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Haryana Cabinet: तबादला नीति के बदलावों को मंजूरी, अब आयु का महत्व घटा; दंपति मामलों में मिलेंगे ज्यादा अंक
Mon, 22 Jun 2026 07:56 AM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 22 Jun 2026 07:56 AM IST
सार
बैठक में दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना (दयालू-1) में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी गई। नई व्यवस्था के तहत अब मृत्यु या स्थायी विकलांगता की स्थिति में दावा (क्लेम) दाखिल करने की समय सीमा 3 महीने से बढ़ाकर 6 महीने कर दी गई है।
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हरियाणा कैबिनेट की बैठक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा मंत्रिपरिषद की बैठक में 15 में से 14 प्रस्तावों पर मुहर लगा दी है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव मॉडल ऑनलाइन स्थानांतरण नीति (एमओटीपी) 2026 और शिक्षक स्थानांतरण नीति (टीटीपी) 2026 को मंजूरी दी गई है। नई नीति हाईकोर्ट की टिप्पणियों और विभिन्न हितधारकों से मिले सुझावों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं।
अदालत ने पिछली स्थानांतरण व्यवस्था में आयु को अधिक महत्व दिए जाने और दंपति मामलों को कम अंक मिलने पर चिंता जताई थी। इसके बाद सरकार ने पूरी नीति की समीक्षा कर उसमें आवश्यक बदलाव किए हैं। हाईकोर्ट ने पिछली तबादला नीति में उम्र को ज्यादा महत्व दिए जाने और पति-पत्नी वाले मामलों को कम अंक मिलने पर चिंता जताई थी। इसके बाद सरकार ने कर्मचारियों और अन्य संबंधित पक्षों से मिले सुझावों को ध्यान में रखते हुए पूरी नीति की समीक्षा की और इन कमियों को दूर करने के लिए जरूरी बदलाव किए।
नई नीतियों की अधिसूचना जारी होते ही 2025 की मॉडल ऑनलाइन स्थानांतरण नीति और शिक्षक स्थानांतरण नीति के तहत चल रहे सभी स्थानांतरण अभियान स्वतः समाप्त माने जाएंगे। इसके तहत आठ हजार तबादले किए जा चुके थे। अब सभी पात्र कर्मचारियों को 2026 की नई और अधिक संतुलित व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
सरकार ने विलंब से दाखिल होने वाले दावों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई है। 6 से 7 महीने की देरी वाले मामलों को एचपीएसएन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, 7 से 9 महीने की देरी वाले मामलों को वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और 9 से 12 महीने तक की देरी वाले मामलों को वित्त मंत्री मंजूरी दे सकेंगे। योजना में एक व्यवस्थित शिकायत निवारण तंत्र भी स्थापित किया जाएगा। जिला स्तर पर उपायुक्त (डीसी) शिकायतों के समाधान की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि जिला सांख्यिकीय अधिकारी दयालू-1 योजना के नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।
योजना के तहत खरीदे गए नए वाहनों के पंजीकरण शुल्क में भी छूट दी जाएगी। सरकार ने पुराने ट्रकों और बसों से जुड़े ऐसे बकाया कर और देनदारियों में भी राहत देने का फैसला किया है, जो एक वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं।
सरकार का मानना है कि इस योजना से पुराने वाहनों की जगह आधुनिक और कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहन आएंगे। इससे एनसीआर के जिलों में वायु गुणवत्ता बेहतर होगी और परिवहन क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल बदलाव को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना से लगभग 93 हजार ट्रक और 16 हजार से अधिक बसें लाभान्वित हो सकती हैं।
यह नियम फल, सब्जी, फूल, मसाले, औषधीय और अन्य बागवानी पौधों पर लागू होंगे। अगर कोई नर्सरी खराब गुणवत्ता के पौधे बेचती है तो उसे किसानों को खेती की लागत का दोगुना मुआवजा देना होगा। इसके अलावा नर्सरियों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा और नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जा सकेगा। संक्रमित पौधों को नष्ट करना भी अनिवार्य होगा। शिकायतों के निपटारे के लिए समयबद्ध अपील व्यवस्था भी बनाई गई है।
इसका मुख्य उद्देश्य 1974 के पुराने जल प्रदूषण कानून में बदलाव कर छोटे अपराधों को आपराधिक श्रेणी से हटाना है। अब छोटे नियम उल्लंघनों पर जेल की सजा की बजाय सुधारात्मक और प्रशासनिक कार्रवाई पर जोर दिया जाएगा। यह नया कानून राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया को भी सरल बनाता है। अब हरियाणा सरकार इस संशोधन को राज्य विधानसभा से पास कर लागू करेगी।
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अदालत ने पिछली स्थानांतरण व्यवस्था में आयु को अधिक महत्व दिए जाने और दंपति मामलों को कम अंक मिलने पर चिंता जताई थी। इसके बाद सरकार ने पूरी नीति की समीक्षा कर उसमें आवश्यक बदलाव किए हैं। हाईकोर्ट ने पिछली तबादला नीति में उम्र को ज्यादा महत्व दिए जाने और पति-पत्नी वाले मामलों को कम अंक मिलने पर चिंता जताई थी। इसके बाद सरकार ने कर्मचारियों और अन्य संबंधित पक्षों से मिले सुझावों को ध्यान में रखते हुए पूरी नीति की समीक्षा की और इन कमियों को दूर करने के लिए जरूरी बदलाव किए।
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ये किए गए बदलाव
- नई व्यवस्था में कर्मचारियों की रैंकिंग 120 अंकों के संशोधित स्कोरिंग सिस्टम के आधार पर तय होगी।
- आयु का महत्व पहले कुल अंक निर्धारण में आयु का योगदान 75 प्रतिशत था, जिसे घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है।
- कर्मचारियों के अनुभव को भी वरियता मिलेगी। अब सेवा अनुभव को अब सेवा अनुभव को 25% वेटेज मिलेगा।
- विशेष परिस्थितियों और वास्तविक कठिनाइयों (जैसे बीमारी या पारिवारिक समस्या ) का सामना कर रहे कर्मचारियों के लिए मिलने वाले अंकों का हिस्सा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है।
- गंभीर बीमारियों की सूची का भी विस्तार किया गया है। अब मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, बेहचेट रोग और अग्न्याशय व बोन मैरो प्रत्यारोपण मामलों को भी इसमें शामिल किया गया है।
- सेवानिवृत्ति से एक वर्ष पहले किसी कर्मचारी या शिक्षक का तबादला उसकी लिखित सहमति के बिना नहीं किया जाएगा।
- पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने की स्थिति में मेरिट अंक भी बढ़ाए गए हैं। पहले इस श्रेणी में पांच अंक मिलते थे, जिन्हें अब बढ़ाकर दस कर दिया गया है।
- हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में कार्यरत किसी भी सरकार के नियमित कर्मचारियों को भी इस श्रेणी में शामिल किया गया है।
नई नीतियों की अधिसूचना जारी होते ही 2025 की मॉडल ऑनलाइन स्थानांतरण नीति और शिक्षक स्थानांतरण नीति के तहत चल रहे सभी स्थानांतरण अभियान स्वतः समाप्त माने जाएंगे। इसके तहत आठ हजार तबादले किए जा चुके थे। अब सभी पात्र कर्मचारियों को 2026 की नई और अधिक संतुलित व्यवस्था का लाभ मिलेगा।
दयालु योजना में दावा अब छह महीने तक कर सकेंगे
बैठक में दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना (दयालू-1) में महत्वपूर्ण संशोधनों को मंजूरी दी गई। नई व्यवस्था के तहत अब मृत्यु या स्थायी विकलांगता की स्थिति में दावा (क्लेम) दाखिल करने की समय सीमा 3 महीने से बढ़ाकर 6 महीने कर दी गई है। यह राहत भविष्य के सभी दावों पर लागू होगी। साथ ही, पहले से दाखिल किए गए दावों को भी राहत देते हुए 3 महीने की अतिरिक्त छूट दी गई है। यानी अब मृत्यु या विकलांगता की तारीख से 6 महीने के भीतर किए गए दावों पर विचार किया जा सकेगा।सरकार ने विलंब से दाखिल होने वाले दावों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई है। 6 से 7 महीने की देरी वाले मामलों को एचपीएसएन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, 7 से 9 महीने की देरी वाले मामलों को वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और 9 से 12 महीने तक की देरी वाले मामलों को वित्त मंत्री मंजूरी दे सकेंगे। योजना में एक व्यवस्थित शिकायत निवारण तंत्र भी स्थापित किया जाएगा। जिला स्तर पर उपायुक्त (डीसी) शिकायतों के समाधान की जिम्मेदारी संभालेंगे, जबकि जिला सांख्यिकीय अधिकारी दयालू-1 योजना के नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे।
एनसीआर में पुराने ट्रक-बस बदलने पर बड़ी राहत
मंत्रिमंडल ने एनसीआर क्षेत्र के जिलों में पुराने ट्रकों और बसों को बदलने के लिए विशेष रियायतों को मंजूरी दी है। इस फैसले का उद्देश्य प्रदूषण कम करना और स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा देना है। नई व्यवस्था के तहत बीएस-4 या उससे पुराने उत्सर्जन मानकों वाले ट्रकों और बसों को हटाकर नए बीएस-6, इलेक्ट्रिक (ईवी) या सीएनजी वाहन खरीदने पर मोटर वाहन कर में 100 प्रतिशत छूट मिलेगी। वहीं, यदि कोई पात्र लाभार्थी पुराना लेकिन बीएस-6, इलेक्ट्रिक या सीएनजी वाहन खरीदता है तो उसे मोटर वाहन कर में 50 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यह छूट 10 वर्ष तक लागू रहेगी।योजना के तहत खरीदे गए नए वाहनों के पंजीकरण शुल्क में भी छूट दी जाएगी। सरकार ने पुराने ट्रकों और बसों से जुड़े ऐसे बकाया कर और देनदारियों में भी राहत देने का फैसला किया है, जो एक वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं।
सरकार का मानना है कि इस योजना से पुराने वाहनों की जगह आधुनिक और कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहन आएंगे। इससे एनसीआर के जिलों में वायु गुणवत्ता बेहतर होगी और परिवहन क्षेत्र में पर्यावरण अनुकूल बदलाव को बढ़ावा मिलेगा। इस योजना से लगभग 93 हजार ट्रक और 16 हजार से अधिक बसें लाभान्वित हो सकती हैं।
नर्सरी खोलने के लिए लाइसेंस लेना होगा
बैठक में हरियाणा बागवानी नर्सरी नियम 2026 को मंजूरी दी है। नए नियमों के तहत नर्सरी खोलने के लिए लाइसेंस लेना, उसका नवीनीकरण करना और श्रेणी तय करने की स्पष्ट प्रक्रिया होगी। साथ ही नर्सरियों को न्यूनतम मानकों का पालन करना होगा और बेचे जाने वाले पौधों की पूरी जानकारी क्यूआर कोड के जरिए उपलब्ध करानी होगी।यह नियम फल, सब्जी, फूल, मसाले, औषधीय और अन्य बागवानी पौधों पर लागू होंगे। अगर कोई नर्सरी खराब गुणवत्ता के पौधे बेचती है तो उसे किसानों को खेती की लागत का दोगुना मुआवजा देना होगा। इसके अलावा नर्सरियों का नियमित निरीक्षण किया जाएगा और नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द या निलंबित किया जा सकेगा। संक्रमित पौधों को नष्ट करना भी अनिवार्य होगा। शिकायतों के निपटारे के लिए समयबद्ध अपील व्यवस्था भी बनाई गई है।
हरियाणा में दोहरे लाइसेंस खत्म
बैठक में नगर पालिका संशोधन अध्यादेश 2026 और हरियाणा नगर निगम संशोधन अध्यादेश 2026 को मंजूरी दी है। सरकार ने यह निर्णय भारत सरकार के डी-रेगुलेशन निर्देशों के अनुसार लिया है, जिसका उद्देश्य दोहरे लाइसेंस की व्यवस्था को समाप्त करना है। संशोधन के बाद अब मीट की दुकानों और बूचड़खानों के लिए अलग से नगर निकाय का लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि इन व्यवसायों को पहले से ही खाद्य एवं औषधि प्रशासन हरियाणा द्वारा नियंत्रित किया जाता है। इस बदलाव से व्यवसायियों को अनावश्यक लाइसेंस प्रक्रिया से राहत मिलेगी और नियमों का पालन भी आसान होगा।जजों की पदोन्नति और वेतन संरचना में बदलाव
बैठक में हरियाणा उच्चतर न्यायिक सेवा नियम, 2007 में संशोधन को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था में एक जनवरी 2020 से जिला न्यायाधीशों के कुल स्वीकृत पदों में से 35 प्रतिशत चयन ग्रेड और 15 प्रतिशत सुपर टाइम स्केल के लिए निर्धारित किए गए हैं। चयन ग्रेड उन अधिकारियों को मिलेगा जिन्होंने कम से कम 5 वर्ष सेवा दी हो, जबकि सुपर टाइम स्केल के लिए 3 वर्ष चयन ग्रेड में सेवा जरूरी होगी। वेतन वृद्धि अब 3 प्रतिशत वार्षिक दर से होगी। इन बदलावों से न्यायिक सेवा अधिक पारदर्शी और प्रगतिशील बनेगी।जल प्रदूषण नियंत्रण कानून में बदलाव को मंजूरी, छोटे अपराधों पर राहत मिलेगी
मंत्रिमंडल ने जल (प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 को राज्य में लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए संशोधित कानून को हरियाणा में लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।इसका मुख्य उद्देश्य 1974 के पुराने जल प्रदूषण कानून में बदलाव कर छोटे अपराधों को आपराधिक श्रेणी से हटाना है। अब छोटे नियम उल्लंघनों पर जेल की सजा की बजाय सुधारात्मक और प्रशासनिक कार्रवाई पर जोर दिया जाएगा। यह नया कानून राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष की नियुक्ति प्रक्रिया को भी सरल बनाता है। अब हरियाणा सरकार इस संशोधन को राज्य विधानसभा से पास कर लागू करेगी।
शामलात भूमि मामलों के निपटारे में तेजी, अब जिला उपायुक्त को मिला अधिकार
बैठक में ग्राम शामलात भूमि नियमों में संशोधन को मंजूरी दी है। अब इस भूमि से जुड़े मामलों की मंजूरी देने का अधिकार निदेशक विकास एवं पंचायत विभाग से हटाकर संबंधित जिला उपायुक्त को दे दिया गया है। इससे वर्षों से लंबित आवेदनों का निपटारा तेजी से हो सकेगा। यह फैसला उन लोगों को राहत देगा जिन्होंने 31 मार्च 2004 या उससे पहले शामलात भूमि पर अपने घर बनाए थे।महिला आयोग में गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या पांच से बढ़कर सात हुई
बैठक में हरियाणा राज्य महिला आयोग अधिनियम, 2012 में संशोधन को मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य महिला आयोग में गैर-सरकारी सदस्यों की संख्या 5 से बढ़ाकर 7 कर दी जाएगी। पिछले कुछ समय में महिलाओं से जुड़े मामलों जैसे घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न और साइबर अपराध की शिकायतें बढ़ी हैं। साथ ही आयोग के प्रति लोगों का भरोसा और पहुंच भी बढ़ी है, जिससे इसका कार्यभार काफी बढ़ गया है। पहले 5 गैर-सरकारी सदस्य होने से काम का दबाव अधिक हो रहा था और मामलों के निपटारे में समय लग रहा था। अब सदस्यों की संख्या बढ़ाने से आयोग की क्षमता मजबूत होगी और शिकायतों का निपटारा तेजी से हो सकेगा।इसे भी दी मंजूरी
मंत्रिमंडल ने यमुनानगर-जगाधरी की 1996 में नियमित कॉलोनियों से जुड़े निर्देशों को मंजूरी दी। जीआईएस-एनडीसी पोर्टल पर सीमांकन समस्याओं के समाधान हेतु समिति बनेगी। यह सीमाएं तय कर संपत्ति रिकॉर्ड एकीकृत करेगी और विकास शुल्क नियम भी लागू होंगे।
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