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सरकार अपराध रोकने व अपराधियों को सजा दिलाने में कमजोर: दीपेंद्र
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एनसीआरबी की रिपोर्ट पर प्रदेश सरकार को घेरा
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट 2023 का हवाला देते हुए प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार अपराध रोकने और अपराधियों को सजा दिला पाने में कमजोर रही है। अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित न्याय के लिए तरस रहे हैं।
हुड्डा ने कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 15,758 मामले दर्ज हुए। इनमें 1,772 दुष्कर्म और 131 सामूहिक दुष्कर्म के केस शामिल हैं लेकिन सजा दर महज 13.6 फीसदी रही है। वहीं, आरोप-पत्र दाखिल करने की दर भी सिर्फ 56 फीसदी है जोकि राष्ट्रीय औसत 77.9 फीसदी से बहुत कम है।
सांसद ने आरोप लगाया कि बच्चों और एससी वर्ग के खिलाफ अपराधों में भी दोषसिद्धि दर बेहद कम है। हत्या और अपहरण के मामलों में लगातार वृद्धि चिंता का विषय है। वहीं, पुलिस द्वारा झूठे बताकर बंद किए गए मामलों की दर 45.9 फीसदी रही है। दीपेंद्र ने कहा कि यह सब सरकार की कानून-व्यवस्था पर विफलता और पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की कि दोषसिद्धि दर बढ़ाने के लिए सरकार अभियोजन विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली में तुरंत सुधार करे।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट 2023 का हवाला देते हुए प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार अपराध रोकने और अपराधियों को सजा दिला पाने में कमजोर रही है। अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित न्याय के लिए तरस रहे हैं।
हुड्डा ने कहा कि रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल 15,758 मामले दर्ज हुए। इनमें 1,772 दुष्कर्म और 131 सामूहिक दुष्कर्म के केस शामिल हैं लेकिन सजा दर महज 13.6 फीसदी रही है। वहीं, आरोप-पत्र दाखिल करने की दर भी सिर्फ 56 फीसदी है जोकि राष्ट्रीय औसत 77.9 फीसदी से बहुत कम है।
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सांसद ने आरोप लगाया कि बच्चों और एससी वर्ग के खिलाफ अपराधों में भी दोषसिद्धि दर बेहद कम है। हत्या और अपहरण के मामलों में लगातार वृद्धि चिंता का विषय है। वहीं, पुलिस द्वारा झूठे बताकर बंद किए गए मामलों की दर 45.9 फीसदी रही है। दीपेंद्र ने कहा कि यह सब सरकार की कानून-व्यवस्था पर विफलता और पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की कि दोषसिद्धि दर बढ़ाने के लिए सरकार अभियोजन विभाग और पुलिस की कार्यप्रणाली में तुरंत सुधार करे।
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