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Chandigarh-Haryana News: पंचकूला में अवैध खनन पर सीए ने दिए मानवाधिकार आयोग की सख्त, मांगी रिपोर्ट
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अवैध खनन मामले में पुलिस और अन्य विभागों के अधिकारियों की मिलीभगत के संकेत
चंडीगढ़। मानवाधिकार आयोग ने पंचकूला में अवैध खनन पर कड़ा संज्ञान लेते हुए पंचकूला प्रशासन से अवैध खनन की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अवैध खनन से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर का वैज्ञानिक मूल्यांकन और आरोपियों पर की गई कार्रवाई, निगरानी व प्रवर्तन प्रणाली को मजबूत करने की कार्ययोजना पर रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने पाया कि पिंजौर-नालागढ़ रोड, मल्लाह रोड, रायपुर रानी, मोरनी, बरवाला और चंडीमंदिर समेत कई क्षेत्रों में भारी मात्रा में हो रहे अवैध खनन से कानून व्यवस्था, पर्यावरण और नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। आयोग का दावा है कि पुलिस और अन्य विभागों के अधिकारियों की कथित मिलीभगत के चलते जिले में बड़े पैमाने पर अवैध खनन अब भी जारी है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमरावती पुलिस चौकी प्रभारी सब-इंस्पेक्टर राजबीर सिंह को ड्यूटी के दौरान अवैध खनन करने वालों ने दौड़ाकर धमकाया। यह घटना कानून-व्यवस्था के पूर्ण पतन और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा पर खतरे को दर्शाती है।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस ललित बत्रा और दोनों सदस्य कुलदीप जैन औवदीप भाटिया ने अपने आदेश में उल्लेख किया है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों से पांच (5) किलोमीटर के दायरे में और नदी के पास, अवैध खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की लगातार शिकायतों के बावजूद नगर और जिला प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहे कानून प्रवर्तन कर्मियों को प्रत्यक्ष धमकियां दी गई और उन पर हमले किए गए। संस्थागत लापरवाही दिखाई दे रही है, जो संभवतः खनन माफियाओं से मिलीभगत का परिणाम हो सकती है।
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मानवाधिकार आयोग के प्रोटोकॉल, सूचना व जनसंपर्क अधिकारी डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में स्पष्ट किया गया है कि जनहित के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को 19 अगस्त को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
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चंडीगढ़। मानवाधिकार आयोग ने पंचकूला में अवैध खनन पर कड़ा संज्ञान लेते हुए पंचकूला प्रशासन से अवैध खनन की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अवैध खनन से पर्यावरण पर पड़ने वाले असर का वैज्ञानिक मूल्यांकन और आरोपियों पर की गई कार्रवाई, निगरानी व प्रवर्तन प्रणाली को मजबूत करने की कार्ययोजना पर रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने पाया कि पिंजौर-नालागढ़ रोड, मल्लाह रोड, रायपुर रानी, मोरनी, बरवाला और चंडीमंदिर समेत कई क्षेत्रों में भारी मात्रा में हो रहे अवैध खनन से कानून व्यवस्था, पर्यावरण और नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। आयोग का दावा है कि पुलिस और अन्य विभागों के अधिकारियों की कथित मिलीभगत के चलते जिले में बड़े पैमाने पर अवैध खनन अब भी जारी है। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमरावती पुलिस चौकी प्रभारी सब-इंस्पेक्टर राजबीर सिंह को ड्यूटी के दौरान अवैध खनन करने वालों ने दौड़ाकर धमकाया। यह घटना कानून-व्यवस्था के पूर्ण पतन और सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा पर खतरे को दर्शाती है।
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हरियाणा मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस ललित बत्रा और दोनों सदस्य कुलदीप जैन औवदीप भाटिया ने अपने आदेश में उल्लेख किया है कि प्रतिबंधित क्षेत्रों विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों से पांच (5) किलोमीटर के दायरे में और नदी के पास, अवैध खनन किया जा रहा है। ग्रामीणों और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की लगातार शिकायतों के बावजूद नगर और जिला प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहे कानून प्रवर्तन कर्मियों को प्रत्यक्ष धमकियां दी गई और उन पर हमले किए गए। संस्थागत लापरवाही दिखाई दे रही है, जो संभवतः खनन माफियाओं से मिलीभगत का परिणाम हो सकती है।
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मानवाधिकार आयोग के प्रोटोकॉल, सूचना व जनसंपर्क अधिकारी डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में स्पष्ट किया गया है कि जनहित के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हरियाणा सरकार के संबंधित विभागों को 19 अगस्त को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपनी कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।