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Chandigarh-Haryana News: पथवारी मंदिर को ढहाने की प्रक्रिया में दखल से हाईकोर्ट का इन्कार
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-वल्लभगढ़ के इस मंदिर को हटाकर कम्यूनिटी सेंटर बनाने का एमसी ने लिया है निर्णय
-मंदिर प्रबंधन का दावा शामलात भूमि, राजस्व रिकॉर्ड में नगर निगम के नाम दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। फरीदाबाद के वल्लभगढ़ में मौजूद प्राचीन पथवारी माता मंदिर को ढहाने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में दखल से इन्कार कर दिया है। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को खारिज करते हुए याची को छूट दी है कि वह सिविल कोर्ट जा सकता है।
याचिका दाखिल करते हुए फरीदाबाद निवासी सागर त्यागी ने हाईकोर्ट को बताया कि पथवारी माता का प्राचीन मंदिर फरीदाबाद में है। इस मंदिर से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। यह मंदिर शामलात भूमि पर मौजूद है। इस मंदिर के साथ एक अखाड़ा व एक गौशाला भी थी। अब नगर निगम इस मंदिर को गिराना चाहता है और यहां पर एक कम्यूनिटी सेंटर स्थापित करना चाहता है। इसके लिए मंदिर को नोटिस भी भेजा गया है। इस प्रक्रिया में अखाड़ा व गौशाला को तोड़ा जा चुका है। अब नगर निगम कभी भी मंदिर को ध्वस्त कर सकता है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और अखाड़े व गौशाला का दोबारा निर्माण करने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने याची से पूछा कि राजस्व रिकॉर्ड में भूमि किसके नाम पर है। याची ने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन एमसी के नाम है लेकिन इसको लेकर विवाद है जो सिविल कोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने पूछा कि याची कौन है इस पर याची ने बताया कि वह श्रद्धालु है और उसकी मंदिर में बहुत आस्था है। याची इस मामले में तीसरा पक्ष है इसलिए सिविल कोर्ट नहीं जा सकता। सरकार ने कहा कि यह मंदिर प्रबंधन द्वारा प्रायोजित की गई याचिका है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज करते हुए याची को छूट दी कि वह चाहे तो सिविल कोर्ट में लंबित मामले में पक्ष बन सकता है।
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-मंदिर प्रबंधन का दावा शामलात भूमि, राजस्व रिकॉर्ड में नगर निगम के नाम दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। फरीदाबाद के वल्लभगढ़ में मौजूद प्राचीन पथवारी माता मंदिर को ढहाने की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में दखल से इन्कार कर दिया है। हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को खारिज करते हुए याची को छूट दी है कि वह सिविल कोर्ट जा सकता है।
याचिका दाखिल करते हुए फरीदाबाद निवासी सागर त्यागी ने हाईकोर्ट को बताया कि पथवारी माता का प्राचीन मंदिर फरीदाबाद में है। इस मंदिर से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। यह मंदिर शामलात भूमि पर मौजूद है। इस मंदिर के साथ एक अखाड़ा व एक गौशाला भी थी। अब नगर निगम इस मंदिर को गिराना चाहता है और यहां पर एक कम्यूनिटी सेंटर स्थापित करना चाहता है। इसके लिए मंदिर को नोटिस भी भेजा गया है। इस प्रक्रिया में अखाड़ा व गौशाला को तोड़ा जा चुका है। अब नगर निगम कभी भी मंदिर को ध्वस्त कर सकता है। याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि इस प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए और अखाड़े व गौशाला का दोबारा निर्माण करने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने याची से पूछा कि राजस्व रिकॉर्ड में भूमि किसके नाम पर है। याची ने बताया कि राजस्व रिकॉर्ड में यह जमीन एमसी के नाम है लेकिन इसको लेकर विवाद है जो सिविल कोर्ट में विचाराधीन है। हाईकोर्ट ने पूछा कि याची कौन है इस पर याची ने बताया कि वह श्रद्धालु है और उसकी मंदिर में बहुत आस्था है। याची इस मामले में तीसरा पक्ष है इसलिए सिविल कोर्ट नहीं जा सकता। सरकार ने कहा कि यह मंदिर प्रबंधन द्वारा प्रायोजित की गई याचिका है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद याचिका को खारिज करते हुए याची को छूट दी कि वह चाहे तो सिविल कोर्ट में लंबित मामले में पक्ष बन सकता है।
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