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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Claim for promotion accepted, yet employee made to wait two and a half decades for financial benefits.

Chandigarh-Haryana News: प्रमोशन का दावा स्वीकार, फिर भी कर्मी को वित्तीय लाभ के लिए कराया ढाई दशक इंतजार

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24 साल लंबित रही याचिका का निपटारा करते हुए वित्तीय लाभ पर ब्याज देने का आदेश
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सरकार के विलंब का शिकार कर्मचारी को नहीं बनने दिया जा सकता : हाईकोर्ट

चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि सरकारी देरी का खामियाजा किसी कर्मचारी को आर्थिक, मानसिक और पेशेवर रूप से नहीं भुगतने दिया जा सकता। अदालत ने यह टिप्पणी 24 साल तक लंबित रही याचिका का निपटारा करते हुए की।
कोर्ट ने पाया कि याची की पदोन्नति का दावा दाे दशक पहले स्वीकार किया जा चुका था लेकिन उसे वित्तीय व अन्य सेवा लाभ नहीं दिए गए और उसे इसके लिए ढाई दशक का इंतजार करना पड़ा। जस्टिस संदीप मौद्गिल ने कर्मचारी आदेश कुमार को पदोन्नति से जुड़ी लंबित राशि 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया है।
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अदालत ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि आदेश कुमार का दावा दो दशक पहले ही स्वीकार किया जा चुका था लेकिन लाभ जारी न करने से उन्हें गंभीर आर्थिक नुकसान, मानसिक उत्पीड़न और करियर में ठहराव झेलना पड़ा। हम उन कठिनाइयों को नजरअंदाज नहीं कर सकते, जो याची को अपने वैधानिक अधिकारों के लिए दो दशक से अधिक समय तक संघर्ष करने के कारण झेलनी पड़ीं।
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प्रशासनिक लापरवाही के चलते उन्हें न केवल आर्थिक बल्कि मानसिक हानि भी हुई। अदालत ने साफ कहा कि जब विभाग स्वयं कर्मचारी के दावे को स्वीकार कर चुका है, तब राज्य की देरी का भार कर्मचारी पर नहीं डाला जा सकता।



यह था मामला

आदेश कुमार ने 2001 में याचिका दायर कर 27 अक्टूबर 1998 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनके जूनियरों को असिस्टेंट वसील बाकी नवीस पद पर प्रमोशन दे दिया गया और उनकी उम्मीदवारी पर विचार नहीं किया गया।
2002 में दायर याचिका के जवाब में अंबाला के डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि 9 जनवरी 2002 के आदेश से याची को 27 अक्टूबर 1998 से पदोन्नति दे दी गई। कोर्ट ने कहा कि याची को उसी तिथि से प्रोमोशन और उसके सभी वित्तीय लाभ मिलने चाहिए जिस दिन उनके जूनियर को प्रमोशन मिला था। विभाग ने स्वयं उनके दावे को उसी दिन स्वीकार कर लिया था लेकिन बावजूद इसके उन्हें वेतन, इंक्रीमेंट और अन्य लाभ नहीं दिए गए।


दो महीने में एरियर देने के आदेश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि 27 अक्तूबर 1998 से 9 जनवरी 2002 की अवधि के सभी एरियर दो महीने के भीतर जारी किए जाएं और इन पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी दिया जाए। अदालत ने कहा कि अब न्याय के पहिए आगे बढ़ने चाहिए और लंबे समय से अटके पड़े कर्मचारी के अधिकारों को बहाल किया जाना चाहिए।
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