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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा के कारोबारियों का पाकिस्तान प्रेमी तुर्किये के कारोबार पर प्रहार
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- तुर्किये को चावल, चांदी, हैंडलूम के निर्यात पर रोक का फैसला
कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के मददगार तुर्किये के कारोबार पर हरियाणा के कारोबारियों ने कड़ा प्रहार करने फैसला लिया है। प्रदेश से तुर्किये जाने वाले चावल, दवाइयां और हैंडलूम के निर्यात के साथ-साथ वहां से आयात होने वाले चांदी के ऑ़र्टिकल्स को पूरी तरह से बंद करने की घोषणा की है।
हरियाणा राइस एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील जैन ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि सबसे पहले अपना देश है। किसी भी हालत में तुर्किये को अपने चावल खाने को नहीं देंगे। पिछले सीजन में देशभर से 55 हजार मीट्रिक टन चावल का निर्यात तुर्किये को हुआ था। इसमें तकरीबन 24 हजार मीट्रिक टन हरियाणा से चावल का निर्यात हुआ था। भारत ने तुर्किये के साथ चावल के कारोबार से 425 करोड़ रुपये की कमाई की थी।
हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पानीपत चैप्टर चेयरमैन विनोद धमीजा ने बताया कि तुर्किये में जिले से करीब 100 से 200 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। पानीपत के हैंडलूम कारोबार में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुर्किये दूसरी सबसे बड़ी मंडी है। पानीपत से तुर्किये में चादर, पर्दे, बाथमैट, घरेलू सजावट के सामान सहित अन्य उत्पाद का निर्यात होता है। वर्तमान में जिले में कारोबारियों के पास तकरीबन 100 करोड़ के हैंडलूम का ऑर्डर है। उन्होंने कहा कि सरकार अगर तुर्किये के साथ कारोबार बंद करती है तो हम सरकार के साथ हैं।
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स्वर्ण संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष जोगिन्द्र वर्मा ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान बताया कि तुर्किये से अभी तक प्रति वर्ष तकरीबन 50 करोड़ रुपये का कारोबार था। तुर्किये से चांदी के आर्टिकल्स काफी मात्रा में आयात होते थे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किये का पाकिस्तानी प्रेम सामने आने के बाद प्रदेशभर के स्वर्णकारों ने सर्वसम्मति से तुर्किये से आने वाले चांदी के आर्टिकल्स का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया है।
कोट्स...
कारोबारियों का फैसला सराहना योग्य
तुर्किये दूसरा पाकिस्तान है। उसके साथ व्यापार ही नहीं बल्कि सभी तरह के रिश्तों को खत्म करना चाहिए। तुर्किये से कारोबार के साथ टूरिज्म पर भी पाबंदी होनी चाहिए। विभिन्न कारोबारियों का फैसला सराहना योग्य है। कारोबारी दूसरे देशों में आयात-निर्यात बढ़ाकर मुनाफा कमा लेंगे।
राज चावला, सचिव, हरियाणा चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री।
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कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के मददगार तुर्किये के कारोबार पर हरियाणा के कारोबारियों ने कड़ा प्रहार करने फैसला लिया है। प्रदेश से तुर्किये जाने वाले चावल, दवाइयां और हैंडलूम के निर्यात के साथ-साथ वहां से आयात होने वाले चांदी के ऑ़र्टिकल्स को पूरी तरह से बंद करने की घोषणा की है।
हरियाणा राइस एक्सपोर्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील जैन ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि सबसे पहले अपना देश है। किसी भी हालत में तुर्किये को अपने चावल खाने को नहीं देंगे। पिछले सीजन में देशभर से 55 हजार मीट्रिक टन चावल का निर्यात तुर्किये को हुआ था। इसमें तकरीबन 24 हजार मीट्रिक टन हरियाणा से चावल का निर्यात हुआ था। भारत ने तुर्किये के साथ चावल के कारोबार से 425 करोड़ रुपये की कमाई की थी।
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हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के पानीपत चैप्टर चेयरमैन विनोद धमीजा ने बताया कि तुर्किये में जिले से करीब 100 से 200 करोड़ रुपये का कारोबार होता है। पानीपत के हैंडलूम कारोबार में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तुर्किये दूसरी सबसे बड़ी मंडी है। पानीपत से तुर्किये में चादर, पर्दे, बाथमैट, घरेलू सजावट के सामान सहित अन्य उत्पाद का निर्यात होता है। वर्तमान में जिले में कारोबारियों के पास तकरीबन 100 करोड़ के हैंडलूम का ऑर्डर है। उन्होंने कहा कि सरकार अगर तुर्किये के साथ कारोबार बंद करती है तो हम सरकार के साथ हैं।
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स्वर्ण संघ हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष जोगिन्द्र वर्मा ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान बताया कि तुर्किये से अभी तक प्रति वर्ष तकरीबन 50 करोड़ रुपये का कारोबार था। तुर्किये से चांदी के आर्टिकल्स काफी मात्रा में आयात होते थे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्किये का पाकिस्तानी प्रेम सामने आने के बाद प्रदेशभर के स्वर्णकारों ने सर्वसम्मति से तुर्किये से आने वाले चांदी के आर्टिकल्स का पूरी तरह से बहिष्कार कर दिया है।
कोट्स...
कारोबारियों का फैसला सराहना योग्य
तुर्किये दूसरा पाकिस्तान है। उसके साथ व्यापार ही नहीं बल्कि सभी तरह के रिश्तों को खत्म करना चाहिए। तुर्किये से कारोबार के साथ टूरिज्म पर भी पाबंदी होनी चाहिए। विभिन्न कारोबारियों का फैसला सराहना योग्य है। कारोबारी दूसरे देशों में आयात-निर्यात बढ़ाकर मुनाफा कमा लेंगे।
राज चावला, सचिव, हरियाणा चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री।