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Chandigarh-Haryana News: फसल बीमा योजना के लिए किसान बैंकों में दे सकेंगे बुवाई का प्रमाण-पत्र
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फसल बीमा योजना :
- 23 जुलाई तक किसानों को बैंकों में देनी होगी फसल बुवाई की जानकारी
- 29 जुलाई तक खेत में फसल बदलने का दे सकेंगे ब्योरा, तैयारियां शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। खरीफ-2025 के लिए तीन क्लस्टर में विभाजित जिलों में तीन एजेंसी बीमा करेंगी। बीमा कराना है या नहीं इसे लेकर बैंकों में 23 जुलाई तक लिखित में बताना होगा। इसके लिए बैंकों में पहुंचकर सहमति या असहमति पत्र देना होगा। सहमति पत्र देने की स्थिति में ही बैंक बीमा योजना के लिए किस्त काटेंगे। वहीं, 29 जुलाई तक फसल बदलने का बैंकों में ब्योरा दे सकते हैं।
बीमा योजना की बात करें तो 2025-2026 तक क्लस्टर-1 में शामिल जिलों में एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी काम करेगी। इस क्लस्टर में सिरसा, रोहतक, फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, कैथल, पंचकूला व रेवाड़ी जिले शामिल हैं। क्लस्टर-2 में एचडीएफसी ईरिगो कार्य करेगी और इसमें हिसार, सोनीपत, गुरुग्राम, करनाल, जींद, महेंद्रगढ़ और अंबाला जिले शामिल हैं। क्लस्टर-3 की बात करें तो यहां रिलायंस इंश्योरेंस कंपनी काम करेगी जबकि इस क्लस्टर में यमुनानगर, पानीपत, पलवल, भिवानी, फतेहाबाद, झज्जर, मेवात और चरखी-दादरी जिले शामिल हैं। बीमा योजना में ओलावृष्टि, बेमाैसमी बरसात, जलभराव आदि से होने वाले नुकसान की कंपनियां भरपाई करती हैं।
खरीफ और रबी में पांच-पांच फसलें शामिल
खरीफ और रबी में पांच-पांच फसलें शामिल हैं। खरीफ की बात करें तो कपास, धान, बाजारा, मक्का, मूंग शामिल हैं। इसी तरह से रबी में गेहूं, जाै, सरसों, चना, सूरजमुखी हैं। खरीफ की फसल के लिए किसानों का प्रीमियम दो प्रतिशत, रबी की फसलों में बीमा कराने के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है। वहीं, कपास की फसल को व्यवसायिक माना जाता है, ऐसे में किसानों को बीमा योजना में प्रीमियम के ताैर पर 5 प्रतिशत हिस्सा देना होता है। वहीं, शेष प्रीमियम 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी केंद्र और राज्य सरकार की होती है।
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पट्टेदार भी करा सकेंगे बीमा
यदि पट्टेदार चाहें तो वह भी बीमा योजना का लाभ उठा सकते हैं। बीमा योजना में यदि किसी किसान का पट्टे पर खेत लिया है तो ऐसे व्यक्ति खेत में बुवाई का सर्टिफिकेट दे सकते हैं। एनसीआईपी (नेशनल क्राॅप इंश्योरेंस पोर्टल) पर नियमानुसार आवेदन सकते हैं। नुकसान की स्थिति में उन्हें भुगतान मिलेगा।
केसीसी से जिन्होंने कभी लोन नहीं लिया, वह सीएससी से करा सकेंगे आवेदन
बीमा योजना में दो तरह के किसान शामिल हैं। पहले किसान वह हैं जोकि नियमित केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के माध्यम से ऋण प्राप्त करते हैं। दूसरे किसान वह हैं, जिन्होंने केसीसी के माध्यम से ऋण नहीं लिया है। वह किसान सीएससी(काॅमन सर्विस सेंटर) या पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। किसानों को दस्तावेज(जमाबंदी-किला नंबर) आदि का ब्योरा भी देना होगा।
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खरीफ 2016-2017 से रबी 2024-2025 तक योजना से जुड़े किसान : 11729456
योजना में शामिल क्षेत्रफल : 379.82 लाख एकड़
किसानों की हिस्सेदारी : 2392.28 करोड़ रुपये
राज्य सरकार की हिस्सेदारी : 3233.42 करोड़ रुपये
केंद्र सरकार की हिस्सेदारी : 2953.71 करोड़ रुपये
कुल प्रीमियम : 8579.42 करोड़ रुपये
क्लेम : 9022.83 करोड़ रुपये
नोट : सभी आंकड़े खरीफ 2016-2017 से रबी 2024-2025 तक।
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- 23 जुलाई तक किसानों को बैंकों में देनी होगी फसल बुवाई की जानकारी
- 29 जुलाई तक खेत में फसल बदलने का दे सकेंगे ब्योरा, तैयारियां शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। खरीफ-2025 के लिए तीन क्लस्टर में विभाजित जिलों में तीन एजेंसी बीमा करेंगी। बीमा कराना है या नहीं इसे लेकर बैंकों में 23 जुलाई तक लिखित में बताना होगा। इसके लिए बैंकों में पहुंचकर सहमति या असहमति पत्र देना होगा। सहमति पत्र देने की स्थिति में ही बैंक बीमा योजना के लिए किस्त काटेंगे। वहीं, 29 जुलाई तक फसल बदलने का बैंकों में ब्योरा दे सकते हैं।
बीमा योजना की बात करें तो 2025-2026 तक क्लस्टर-1 में शामिल जिलों में एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी काम करेगी। इस क्लस्टर में सिरसा, रोहतक, फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, कैथल, पंचकूला व रेवाड़ी जिले शामिल हैं। क्लस्टर-2 में एचडीएफसी ईरिगो कार्य करेगी और इसमें हिसार, सोनीपत, गुरुग्राम, करनाल, जींद, महेंद्रगढ़ और अंबाला जिले शामिल हैं। क्लस्टर-3 की बात करें तो यहां रिलायंस इंश्योरेंस कंपनी काम करेगी जबकि इस क्लस्टर में यमुनानगर, पानीपत, पलवल, भिवानी, फतेहाबाद, झज्जर, मेवात और चरखी-दादरी जिले शामिल हैं। बीमा योजना में ओलावृष्टि, बेमाैसमी बरसात, जलभराव आदि से होने वाले नुकसान की कंपनियां भरपाई करती हैं।
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खरीफ और रबी में पांच-पांच फसलें शामिल
खरीफ और रबी में पांच-पांच फसलें शामिल हैं। खरीफ की बात करें तो कपास, धान, बाजारा, मक्का, मूंग शामिल हैं। इसी तरह से रबी में गेहूं, जाै, सरसों, चना, सूरजमुखी हैं। खरीफ की फसल के लिए किसानों का प्रीमियम दो प्रतिशत, रबी की फसलों में बीमा कराने के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम देना होता है। वहीं, कपास की फसल को व्यवसायिक माना जाता है, ऐसे में किसानों को बीमा योजना में प्रीमियम के ताैर पर 5 प्रतिशत हिस्सा देना होता है। वहीं, शेष प्रीमियम 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी केंद्र और राज्य सरकार की होती है।
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पट्टेदार भी करा सकेंगे बीमा
यदि पट्टेदार चाहें तो वह भी बीमा योजना का लाभ उठा सकते हैं। बीमा योजना में यदि किसी किसान का पट्टे पर खेत लिया है तो ऐसे व्यक्ति खेत में बुवाई का सर्टिफिकेट दे सकते हैं। एनसीआईपी (नेशनल क्राॅप इंश्योरेंस पोर्टल) पर नियमानुसार आवेदन सकते हैं। नुकसान की स्थिति में उन्हें भुगतान मिलेगा।
केसीसी से जिन्होंने कभी लोन नहीं लिया, वह सीएससी से करा सकेंगे आवेदन
बीमा योजना में दो तरह के किसान शामिल हैं। पहले किसान वह हैं जोकि नियमित केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के माध्यम से ऋण प्राप्त करते हैं। दूसरे किसान वह हैं, जिन्होंने केसीसी के माध्यम से ऋण नहीं लिया है। वह किसान सीएससी(काॅमन सर्विस सेंटर) या पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। किसानों को दस्तावेज(जमाबंदी-किला नंबर) आदि का ब्योरा भी देना होगा।
खरीफ 2016-2017 से रबी 2024-2025 तक योजना से जुड़े किसान : 11729456
योजना में शामिल क्षेत्रफल : 379.82 लाख एकड़
किसानों की हिस्सेदारी : 2392.28 करोड़ रुपये
राज्य सरकार की हिस्सेदारी : 3233.42 करोड़ रुपये
केंद्र सरकार की हिस्सेदारी : 2953.71 करोड़ रुपये
कुल प्रीमियम : 8579.42 करोड़ रुपये
क्लेम : 9022.83 करोड़ रुपये
नोट : सभी आंकड़े खरीफ 2016-2017 से रबी 2024-2025 तक।