है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उनके पास कोई ज़मीन नहीं है और वे दशकों से भरोखान गांव की झुग्गियों में रह रहे हैं। याचिका मेंं आरोप लगाया गया कि बिना किसी पूर्व सूचना और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए पुलिस बल के साथ आए अधिकारियों ने सुबह 3 बजे उनकी झुग्गियों को ध्वस्त कर दिया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह कार्रवाई 2023 में हाईकोर्ट की खंडपीठ के सुनाए गए फैसले का पूरी तरह उल्लंघन है। उस आदेश में सरकार को दो महीने के भीतर याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन पर फैसला लेने के निर्देश दिए गए थे लेकिन न तो कोई कार्रवाई की गई न ही झुग्गीवासियों को योजना का लाभ दिया गया।
याची पक्ष ने दावा किया कि वे महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत लाभ पाने के पात्र थे, जो अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग (ए) और बीपीएल परिवारों को 100 वर्ग गज का मुफ्त प्लाट प्रदान करती है। फिर भी उन्हें यह कहकर बाहर कर दिया गया कि वह पहले से ही पंचायती जमीन पर रह रहे हैं। झुग्गियों को ढहाए जाने के बाद याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अधिकारियों ने अब हाईकोर्ट को विश्वास दिलाया कि है एक सप्ताह के भीतर झुग्गियों की यथास्थिति बहाल की जाएगी।
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-आरोप के अनुसार बिना किसी पूर्व सूचना के सुबह-सुबह की गई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा के सिरसा जिले में भूमिहीनों की झुग्गियां ढहाने के मामले को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर यथास्थिति बहाल करने का आदेश दिया है।
स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की कार्रवाई के खिलाफ हाईकोर्ट की शरण ली है। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उनके पास कोई ज़मीन नहीं है और वे दशकों से भरोखान गांव की झुग्गियों में रह रहे हैं। याचिका मेंं आरोप लगाया गया कि बिना किसी पूर्व सूचना और कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए पुलिस बल के साथ आए अधिकारियों ने सुबह 3 बजे उनकी झुग्गियों को ध्वस्त कर दिया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह कार्रवाई 2023 में हाईकोर्ट की खंडपीठ के सुनाए गए फैसले का पूरी तरह उल्लंघन है। उस आदेश में सरकार को दो महीने के भीतर याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन पर फैसला लेने के निर्देश दिए गए थे लेकिन न तो कोई कार्रवाई की गई न ही झुग्गीवासियों को योजना का लाभ दिया गया।
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याची पक्ष ने दावा किया कि वे महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत लाभ पाने के पात्र थे, जो अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग (ए) और बीपीएल परिवारों को 100 वर्ग गज का मुफ्त प्लाट प्रदान करती है। फिर भी उन्हें यह कहकर बाहर कर दिया गया कि वह पहले से ही पंचायती जमीन पर रह रहे हैं। झुग्गियों को ढहाए जाने के बाद याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। अधिकारियों ने अब हाईकोर्ट को विश्वास दिलाया कि है एक सप्ताह के भीतर झुग्गियों की यथास्थिति बहाल की जाएगी।
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