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Chandigarh-Haryana News: हरियाणा में फल-सब्जियों की कीटनाशक जांच सुविधा मुफ्त मिलेगी
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उद्यान विभाग की सिरसा व करनाल जिले के घरौंडा की प्रयोगशालाओं में होगी जांच
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में फल और सब्जियों में कीटनाशक अवशेषों के विश्लेषण की सुविधा अब बिल्कुल मुफ्त मिलेगी। यह सुविधा उद्यान विभाग की सिरसा तथा घरौंडा (करनाल) स्थित गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाओं में उपलब्ध है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने यहां जारी बयान में बताया कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने व उपज की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस निशुल्क जांच सुविधा की घोषणा की थी। ये प्रयोगशालाएं मान्यता प्राप्त हैं। इनमें किसान अपनी बागवानी उपज, मिट्टी और पानी के नमूनों की निशुल्क जांच करवा सकते हैं। इनमें दस प्रमुख कीटनाशकों का सटीक विश्लेषण किया जाता है। इनमें मेट्रिब्यूज़िन, मेटालैक्सिल, क्लोरपाइरीफॉस, डाइकोफॉल, पेंडिमेथालिन, पेनकोनाज़ोल, प्रोफेनोफॉस, लैम्डा-साइहलोथ्रिन, परमेथ्रिन और डेल्टामेथ्रिन शामिल हैं। उन्होंने किसानों से इस सुविधा का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। जांच के लिए मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण का विवरण देना होगा। पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर पहचान पत्र), मोबाइल नंबर और ईमेल पता प्रयोगशाला में जमा कराना होगा। नमूने (सैंपल) लेने और दस्तावेज की प्रक्रिया के लिए किसान अपने संबंधित जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। इस योजना का उद्देश्य कीटनाशकों के सही उपयोग को समझकर उपज की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा में सुधार लाना है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में फल और सब्जियों में कीटनाशक अवशेषों के विश्लेषण की सुविधा अब बिल्कुल मुफ्त मिलेगी। यह सुविधा उद्यान विभाग की सिरसा तथा घरौंडा (करनाल) स्थित गुणवत्ता जांच प्रयोगशालाओं में उपलब्ध है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने यहां जारी बयान में बताया कि प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने व उपज की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस निशुल्क जांच सुविधा की घोषणा की थी। ये प्रयोगशालाएं मान्यता प्राप्त हैं। इनमें किसान अपनी बागवानी उपज, मिट्टी और पानी के नमूनों की निशुल्क जांच करवा सकते हैं। इनमें दस प्रमुख कीटनाशकों का सटीक विश्लेषण किया जाता है। इनमें मेट्रिब्यूज़िन, मेटालैक्सिल, क्लोरपाइरीफॉस, डाइकोफॉल, पेंडिमेथालिन, पेनकोनाज़ोल, प्रोफेनोफॉस, लैम्डा-साइहलोथ्रिन, परमेथ्रिन और डेल्टामेथ्रिन शामिल हैं। उन्होंने किसानों से इस सुविधा का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की। जांच के लिए मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर पंजीकरण का विवरण देना होगा। पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर पहचान पत्र), मोबाइल नंबर और ईमेल पता प्रयोगशाला में जमा कराना होगा। नमूने (सैंपल) लेने और दस्तावेज की प्रक्रिया के लिए किसान अपने संबंधित जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। इस योजना का उद्देश्य कीटनाशकों के सही उपयोग को समझकर उपज की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा में सुधार लाना है।
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