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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   High Court refuses to allow M3M Group director to withdraw petition, Court News

Chandigarh-Haryana News: एम3एम ग्रुप के निदेशक को याचिका वापस लेने की अनुमति से हाईकोर्ट का इन्कार

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-जज को रिश्वत देने की साजिश रचने के आरोप में दर्ज की गई थी एफआईआर
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एम3एम कंपनी के निदेशक रूप बंसल द्वारा एफआईआर रद्द करने की मांग वाली याचिका काे वापस लेने की अनुमति देने से इंकार कर दिया। बंसल पर ट्रायल कोर्ट के जज को रिश्वत देने की साजिश रचने का आरोप था।
चीफ जस्टिस शील नागू की एकल पीठ ने कहा कि जिस तरीके से यह मामला चलाया गया है, उसे देखते हुए अदालत को इसे गुण-दोष के आधार पर सुनना जरूरी है। हमारी इस मामले में की गई किसी टिप्पणी का ट्रायल की कार्यवाही पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। बंसल की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने वीसी से पैरवी की। सिंघवी ने दलील दी कि जब किसी अभियुक्त को धारा 482 के तहत याचिका दायर करने का अधिकार है, तो उसे उसे वापस लेने का भी अधिकार होना चाहिए लेकिन अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
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मामला हरियाणा के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दर्ज किया गया था।
न्यायिक अधिकारी सुधीर परमार पर आरोप है कि उन्होंने मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित एक मामले में एम3एम और आईआरईओ समूह के मालिकों को अनुचित लाभ पहुंचाया है। प्रवर्तन निदेशालय की ओर से भी इस मामले में एक अलग शिकायत दर्ज की गई है, जिसमें आरोप है कि परमार को इन समूह के प्रमोटरों से पांच से सात करोड़ की रिश्वत मिली। मामले में सह-आरोपी और एम3 एम ग्रुप के निदेशक रूप बंसल ने अक्टूबर 2023 में एफआईआर रद्द करने की याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की थी, जिसे उन्होंने जनवरी 2025 में वापस ले लिया था। इसके बाद उन्होंने नई याचिका दाखिल की, जिसकी सुनवाई चीफ जस्टिस स्वयं कर रहे हैं। इस याचिका की सुनवाई की प्रक्रिया भी विवादों से घिरी रही, क्योंकि जनवरी 2025 से अब तक चार अलग-अलग जज इस मामले को सुन चुके हैं। एक एकल पीठ द्वारा फैसला सुरक्षित रखने के बाद चीफ जस्टिस ने इसे सुनवाई के लिए अपने पास रख लिया। इससे फोरम शॉपिंग (पसंद के जज को तलाशना) की आशंका उत्पन्न हुई। मामला पहले जस्टिस मंजरी नेहरू कौल की एकल पीठ के समक्ष पेश हुआ था लेकिन उस याचिका को वापस लेकर एक नई याचिका दायर की गई थी। यह नई याचिका एक अन्य एकल पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए लगी थी लेकिन जिस दिन उस पर फैसला सुनाया जाना था, उसी दिन एक शिकायत मिलने के बाद चीफ जस्टिस ने मामले को स्वयं अपने पास लेकर उस पीठ से वापस ले लिया। उस समय कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि यह निर्णय संस्था के हित और जज की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए लिया गया है।
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