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Chandigarh-Haryana News: शिक्षकों पर बाबूगिरी के बोझ डांवाडोल हुई पढ़ाई
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- प्रदेश में पहली से 12वीं तक के 488 स्कूलों में लिपिकों के पद खाली, 185 पद सहायक के भी खाली पड़े
कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर और परिणाम सुधारने के लिए प्रधानाचार्यों के साथ बैठकें कर रहा है। शिक्षकों को हिदायत दी जा रही है लेकिन 488 स्कूलों में लिपिकों के पद खाली होने से शिक्षकों पर पढ़ाई के साथ बाबूगिरी का बोझ भी बढ़ गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि 2024-25 के सत्र में 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 18 सरकारी स्कूलों का परिणाम शून्य रहा था।
हरियाणा एजुकेशन मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन (हेमसा) के प्रदेश अध्यक्ष संदीप सांगवान ने बताया कि प्रदेश के 488 स्कूलों में लिपिक के पद रिक्त हैं। इनमें पहली से 12वीं तक के स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में पूरे स्टाफ का वेतन बनाने, मेडिकल क्लेम, ट्रेजरी-बैंक से लेनदेन, डाक का आदान-प्रदान करने और कोर्ट केस की फाइल लेकर जाने सहित अन्य तरह की जिम्मेदारी शिक्षकों पर है। पढ़ाई के समय शिक्षकों के ये काम करने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना लाजमी है।
इसके अलावा सहायक के 185 पद खाली पड़े हैं। क्लर्क और अधीक्षक के बीच की कड़ी सहायक होता है। किसी भी प्रस्तावित योजना का खाका क्लर्क तैयार करता है लेकिन उसको अंतिम रूप देना सहायक का काम होता है। उस फाइल को अंतिम रूप देकर उप अधीक्षक तक पहुंचाने का काम तय है लेकिन सहायक की कमी के कारण खाका तैयार कर फाइल को अंतिम रूप क्लर्क ही दे रहे हैं। एसोसिएशन ने पद भरने के लिए सरकार से कई बार अपील की है।
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15 हजार शिक्षकों के पद खाली
राज्य के 14,295 सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 15,659 पद खाली पड़े हैं जो कुल स्वीकृत 1,15,325 पदों का 13.57 फीसदी है। यह जानकारी विधानसभा सत्र में शिक्षा विभाग ने दी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि सरकारी स्कूलों में 99,666 शिक्षक कार्यरत हैं जिनमें 80,640 नियमित, 11,916 अतिथि और 7,110 हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से भर्ती किए गए हैं। पांच वर्षों में 13,261 शिक्षकों की भर्ती की गई है।
-- -- -- -मेवात काडर में पीआरटी (प्राथमिक शिक्षक) के 1456 रिक्त पदों को भरने के लिए मांग पत्र हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को पहले ही भेजा जा चुका है। टीजीटी (विभिन्न विषयों) के 3427 पदों को भरने के बारे में हरियाणा कौशल रोजगार निगम को मांग भेजी जा चुकी है। जल्द शिक्षकों सहित अन्य पदों पर भर्ती कर ली जाएगी।
महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री।
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कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर और परिणाम सुधारने के लिए प्रधानाचार्यों के साथ बैठकें कर रहा है। शिक्षकों को हिदायत दी जा रही है लेकिन 488 स्कूलों में लिपिकों के पद खाली होने से शिक्षकों पर पढ़ाई के साथ बाबूगिरी का बोझ भी बढ़ गया है। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। यही कारण है कि 2024-25 के सत्र में 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 18 सरकारी स्कूलों का परिणाम शून्य रहा था।
हरियाणा एजुकेशन मिनिस्ट्रीयल स्टाफ एसोसिएशन (हेमसा) के प्रदेश अध्यक्ष संदीप सांगवान ने बताया कि प्रदेश के 488 स्कूलों में लिपिक के पद रिक्त हैं। इनमें पहली से 12वीं तक के स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में पूरे स्टाफ का वेतन बनाने, मेडिकल क्लेम, ट्रेजरी-बैंक से लेनदेन, डाक का आदान-प्रदान करने और कोर्ट केस की फाइल लेकर जाने सहित अन्य तरह की जिम्मेदारी शिक्षकों पर है। पढ़ाई के समय शिक्षकों के ये काम करने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना लाजमी है।
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इसके अलावा सहायक के 185 पद खाली पड़े हैं। क्लर्क और अधीक्षक के बीच की कड़ी सहायक होता है। किसी भी प्रस्तावित योजना का खाका क्लर्क तैयार करता है लेकिन उसको अंतिम रूप देना सहायक का काम होता है। उस फाइल को अंतिम रूप देकर उप अधीक्षक तक पहुंचाने का काम तय है लेकिन सहायक की कमी के कारण खाका तैयार कर फाइल को अंतिम रूप क्लर्क ही दे रहे हैं। एसोसिएशन ने पद भरने के लिए सरकार से कई बार अपील की है।
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15 हजार शिक्षकों के पद खाली
राज्य के 14,295 सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 15,659 पद खाली पड़े हैं जो कुल स्वीकृत 1,15,325 पदों का 13.57 फीसदी है। यह जानकारी विधानसभा सत्र में शिक्षा विभाग ने दी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि सरकारी स्कूलों में 99,666 शिक्षक कार्यरत हैं जिनमें 80,640 नियमित, 11,916 अतिथि और 7,110 हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से भर्ती किए गए हैं। पांच वर्षों में 13,261 शिक्षकों की भर्ती की गई है।
महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री।