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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Anganwadi workers and Panchayat representatives will become charioteers in the campaign against drug addiction

Chandigarh-Haryana News: नशे के विरुद्ध मुहिम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व पंचायती प्रतिनिधि बनेंगे सारथी

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व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर चिकित्सा सुविधाएं व परामर्श सेवाएं लोगों तक पहुंचाई जाएंगी
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। प्रदेश सरकार ने नशे के विरुद्ध सख्त रुख अपनाया रखा है। अमर उजाला के अभियान के बाद प्रशासन व पुलिस की ओर से नशा तस्करों पर चौतरफा वार करने के साथ-साथ पीड़ितों को इलाज दिलाने के लिए भी नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। इसी के तहत प्रदेश के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व पंचायती प्रतिनिधियों को पुलिस सारथी बनाने जा रही है। इनके सहयोग से नशे को जड़ से समाप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस पहल को स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से एक समुदाय-आधारित अभियान के रूप में संचालित किया जाएगा। इसमें मेरा गांव-मेरी शान मॉडल की तर्ज पर प्रदेशभर के विभिन्न गांवों और वार्डों में सक्रियता से नशे के शिकार लोगों की पहचान करने के बाद उन्हें इलाज की सुविधा व प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्थानीय पंचायती प्रतिनिधियों को सहयोगी की तरह जोड़ते हुए व्हाट्सएप ग्रुप का संचालन होगा ताकि नशा छोड़ने के शिविर, उपलब्ध चिकित्सीय सुविधाएं और परामर्श सेवाएं जन-जन तक पहुंचाई जा सकें।
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सादी वेशभूषा में संवाद, परामर्श व प्रेरणात्मक कहानियां सुनाई जाएंगी
नशे के शिकार लोगों से पुलिसकर्मी सादी वेशभूषा में जाकर संपर्क व संवाद करेंगे। पुलिस उन्हें कई सुविधाएं भी प्रदान करेगी। 1.80 लाख के नीचे आय वाले परिवार के नशा पीड़ित के लिए डॉक्टरी परामर्श व दवाओं की व्यवस्था होगी। साथ ही प्रत्येक नशा पीड़ित को नशा छोड़कर जिम्मेदार नागरिक बनने वालों की प्रेरणात्मक कहानियां भी सुनाकर उनकी सोच बदलने की कोशिश की जाएगी।
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एक रुपया खर्च कर 64 रुपये का लाभ
हरियाणा पुलिस का दावा है कि इस पूरे अभियान की वार्षिक लागत लगभग 10 लाख रुपये आंकी गई है जबकि इससे मिलने वाला सामाजिक और आर्थिक लाभ 6.32 करोड़ रुपये से अधिक है। इसका मतलब है कि एक रुपया खर्च करने पर लगभग 64 रुपये का लाभ समाज को मिलेगा।


नशा प्रभावित शहरी इलाकों की पहचान होगी


हरियाणा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के प्रमुख ओपी सिंह ने बताया कि राज्य के प्रमुख नशा प्रभावित शहरी इलाकों की पहचान करके वहां एक समन्वित रणनीति लागू की जाएगी। इसमें कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ समाज की भागीदारी और व्यापक जन जागरूकता अभियान भी शामिल होगा। नशे की बीमारी को समाप्त करने के लिए जनता, प्रशासन और पुलिस सभी को मिलकर काम करना होगा।
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