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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   High Court asks government to disclose current status of cases filed during Jat reservation agitation

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए केसों की वर्तमान स्थिति बताए सरकार : हाईकोर्ट

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-पूछा-कितने मामलों में ट्रायल चल रहा, 10 नवंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा
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अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान मुरथल में हुए सामूहिक दुष्कर्म व उसके बाद प्रदेशभर में हुई हिंसा की घटनाओं को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार ने जवाब मांगा है। इस जवाब में कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि इस मामले में अब तक कितने केस दर्ज किए गए हैं। उन केसों की वर्तमान स्थिति क्या है, कितने मामलों में सजा हो चुकी है और कितनों का ट्रायल चल रहा है। कोर्ट ने यह जवाब 10 नवंबर तक दाखिल करने का आदेश दिया है।
साथ ही यह भी कहा है कि यह मामला नौ साल से विचाराधीन है और अगली सुनवाई पर हरियाणा सरकार का पक्ष सुनने के बाद यह निर्धारित किया जाएगा कि इस जनहित याचिका पर आगे सुनवाई की आवश्यकता है या नहीं। हरियाणा सरकार को सभी मामलों की ट्रायल की स्थिति पर पक्ष रखना होगा। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी से केसों की स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी। उसे हाईकोर्ट में अब पेश कर दिया गया है।
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एक एसआईटी कैसे करेगी 2000 मामलों की जांच
इन मामलों पर चल रही सुनवाई के दौरान कोर्ट मित्र अनुपम गुप्ता ने हाईकोर्ट को बताया था कि हिंसा के 2105 केस दर्ज हैं जिनमें से सरकार लगभग 407 केस वापस लेना चाहती है। सभी पक्षों को सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने सवाल उठाया था कि एक एसआईटी 2000 के करीब मामलों की कैसे जांच कर सकती है। इसके बाद कोर्ट मित्र ने कोर्ट को बताया था कि कुछ समय से हरियाणा सरकार जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान जाट नेताओं पर दर्ज मामले वापस लेने पर विचार कर रही थी और संभावना थी कि इस मामले की सुनवाई के दौरान सरकार अर्जी दायर कर कोर्ट से इसके लिए इजाजत लेगी। इसी कारण यह देरी हुई है।
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शीर्ष कोर्ट ने कहा था-2018 तक ट्रायल पूरा करें, आज तक नहीं हुआ
आंदोलन के दौरान वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर पर तोड़फोड़ व वाहनों को जलाने के आरोपी दिलावर सिंह ने जमानत याचिका दायर की थी। उसकी सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी आदेश दे चुका है। शीर्ष कोर्ट ने आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में दिसंबर 2018 तक केसों का ट्रायल पूरा करने के आदेश दिए थे लेकिन उसके बावजूद ट्रायल पूरा नहीं हो पाया। इस पर कोर्ट ने सीबीआई को ट्रायल कोर्ट में चल रहे मामलों के स्टेटस की जानकारी हाईकोर्ट को दिए जाने के आदेश दिए थे। साथ ही पूछा था कि वह बताएं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद ट्रायल पूरा किए जाने में देरी क्यों हो रही है। क्या इस देरी के लिए सुप्रीम कोर्ट में कोई अर्जी दायर कर और समय की मांग की है या नहीं। फरवरी 2019 के बाद इस मामले में हाईकोर्ट में कोई ठोस सुनवाई नहीं हो पाई।
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