{"_id":"683376225d8ffb10e005ca53","slug":"beneficial-rain-will-benefit-in-sowing-of-kharif-crops-chandigarh-haryana-news-c-16-1-pkl1095-719173-2025-05-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chandigarh-Haryana News: बरसात लाभकारी, खरीफ फसलों की बुवाई में होगा फायदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chandigarh-Haryana News: बरसात लाभकारी, खरीफ फसलों की बुवाई में होगा फायदा
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। खरीफ फसलों की तैयारियों में जुटे किसानों का मन बरसात ने खुश कर दिया है। इस बरसात से आगामी फसल की बुवाई की तैयारियों में लाभ मिलेगा। जिन फसलों की बुवाई हो चुकी उन्हें भी लाभ होगा। विशेषज्ञ के अनुसार खाली पड़े खेतों में बरसाती पानी प्राकृतिक खाद का काम करेगा।
पंचकूला के कृषि उप निदेशक महाबीर सिंह ने कहा कि बरसात का सबसे बड़ा लाभ यही है कि यह प्राकृतिक जल स्रोत होता है। खेतों के लिए यह पानी अमृत के समान है। इस प्राकृतिक जल स्रोत में यूरिया और नाइट्रोजन की अधिकता होती है। मिट्टी को अंदर से यह नमी बनाए रखता है। इससे बीज अंकुरण के लिए अनुकूल परिस्थिति बनती हैं और आसानी से बीच अंकुरित होते हैं। जो भी फसल खेतों में खड़ी है उसकी पैदावार भी जमीनी पानी की तुलना में अधिक होती है। कीटों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। जमीन के अंदर जो भी मिट्टी को नुकसान पहुंचाने वाले कीटाणु होते हैं उन्हें बरसाती पानी धो देता है। हां, इस बरसात से जिन क्षेत्रों में अभी बेल वाली सब्जियां खड़ी हैं उन्हें हवा के कारण थोड़ा नुकसान हो सकता है।
-- -- -- -- -- -- -
खेत खाली हैं तो कर दें जुताई
महाबीर सिंह का कहना है कि खेत यदि अभी खाली पड़े हैं तो थोड़ी नमी खत्म होते ही जुताई कर दें। जब तापमान अपने उच्चस्तर पर होगा तब जुते हुए खेतों के अंदर तक सूरज की किरणें पहुंचेंगी। इन्हीं सूरज की किरणों की तपिश से फसलों के दुश्मन कीड़े-मकाैड़े मर जाएंगे। इससे खरीफ की फसलों के लिए और अधिक अनुकूल वातावरण तैयार होगा।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -
नरमा की हो चुकी बुवाई, धान, बाजरा, मक्का, दालों की बारी
नरमा की बुवाई हो चुकी है। ऐसे में इस फसल के लिए यह बरसात लाभकारी है। सब्जियों के लिए भी बरसात लाभकारी है। ढैंचे की फसल में भी सबसे अधिक लाभ हुआ है। धान की रोपाई होनी है। ज्वार, बाजरा, मक्का, दालों की भी बारी है।
विज्ञापन
चंडीगढ़। खरीफ फसलों की तैयारियों में जुटे किसानों का मन बरसात ने खुश कर दिया है। इस बरसात से आगामी फसल की बुवाई की तैयारियों में लाभ मिलेगा। जिन फसलों की बुवाई हो चुकी उन्हें भी लाभ होगा। विशेषज्ञ के अनुसार खाली पड़े खेतों में बरसाती पानी प्राकृतिक खाद का काम करेगा।
पंचकूला के कृषि उप निदेशक महाबीर सिंह ने कहा कि बरसात का सबसे बड़ा लाभ यही है कि यह प्राकृतिक जल स्रोत होता है। खेतों के लिए यह पानी अमृत के समान है। इस प्राकृतिक जल स्रोत में यूरिया और नाइट्रोजन की अधिकता होती है। मिट्टी को अंदर से यह नमी बनाए रखता है। इससे बीज अंकुरण के लिए अनुकूल परिस्थिति बनती हैं और आसानी से बीच अंकुरित होते हैं। जो भी फसल खेतों में खड़ी है उसकी पैदावार भी जमीनी पानी की तुलना में अधिक होती है। कीटों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। जमीन के अंदर जो भी मिट्टी को नुकसान पहुंचाने वाले कीटाणु होते हैं उन्हें बरसाती पानी धो देता है। हां, इस बरसात से जिन क्षेत्रों में अभी बेल वाली सब्जियां खड़ी हैं उन्हें हवा के कारण थोड़ा नुकसान हो सकता है।
विज्ञापन
खेत खाली हैं तो कर दें जुताई
महाबीर सिंह का कहना है कि खेत यदि अभी खाली पड़े हैं तो थोड़ी नमी खत्म होते ही जुताई कर दें। जब तापमान अपने उच्चस्तर पर होगा तब जुते हुए खेतों के अंदर तक सूरज की किरणें पहुंचेंगी। इन्हीं सूरज की किरणों की तपिश से फसलों के दुश्मन कीड़े-मकाैड़े मर जाएंगे। इससे खरीफ की फसलों के लिए और अधिक अनुकूल वातावरण तैयार होगा।
विज्ञापन
नरमा की हो चुकी बुवाई, धान, बाजरा, मक्का, दालों की बारी
नरमा की बुवाई हो चुकी है। ऐसे में इस फसल के लिए यह बरसात लाभकारी है। सब्जियों के लिए भी बरसात लाभकारी है। ढैंचे की फसल में भी सबसे अधिक लाभ हुआ है। धान की रोपाई होनी है। ज्वार, बाजरा, मक्का, दालों की भी बारी है।