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Chandigarh-Haryana News: सैनिकों-पूर्व सैनिकों के लिए जारी नहीं हो सका हेल्पलाइन नंबर
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- मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने छह माह पूर्व बजट में की थी घोषणा
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। प्रदेश में सैनिक व अर्ध सैनिक बलों के साथ ही पूर्व सैनिकों की सुविधा के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी करने की घोषणा बजट में की थी। छह महीने बीत जाने के बाद भी अभी इस घोषणा पर काम नहीं हो सका है।
प्रदेश सरकार ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों व अर्ध सैनिक बलों में तैनात जवानों की समस्याओं के समाधान के लिए हरियाणा सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण विभाग स्थापित किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सैनिकों की समस्याओं की सीधे सुनवाई के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करने की घोषणा की थी। हेल्पलाइन नंबर जारी होने के बाद सैनिकों की शिकायतों के समाधान और उनकी निगरानी के लिए त्वरित कार्य शुरू होने की उम्मीद जगी थी लेकिन अभी तक इसके शुरू न होने से सैनिकों व पूर्व सैनिकों में नाराजगी है। हरियाणा सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण विभाग के महानिदेशक संजय जून का कहना है कि इसमें हारट्रोन के साथ मिलकर कार्य होना है। जो भी हेल्प लाइन नंबर शुरू करना है उसके संचालन से लेकर बजट आदि के लिए सरकार से मंजूरी की प्रक्रिया जारी है। उम्मीद है कि जल्द सकारात्मक परिणाम आएंगे।
सीएम विंडो, जन संवाद पोर्टल व डाक से पहुंच रहीं शिकायतें
हरियाणा सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण विभाग के मुख्यालय में फिलहाल औसतन प्रतिमाह करीब 100 शिकायतें आती हैं जिनमें सेवानिवृत सैनिकों की सर्वाधिक शिकायतें होती हैं। इनमें आपसी विवाद, राजस्व से जुड़े मामलों से लेकर उपचार से जुड़ी शिकायतें हैं। सीएम विंडो, जन संवाद पोर्टल के अलावा डाक के माध्यम से भी शिकायतें आ रही हैं। सैनिक कल्याण विभाग के दायरे में आने वाली शिकायतों का विभाग समाधान कराता है। दूसरे विभागों से जुड़ी शिकायतें मिलने पर संबंधित जिलों के अधिकारियों को शिकायतें समाधान के लिए भेज दी जाती हैं।
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भाजपा पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) आरएस सुहाग का कहना है कि सेना में कार्यरत प्रदेश के करीब एक लाख से अधिक सैनिक व अधिकारी विभिन्न पदों पर हैं। इसी तरह से सेवानिवृत सैनिकों की संख्या करीब 3 लाख है। सैनिकों के कल्याण से जुड़ी शिकायतों को सैनिक कल्याण बोर्ड गंभीरता से सुनता है और सेना का भी हेल्पलाइन नंबर है।
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शिकायतों के समाधान के लिए जवाबदेही तय होगी : मलिक
हरियाणा एक्स सर्विसमैन लीग के प्रदेश प्रवक्ता सेवानिवृत्त कैप्टन जगबीर मलिक का कहना है कि सैनिकों व पूर्व सैनिकों की व्यक्तिगत और सामूहिक कई समस्याएं हैं। ऐसे में हेल्पलाइन नंबर की बहुत आवश्यकता है। हेल्पलाइन नंबर का एक फायदा होगा कि शिकायतों के समाधान के लिए विभाग की जवाबदेही तय होगी। वायु सेना से सेवानिवृत सारजेंट नरेश खोखर का कहना है कि सैनिकों और पूर्व सैनिकों को सबसे बड़ी परेशानी तो इस बात से होती है कि एक ही स्थान पर कैंटीन और ईसीएचएस (एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ सर्विस) की सुविधा नहीं है। सेना में कार्यरत सैनिकों के स्वजनों या बुजुर्ग सैनिकों को बड़ी परेशानी होती है। यदि हेल्प लाइन नंबर होगा तो ऐसी शिकायतें आसानी से दर्ज कराई जा सकेंगी।
सेवानिवृत कर्नल डीके भारद्वाज का कहना है कि हेल्पलाइन नंबर जारी करने से कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि शिकायतों पर अमल कराने का जिम्मा जिन अधिकारियों व कर्मचारियों पर है वह अभी भी सुनवाई नहीं करते। टोल पर पूर्व सैन्य अधिकारियों के साथ व्यवहार ठीक नहीं होता। पुलिस से लेकर प्रशासनिक अधिकारी भी सुनवाई नहीं करते हैं।
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अरुण शर्मा
चंडीगढ़। प्रदेश में सैनिक व अर्ध सैनिक बलों के साथ ही पूर्व सैनिकों की सुविधा के लिए सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी करने की घोषणा बजट में की थी। छह महीने बीत जाने के बाद भी अभी इस घोषणा पर काम नहीं हो सका है।
प्रदेश सरकार ने सैनिकों, पूर्व सैनिकों व अर्ध सैनिक बलों में तैनात जवानों की समस्याओं के समाधान के लिए हरियाणा सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण विभाग स्थापित किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सैनिकों की समस्याओं की सीधे सुनवाई के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी करने की घोषणा की थी। हेल्पलाइन नंबर जारी होने के बाद सैनिकों की शिकायतों के समाधान और उनकी निगरानी के लिए त्वरित कार्य शुरू होने की उम्मीद जगी थी लेकिन अभी तक इसके शुरू न होने से सैनिकों व पूर्व सैनिकों में नाराजगी है। हरियाणा सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण विभाग के महानिदेशक संजय जून का कहना है कि इसमें हारट्रोन के साथ मिलकर कार्य होना है। जो भी हेल्प लाइन नंबर शुरू करना है उसके संचालन से लेकर बजट आदि के लिए सरकार से मंजूरी की प्रक्रिया जारी है। उम्मीद है कि जल्द सकारात्मक परिणाम आएंगे।
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सीएम विंडो, जन संवाद पोर्टल व डाक से पहुंच रहीं शिकायतें
हरियाणा सैनिक एवं अर्ध सैनिक कल्याण विभाग के मुख्यालय में फिलहाल औसतन प्रतिमाह करीब 100 शिकायतें आती हैं जिनमें सेवानिवृत सैनिकों की सर्वाधिक शिकायतें होती हैं। इनमें आपसी विवाद, राजस्व से जुड़े मामलों से लेकर उपचार से जुड़ी शिकायतें हैं। सीएम विंडो, जन संवाद पोर्टल के अलावा डाक के माध्यम से भी शिकायतें आ रही हैं। सैनिक कल्याण विभाग के दायरे में आने वाली शिकायतों का विभाग समाधान कराता है। दूसरे विभागों से जुड़ी शिकायतें मिलने पर संबंधित जिलों के अधिकारियों को शिकायतें समाधान के लिए भेज दी जाती हैं।
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भाजपा पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) आरएस सुहाग का कहना है कि सेना में कार्यरत प्रदेश के करीब एक लाख से अधिक सैनिक व अधिकारी विभिन्न पदों पर हैं। इसी तरह से सेवानिवृत सैनिकों की संख्या करीब 3 लाख है। सैनिकों के कल्याण से जुड़ी शिकायतों को सैनिक कल्याण बोर्ड गंभीरता से सुनता है और सेना का भी हेल्पलाइन नंबर है।
शिकायतों के समाधान के लिए जवाबदेही तय होगी : मलिक
हरियाणा एक्स सर्विसमैन लीग के प्रदेश प्रवक्ता सेवानिवृत्त कैप्टन जगबीर मलिक का कहना है कि सैनिकों व पूर्व सैनिकों की व्यक्तिगत और सामूहिक कई समस्याएं हैं। ऐसे में हेल्पलाइन नंबर की बहुत आवश्यकता है। हेल्पलाइन नंबर का एक फायदा होगा कि शिकायतों के समाधान के लिए विभाग की जवाबदेही तय होगी। वायु सेना से सेवानिवृत सारजेंट नरेश खोखर का कहना है कि सैनिकों और पूर्व सैनिकों को सबसे बड़ी परेशानी तो इस बात से होती है कि एक ही स्थान पर कैंटीन और ईसीएचएस (एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ सर्विस) की सुविधा नहीं है। सेना में कार्यरत सैनिकों के स्वजनों या बुजुर्ग सैनिकों को बड़ी परेशानी होती है। यदि हेल्प लाइन नंबर होगा तो ऐसी शिकायतें आसानी से दर्ज कराई जा सकेंगी।
सेवानिवृत कर्नल डीके भारद्वाज का कहना है कि हेल्पलाइन नंबर जारी करने से कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि शिकायतों पर अमल कराने का जिम्मा जिन अधिकारियों व कर्मचारियों पर है वह अभी भी सुनवाई नहीं करते। टोल पर पूर्व सैन्य अधिकारियों के साथ व्यवहार ठीक नहीं होता। पुलिस से लेकर प्रशासनिक अधिकारी भी सुनवाई नहीं करते हैं।