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Chandigarh-Haryana News: सैन्य अधिकारियों का परिवार, तीन पीढ़ियों ने साथ-साथ लड़े चार बड़े युद्ध
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भारतीय सेना के पूर्व अध्यक्ष दलबीर सुहाग के झज्जर स्थित बिशन गांव का है आरएस सुहाग का परिवार
पिता के साथ कर्नल आरएस सुहाग ने 1965 और 1971 के युद्ध लड़े, दो भाई भी दो युद्धों में साथ रहे
1999 में आरएस सुहाग के तीनों बेटों के साथ ही भाई और दामाद ने भी संभाला था मोर्चा, इसलिए खास
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। कोई भी उच्चाधिकारी बनने के बाद अपने बच्चों को चिकित्सक तो कोई इंजीनियर बनाता है। विदेश में नाैकरी के लिए भेज देता है, लेकिन हरियाणा की माटी की बात निराली है। यहां ऐसे भी परिवार हैं, जो देश सेवा में इस तरह रम गए कि पीढ़ियों से सेना में रहकर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। ऐसा ही एक परिवार है रिटायर कर्नल आरएस सुहाग का, जिनके परिवार की तीन पीढ़ियों ने एक साथ चार युद्ध लड़े हैं।
मूलरूप से झज्जर के बिशन गांव निवासी आरएस सुहाग का परिवार देश सेवा का जज्बा रखता है। भारतीय सेना के पूर्व सेनाध्यक्ष दलबीर सुहाग भी इसी गांव के हैं। आरएस सुहाग ने परिवार के कई सदस्यों के पीढ़ी-दर-पीढ़ी सेना में जाने और एक साथ युद्ध लड़ने की पूरी कहानी साझा की। सबसे पहले 1965 के युद्ध की बात करते हैं। इस युद्ध में आरएस सुहाग और उनके पिता स्व. सूबेदार करतार सिंह साथ-साथ पंजाब सीमा के निकट लड़े। उस समय करतार सिंह अमृतसर और आरएस सुहाग बठिंडा में तैनात थे। 1971 के युद्ध की यादें भी इस परिवार ने संजोई हुई हैं। इस लड़ाई में करतार सिंह और आरएस सुहाग के साथ भाई रिटायर्ड जेसीओ (जूनियर कमीशन ऑफिसर) सुरेंद्र ने डटकर दुश्मनों से लोहा लिया था। इस युद्ध में करतार सिंह से 50 मीटर दूरी पर बम फटा था, इसमें वे बाल-बाल बचे थे। श्रीलंका में जब शांति सेना भेजी गई तो आरएस सुहाग के साथ उनके दोनों भाई सुरेंद्र और जेसीओ वीरेंद्र भी लिट्टे से भिड़ने गए थे।
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कारगिल में भाई, दामाद और तीनों बेटों के साथ दुश्मनों को हराया
हरियाणा पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष आरएस सुहाग कहते हैं कि हमारे परिवार को पुराने समय से ही एक साथ युद्ध पर जाने की आदत रही है, मगर 1999 में हुए कारगिल युद्ध में पूरा परिवार भावुक था। इसकी वजह थी कि कारगिल युद्ध में उनके अलावा तीनों बेटे नेवी कमांडर धर्मेंद्र, कर्नल सुनील व कर्नल अनिल और सोनीपत निवासी दामाद ब्रिगेडियर रामनरेश भी युद्ध में शामिल थे। भाई वीरेंद्र भी इस युद्ध में साथ थे। इसलिए परिवार को चिंता सताती थी।
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फोटो संख्या : 04 और 05
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पिता के साथ कर्नल आरएस सुहाग ने 1965 और 1971 के युद्ध लड़े, दो भाई भी दो युद्धों में साथ रहे
1999 में आरएस सुहाग के तीनों बेटों के साथ ही भाई और दामाद ने भी संभाला था मोर्चा, इसलिए खास
अरुण शर्मा
चंडीगढ़। कोई भी उच्चाधिकारी बनने के बाद अपने बच्चों को चिकित्सक तो कोई इंजीनियर बनाता है। विदेश में नाैकरी के लिए भेज देता है, लेकिन हरियाणा की माटी की बात निराली है। यहां ऐसे भी परिवार हैं, जो देश सेवा में इस तरह रम गए कि पीढ़ियों से सेना में रहकर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। ऐसा ही एक परिवार है रिटायर कर्नल आरएस सुहाग का, जिनके परिवार की तीन पीढ़ियों ने एक साथ चार युद्ध लड़े हैं।
मूलरूप से झज्जर के बिशन गांव निवासी आरएस सुहाग का परिवार देश सेवा का जज्बा रखता है। भारतीय सेना के पूर्व सेनाध्यक्ष दलबीर सुहाग भी इसी गांव के हैं। आरएस सुहाग ने परिवार के कई सदस्यों के पीढ़ी-दर-पीढ़ी सेना में जाने और एक साथ युद्ध लड़ने की पूरी कहानी साझा की। सबसे पहले 1965 के युद्ध की बात करते हैं। इस युद्ध में आरएस सुहाग और उनके पिता स्व. सूबेदार करतार सिंह साथ-साथ पंजाब सीमा के निकट लड़े। उस समय करतार सिंह अमृतसर और आरएस सुहाग बठिंडा में तैनात थे। 1971 के युद्ध की यादें भी इस परिवार ने संजोई हुई हैं। इस लड़ाई में करतार सिंह और आरएस सुहाग के साथ भाई रिटायर्ड जेसीओ (जूनियर कमीशन ऑफिसर) सुरेंद्र ने डटकर दुश्मनों से लोहा लिया था। इस युद्ध में करतार सिंह से 50 मीटर दूरी पर बम फटा था, इसमें वे बाल-बाल बचे थे। श्रीलंका में जब शांति सेना भेजी गई तो आरएस सुहाग के साथ उनके दोनों भाई सुरेंद्र और जेसीओ वीरेंद्र भी लिट्टे से भिड़ने गए थे।
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कारगिल में भाई, दामाद और तीनों बेटों के साथ दुश्मनों को हराया
हरियाणा पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष आरएस सुहाग कहते हैं कि हमारे परिवार को पुराने समय से ही एक साथ युद्ध पर जाने की आदत रही है, मगर 1999 में हुए कारगिल युद्ध में पूरा परिवार भावुक था। इसकी वजह थी कि कारगिल युद्ध में उनके अलावा तीनों बेटे नेवी कमांडर धर्मेंद्र, कर्नल सुनील व कर्नल अनिल और सोनीपत निवासी दामाद ब्रिगेडियर रामनरेश भी युद्ध में शामिल थे। भाई वीरेंद्र भी इस युद्ध में साथ थे। इसलिए परिवार को चिंता सताती थी।
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फोटो संख्या : 04 और 05