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Chandigarh-Haryana News: आईटीआई में 85 हजार ने कराया पंजीकरण, 36 हजार सीटें अब भी रिक्त
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-दाखिले के लिए दोबारा पोर्टल खोलने की तैयारी, केंद्र सरकार से मांगीं मंजूरी
- प्रदेशभर में तकरीबन एक लाख सीटें उपलब्ध
कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। हरियाणा के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में इस वर्ष दाखिला प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से चलाई गई है। अब तक कुल 85,193 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है जिनमें से 42,201 विद्यार्थियों को दाखिला मिल चुका है। इनमें 8,347 छात्राएं और 33,854 छात्र शामिल हैं। इसके बावजूद करीब 36,000 सीटें अभी भी रिक्त पड़ी हैं जो कि कुल उपलब्ध तकरीबन एक लाख सीटों का तकरीबन 33 फीसदी है।
प्रदेशभर के आईटीआई संस्थानों में इस वर्ष लगभग एक लाख सीटें उपलब्ध थीं। इनमें से 25,749 सीटें सरकारी संस्थानों और 11,603 सीटें निजी आईटीआई में रिक्त हैं। विभाग ने खाली सीटें भरने के लिए 11 अगस्त से 22 अगस्त तक ऑन द स्पॉट एडमिशन प्रक्रिया आयोजित की। इसके तहत दाखिले की संख्या अभी उजागर होनी है। इसके बावजूद दाखिले अपेक्षा से कम रहे। अब विभाग भारत सरकार से दाखिला पोर्टल दोबारा खोलने की अनुमति मांगने की तैयारी में है ताकि पात्र विद्यार्थियों को एक और अवसर दिया जा सके।
जानें...किस ट्रेड में दाखिले हुए
इलेक्ट्रिशियन (7990 दाखिले) और कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (6661 दाखिले) सबसे ज्यादा लोकप्रिय साबित हुए। मोटर मैकेनिक (1233 दाखिले), स्टेनोग्राफी (1367 दाखिले) और डीजल मैकेनिक (1460 दाखिले) जैसे पारंपरिक ट्रेड में छात्रों की रुचि घटती नजर आई। हिसार ने सबसे अधिक 4790 दाखिले दर्ज किए जबकि यमुनानगर 2041 दाखिलों के साथ टॉप-10 जिलों में सबसे नीचे रहा। विशेषज्ञ सेवानिवृत्त लेक्चरर व सामाजिक कार्यकर्ता चमन लाल कौशिक ने बताया कि आईटीआई में दाखिलों में कमी की बड़ी वजह युवाओं का रुझान अन्य प्रोफेशनल कोर्स, इंजीनियरिंग और डिग्री पाठ्यक्रमों की ओर होना है। इसके अलावा निजी आईटीआई की गुणवत्ता को लेकर संदेह और रोजगार की पक्की गारंटी न होना भी कारण बताए जा रहे हैं।
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सीटें खाली क्यों रह गईं?
1. प्रोफेशनल कोर्स का आकर्षण : छात्र बीटेक, डिप्लोमा व स्किल-डेवलपमेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं।
2. कमजोर ट्रेड : मोटर मैकेनिक, स्टेनोग्राफी, डीजल मैकेनिक जैसे ट्रेड में रुचि कम।
3. निजी आईटीआई पर अविश्वास : फीस और गुणवत्ता को लेकर छात्रों का भरोसा कमजोर।
4. रोजगार की गारंटी नहीं : डिग्री कोर्स की तुलना में अवसर सीमित।
5. जागरूकता की कमी : ग्रामीण छात्रों तक नए ट्रेड की जानकारी नहीं।
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- प्रदेशभर में तकरीबन एक लाख सीटें उपलब्ध
कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। हरियाणा के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में इस वर्ष दाखिला प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी तरीके से चलाई गई है। अब तक कुल 85,193 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है जिनमें से 42,201 विद्यार्थियों को दाखिला मिल चुका है। इनमें 8,347 छात्राएं और 33,854 छात्र शामिल हैं। इसके बावजूद करीब 36,000 सीटें अभी भी रिक्त पड़ी हैं जो कि कुल उपलब्ध तकरीबन एक लाख सीटों का तकरीबन 33 फीसदी है।
प्रदेशभर के आईटीआई संस्थानों में इस वर्ष लगभग एक लाख सीटें उपलब्ध थीं। इनमें से 25,749 सीटें सरकारी संस्थानों और 11,603 सीटें निजी आईटीआई में रिक्त हैं। विभाग ने खाली सीटें भरने के लिए 11 अगस्त से 22 अगस्त तक ऑन द स्पॉट एडमिशन प्रक्रिया आयोजित की। इसके तहत दाखिले की संख्या अभी उजागर होनी है। इसके बावजूद दाखिले अपेक्षा से कम रहे। अब विभाग भारत सरकार से दाखिला पोर्टल दोबारा खोलने की अनुमति मांगने की तैयारी में है ताकि पात्र विद्यार्थियों को एक और अवसर दिया जा सके।
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जानें...किस ट्रेड में दाखिले हुए
इलेक्ट्रिशियन (7990 दाखिले) और कंप्यूटर ऑपरेटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट (6661 दाखिले) सबसे ज्यादा लोकप्रिय साबित हुए। मोटर मैकेनिक (1233 दाखिले), स्टेनोग्राफी (1367 दाखिले) और डीजल मैकेनिक (1460 दाखिले) जैसे पारंपरिक ट्रेड में छात्रों की रुचि घटती नजर आई। हिसार ने सबसे अधिक 4790 दाखिले दर्ज किए जबकि यमुनानगर 2041 दाखिलों के साथ टॉप-10 जिलों में सबसे नीचे रहा। विशेषज्ञ सेवानिवृत्त लेक्चरर व सामाजिक कार्यकर्ता चमन लाल कौशिक ने बताया कि आईटीआई में दाखिलों में कमी की बड़ी वजह युवाओं का रुझान अन्य प्रोफेशनल कोर्स, इंजीनियरिंग और डिग्री पाठ्यक्रमों की ओर होना है। इसके अलावा निजी आईटीआई की गुणवत्ता को लेकर संदेह और रोजगार की पक्की गारंटी न होना भी कारण बताए जा रहे हैं।
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सीटें खाली क्यों रह गईं?
1. प्रोफेशनल कोर्स का आकर्षण : छात्र बीटेक, डिप्लोमा व स्किल-डेवलपमेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं।
2. कमजोर ट्रेड : मोटर मैकेनिक, स्टेनोग्राफी, डीजल मैकेनिक जैसे ट्रेड में रुचि कम।
3. निजी आईटीआई पर अविश्वास : फीस और गुणवत्ता को लेकर छात्रों का भरोसा कमजोर।
4. रोजगार की गारंटी नहीं : डिग्री कोर्स की तुलना में अवसर सीमित।
5. जागरूकता की कमी : ग्रामीण छात्रों तक नए ट्रेड की जानकारी नहीं।