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रिश्वत न मिलने पर तबादले का आरोप गंभीर, आईपीएस अधिकारी करें स्वतंत्र जांच: हाईकोर्ट
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-महिला के तबादले के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, 6 नवंबर तक जांच रिपोर्ट तलब
-हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आलोक मित्तल करेंगे जांच
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार के लेबर कमिश्नर कार्यालय की कर्मचारी की याचिका पर अब आरोपों की जांच हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो के अतिरिक्त महानिदेशक आलोक मित्तल को सौंप दी है। महिला कर्मचारी ने दावा किया है कि एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग पूरी न करने के कारण उसका सजा के तौर पर रोहतक से चंडीगढ़ ट्रांसफर कर दिया गया। कोर्ट ने फिलहाल तबादला आदेश पर भी रोक लगा दी है और मामले को गंभीर माना है।
याचिकाकर्ता भारती ने याचिका में हाईकोर्ट को बताया कि विभाग में तबादले की एक तय प्रक्रिया है। याची का स्कोर अधिक होने के बावजूद उसका तबादला कर दिया गया जबकि जिस अधिकारी (जगमोहन) को उसकी जगह रोहतक में नियुक्त किया गया, वह पहले से वहीं कार्यरत था और उसका वेतन चंडीगढ़ मुख्यालय से जारी होता रहा।
उसने यह भी आरोप लगाया कि लेबर कमिश्नर कार्यालय और एस्टेब्लिशमेंट ब्रांच के कुछ अधिकारियों ने याची से पोस्टिंग के लिए एक लाख रुपये की अवैध मांग की थी। मांग पूरी नहीं होने पर याची के साथ ऐसा किया जा रहा है। कोर्ट ने यह माना कि प्रथम दृष्टया मामला भ्रष्टाचार और महिला कर्मचारी के अधिकारों के हनन से जुड़ा हुआ है।
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इस पर अदालत ने आईपीएस अधिकारी व हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आलोक मित्तल को आदेश दिया कि वे याचिकाकर्ता के लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष प्राथमिक जांच कर 6 नवंबर 2025 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को रोहतक या उसी जिले के किसी अन्य स्थान पर पुन: कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दे दी है।
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-हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आलोक मित्तल करेंगे जांच
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार पर कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा सरकार के लेबर कमिश्नर कार्यालय की कर्मचारी की याचिका पर अब आरोपों की जांच हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो के अतिरिक्त महानिदेशक आलोक मित्तल को सौंप दी है। महिला कर्मचारी ने दावा किया है कि एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग पूरी न करने के कारण उसका सजा के तौर पर रोहतक से चंडीगढ़ ट्रांसफर कर दिया गया। कोर्ट ने फिलहाल तबादला आदेश पर भी रोक लगा दी है और मामले को गंभीर माना है।
याचिकाकर्ता भारती ने याचिका में हाईकोर्ट को बताया कि विभाग में तबादले की एक तय प्रक्रिया है। याची का स्कोर अधिक होने के बावजूद उसका तबादला कर दिया गया जबकि जिस अधिकारी (जगमोहन) को उसकी जगह रोहतक में नियुक्त किया गया, वह पहले से वहीं कार्यरत था और उसका वेतन चंडीगढ़ मुख्यालय से जारी होता रहा।
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उसने यह भी आरोप लगाया कि लेबर कमिश्नर कार्यालय और एस्टेब्लिशमेंट ब्रांच के कुछ अधिकारियों ने याची से पोस्टिंग के लिए एक लाख रुपये की अवैध मांग की थी। मांग पूरी नहीं होने पर याची के साथ ऐसा किया जा रहा है। कोर्ट ने यह माना कि प्रथम दृष्टया मामला भ्रष्टाचार और महिला कर्मचारी के अधिकारों के हनन से जुड़ा हुआ है।
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इस पर अदालत ने आईपीएस अधिकारी व हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आलोक मित्तल को आदेश दिया कि वे याचिकाकर्ता के लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष प्राथमिक जांच कर 6 नवंबर 2025 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को रोहतक या उसी जिले के किसी अन्य स्थान पर पुन: कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दे दी है।