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नशा बना नासूर: दूध-दही के लिए प्रसिद्ध हरियाणा में नशे के लती बढ़े, गांवों और ढाणियों तक पहुंचा मौत का सामान
Mon, 25 Nov 2024 02:31 PM IST
निवेदिता वर्मा
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 25 Nov 2024 02:31 PM IST
सार
ऐसा कोई नशा नहीं है, जो हरियाणा में प्रयोग न किया जा रहा हो। शराब, कच्ची शराब, नकली शराब, चिट्टा, अफीम, गांजा, हेरोइन व नशीली दवाओं के साथ-साथ म्याऊं-म्याऊं से लेकर स्नैक बाइट तक मामले सामने आ रहे हैं। नशा करने वालों में 18 से 35 वर्ष के युवाओं की संख्या अधिक है।
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नशे के विरुद्ध युद्ध
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हरियाणा में नशे की समस्या भयावह हो चुकी है। सरकार खुद मानती है कि 22 जिलों में से 16 नशे की गंभीर चपेट में हैं। बाकी जिलों में भी नशे के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
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नशा शहरों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यह गांव और ढाणियों तक पहुंच गया है। प्रदेश के खुफिया विभाग की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के गांवों में तेजी से नशा बढ़ रहा है, 900 से ज्यादा गांव अधिक प्रभावित हैं। इनमें सभी जिलों के 20 से 50 गांव शामिल हैं। वैसे 3000 गांवों तक ड्रग्स पहुंच रही हैं।
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हरियाणा में बढ़ते नशे के मामलों की तस्कीद खुद सरकार के आंकड़े भी करते हैं। प्रदेश में 2024 में अब तक नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत कुल 2873 केस दर्ज किए जा चुके हैं और 4371 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इन आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन औसतन 7 और हर महीने 239 मामले सामने आ रहे हैं, जबकि हर रोज 11 और हर महीने 364 नशा तस्कर काबू किए जा रहे हैं। इनके अलावा ऐसे भी बहुत से मामले हैं, जो दर्ज ही नहीं किए गए या रिपोर्ट ही नहीं हुए।
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तस्करों का नेटवर्क नहीं तोड़ पाई पुलिस
नशा तस्करों पर शिकंजा कसने के हरियाणा पुलिस के दावे धरे के धरे रहे गए हैं। पुलिस तस्करों का नेटवर्क नहीं तोड़ पाई, बल्कि हरियाणा के भविष्य को खोखला कर रहे नशा तस्करों ने नेटवर्क मजूबत किया है। खासकर पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के साथ लगते जिलों में नशे के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। राज्य नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की 2023-24 की रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि हरियाणा में नशे की सप्लाई में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ये स्थिति तो तब है कि जब बढ़ते नशे के मामले की खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पिछले तीन साल में दो बार उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में नशे पर चिंता जता चुके हैं।सिरसा-फतेहाबाद नशे से सबसे ज्यादा प्रभावित
केंद्रीय जांच एजेंसियों के अनुसार हरियाणा के 16 जिले नशे से सबसे अधिक प्रभावित हैं। इनमें पहला नंबर सिरसा और फतेहाबाद का आता है। इनके बाद हिसार, रेवाड़ी, यमुनानगर, अंबाला, जींद, कैथल, फरीदाबाद, गुरुग्राम, करनाल, रोहतक, सोनीपत, कुरुक्षेत्र, नूंह व पलवल जिलों का नंबर आता है।इस साल नशे से 33 युवा तोड़ चुके दम
प्रदेश में हर साल औसतन 47 से 50 युवक नशे के कारण दम तोड़ रहे हैं। साल 2022 में 84 युवाओं ने नशे के कारण जान गंवाई थी। हरियाणा में इसमें हेरोइन, गांजा, चरस, अफीम, स्मैक, कैप्सूल और कफ सिरप जैसे नशे शामिल हैं। 2023 में लोकसभा में रखे आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2024 के बीच नशे से हरियाणा में 500 से ज्यादा मौत हो चुकी हैं। 2024 में 33 लोगों की मौत नशे की ओवरडोज से हुई है। इनमें हिसार में 11, फतेहाबाद 10, डबवाली 7, रोहतक और हांसी 2-2 और यमुनानगर में 1 की जान गई है।नशे से हुई मौतें
वर्ष मौतें2014 76
2015 32
2016 28
2017 52
2018 86
2019 13
2020 7
2021 44
2022 84
2023 45
2024 33 (अब तक)
नोट : आंकड़े हरियाणा सरकार के हैं।
हर साल एक लाख से अधिक लोग करा रहे रजिस्ट्रेशन
वर्ष नशा मुक्ति केंद्रों में रजिस्ट्रेशन2018 1.02 लाख
2019 1.16 लाख
2020 1.08 लाख
2021 1.16 लाख
2022 1.20 लाख
2023 1.15 लाख
2024 90 हजार (अब तक)
कुल 7.67 लाख
नोट : आंकड़े हरियाणा सरकार के हैं।