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Chandigarh-Haryana News: पीपीपी मॉडल पर बस अड्डे बनाने से पहले दूसरे प्रदेशों की नीतियों का होगा अध्ययन
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परिवहन विभाग यूपी, गुजरात, पंजाब व अन्य प्रदेशों की नीतियों का करेगा अध्ययन
विज ने कहा- अध्ययन रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। परिवहन विभाग ने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) से बनाए जाने वाले बस अड्डों की कवायद शुरू कर दी है। परिवहन मंत्री ने विभाग को अन्य राज्यों में पीपीपी मोड पर बनाए गए बस अड्डों का अध्ययन करने को कहा था। अब विभाग के अधिकारी गुजरात, पंजाब और उत्तर प्रदेश में पीपीपी मोड पर बनाए गए बस अड्डों का अध्ययन करेंगे। हालांकि पंजाब का मॉडल का ज्यादा सफल नहीं रहा। फिर भी अधिकारी देखेंगे कि यह मॉडल क्यों नहीं सफल नहीं हो सका।
हरियाणा सरकार ने 2025-26 बजट में पिपली, करनाल, गुरुग्राम, बल्लभगढ़ व सोनीपत में पीपीपी मोड पर बस अड्डे बनाने का एलान किया था। विभाग ने इसकी योजना भी तैयार की थी। पिछले दिनों अधिकारियों ने इसकी फाइल परिवहन मंत्री अनिल विज को भी दिखाई मगर वे इससे संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने आपत्ति जताते हुए न केवल फाइल को वापस लौटा दी बल्कि विभागीय अधिकारियों को उन प्रदेशों की नीतियों का अध्ययन करने को कहा जहां पीपीपी मॉडल सफल रहा। उसके बाद रिपोर्ट पेश करने को कहा। विज ने यह भी पूछा था कि इससे सरकार के राजस्व को कितना फायदा होगा। विभाग के एक अधिकारी ने बताया, पीपीपी मॉडल फिलहाल यूपी व गुजरात में सफल हैं।
गुजरात का मॉडल सबसे सफल
पीपीपी मॉडल पर बनाए गए बस अड्डों के लिहाज से गुजरात का मॉडल सबसे सफल माना जाता है। गुजरात के बस अड्डों पर यात्रियों को वातानुकूलित प्रतीक्षालय, रेस्टोरेंट, कैफे, सुलभ शौचालय व शॉपिंग सेंटर हैं। हर बस की ट्रैकिंग की सुविधा भी कुछ बस अड्डों पर उपलब्ध है। गुजरात में निजी कंपनियों को बस अड्डे 99 साल के पट्टे पर दिए जाते हैं। वहीं, यूपी में योजना शुरू हुए अभी एक साल हुए हैं। राज्य के 23 बस अड्डों को पीपीपी मॉडल पर बनाने की मंजूरी दी गई है। यहां भी निजी कंपनी को लीज पर जगह दी गई है। यूपी में भी बस अड्डों पर होटल, शॉपिंग सेंटर, आधुनिक प्रतीक्षालय और साफ सुथरे शौचालय बनाने की योजना है। हालांकि कर्नाटक व चेन्नई में भी बस अड्डे पीपीपी मॉडल पर बनाए जा रहे हैं।
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विज ने कहा- अध्ययन रिपोर्ट आने के बाद ही लिया जाएगा फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। परिवहन विभाग ने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) से बनाए जाने वाले बस अड्डों की कवायद शुरू कर दी है। परिवहन मंत्री ने विभाग को अन्य राज्यों में पीपीपी मोड पर बनाए गए बस अड्डों का अध्ययन करने को कहा था। अब विभाग के अधिकारी गुजरात, पंजाब और उत्तर प्रदेश में पीपीपी मोड पर बनाए गए बस अड्डों का अध्ययन करेंगे। हालांकि पंजाब का मॉडल का ज्यादा सफल नहीं रहा। फिर भी अधिकारी देखेंगे कि यह मॉडल क्यों नहीं सफल नहीं हो सका।
हरियाणा सरकार ने 2025-26 बजट में पिपली, करनाल, गुरुग्राम, बल्लभगढ़ व सोनीपत में पीपीपी मोड पर बस अड्डे बनाने का एलान किया था। विभाग ने इसकी योजना भी तैयार की थी। पिछले दिनों अधिकारियों ने इसकी फाइल परिवहन मंत्री अनिल विज को भी दिखाई मगर वे इससे संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने आपत्ति जताते हुए न केवल फाइल को वापस लौटा दी बल्कि विभागीय अधिकारियों को उन प्रदेशों की नीतियों का अध्ययन करने को कहा जहां पीपीपी मॉडल सफल रहा। उसके बाद रिपोर्ट पेश करने को कहा। विज ने यह भी पूछा था कि इससे सरकार के राजस्व को कितना फायदा होगा। विभाग के एक अधिकारी ने बताया, पीपीपी मॉडल फिलहाल यूपी व गुजरात में सफल हैं।
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गुजरात का मॉडल सबसे सफल
पीपीपी मॉडल पर बनाए गए बस अड्डों के लिहाज से गुजरात का मॉडल सबसे सफल माना जाता है। गुजरात के बस अड्डों पर यात्रियों को वातानुकूलित प्रतीक्षालय, रेस्टोरेंट, कैफे, सुलभ शौचालय व शॉपिंग सेंटर हैं। हर बस की ट्रैकिंग की सुविधा भी कुछ बस अड्डों पर उपलब्ध है। गुजरात में निजी कंपनियों को बस अड्डे 99 साल के पट्टे पर दिए जाते हैं। वहीं, यूपी में योजना शुरू हुए अभी एक साल हुए हैं। राज्य के 23 बस अड्डों को पीपीपी मॉडल पर बनाने की मंजूरी दी गई है। यहां भी निजी कंपनी को लीज पर जगह दी गई है। यूपी में भी बस अड्डों पर होटल, शॉपिंग सेंटर, आधुनिक प्रतीक्षालय और साफ सुथरे शौचालय बनाने की योजना है। हालांकि कर्नाटक व चेन्नई में भी बस अड्डे पीपीपी मॉडल पर बनाए जा रहे हैं।
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