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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   Alimony is necessary for wife and children, but not so much that it becomes a means of luxury: High Court, Court News, Haryana News

पत्नी व बच्चों को गुजारा भत्ता जरूरी, पर इतना भी नहीं की विलासिता का साधन बने : हाईकोर्ट

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कहा-पत्नी के सोशल मीडिया पर एक्टिव होने के आधार पर पति नहीं मोड़ सकता जिम्मेदारी से मुंह
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-नूंह की फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ पति की अपील को हाईकोर्ट ने किया खारिज
अमरउजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। गुजारा भत्ता आदेश को चुनौती देने वाली पति की याचिका को खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि कि गुजारा भत्ता न तो इतना कम होना चाहिए कि पत्नी और बच्चे को अभावग्रस्त जीवन जीना पड़े और न ही इतना अधिक कि वह विलासिता का साधन बन जाए।

नूंह फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली पति की याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस आधार पर कि पत्नी सोशल मीडिया पर सक्रिय है या मायके में ठीक-ठाक जीवन बिता रही है, पति अपनी जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता। फैमिली कोर्ट ने पत्नी के लिए 7,000 और नाबालिग बेटे के लिए 3,000 रुपये प्रतिमाह का गुजारा भत्ता तय किया था। पति ने दलील दी कि उसकी पत्नी एमए और बीएड डिग्री धारक है। सोशल मीडिया पर उसके 1.27 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं और वह इससे कमाई भी कर रही है जबकि वह खुद बेरोजगार है और केवल कभी-कभार ट्यूशन लेकर आय अर्जित करता है। कोर्ट ने कहा कि पत्नी का पढ़ा-लिखा होना वित्तीय स्वतंत्रता की गारंटी नहीं है, खासकर तब जब वह नाबालिग बच्चे की देखभाल कर रही हो। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि गुजारा भत्ता तय करते समय दोनों पक्षों की वास्तविक आय क्षमता का सही-सही खुलासा होना चाहिए ताकि राशि न्यायोचित और संतुलित रहे।
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