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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   75Persent of schools are teaching books from private publishers instead of NCERT

Chandigarh-Haryana News: एनसीईआरटी के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ा रहे 75 फीसदी स्कूल

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- सरकार के आदेशों पर नहीं हो रहा अमल, निजी स्कूल संचालक सरकार की लापरवाही को बता रहे कारण
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- एनसीईआरटी किताबें समय पर न मिलने से बिगड़ रहा सत्र, शिक्षा विभाग की लापरवाही उजागर


कुलदीप शुक्ला
चंडीगढ़। हरियाणा में सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद निजी स्कूलों में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की जगह निजी प्रकाशकों की किताबें धड़ल्ले से पढ़ाई जा रही हैं। शिक्षा विभाग के पास मौजूद आंकड़ों के अनुसार बाल वाटिका से लेकर पांचवीं तक के करीब 75 फीसदी निजी स्कूल अब भी निजी प्रकाशकों की किताबों से पढ़ाई करा रहे हैं। प्रदेश में करीब 10,700 मान्यता प्राप्त निजी स्कूल हैं और बाल वाटिकाओं से लेकर पांचवीं तक की कक्षाओं में करीब 20 लाख विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। बड़ी हैरानी की बात है कि एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के निर्देश व चेतावनी जारी करने वाले शिक्षा विभाग के पास सभी स्कूलों को ब्योरा है जो उनके आदेश की धज्जियां उड़ाकर निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है।

पैरेट्स एसोसिएशन हरियाणा के अध्यक्ष सौरव मेहता ने बताया कि पांचवीं कक्षा तक के हरियाणा में 75 फीसदी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाई जा रही हैं। यह जानकारी उनकी ओर से लगाई गई आरटीआई पर शिक्षा विभाग की ओर से दी गई है। फिलहाल, जमीनी हकीकत यही है कि सरकार के एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के आदेशों के बावजूद निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों का वर्चस्व कायम है। इसके कारण बच्चों की पढ़ाई का आर्थिक बोझ परिवारों पर बढ़ रहा है।
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हर शैक्षणिक सत्र से पहले सरकार और शिक्षा विभाग यह निर्देश जारी करता है कि सभी निजी स्कूल एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य रूप से अपनाएं। इसके बावजूद स्कूल संचालक हर बार यही तर्क देते हैं कि सरकारी किताबें समय पर उपलब्ध नहीं होतीं।
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तीन सत्रों से देरी से पहुंचीं किताबें
प्राइवेट स्कूल संघ के अध्यक्ष सत्यपाल कुंडू ने बताया कि 2023-24, 2024-25 और 2025-26 तीनों सत्रों में किताबें अगस्त के अंत तक ही मिलीं। इससे नए सत्र के शुरुआती तीन-चार महीने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि मजबूरी में स्कूलों को निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ानी पड़ रही हैं।

25 से 30 प्रतिशत तक महंगी हैं निजी प्रकाशकों की किताबें
कुंडू के मुताबिक एनसीईआरटी की किताबों की कीमत निजी प्रकाशकों की तुलना में 25 से 30 फीसदी तक कम होती है। वहीं, निजी प्रकाशकों की किताबों में अतिरिक्त वर्णन और आकर्षक प्रिंट के कारण अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।

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विभाग हर साल किताबें समय पर स्कूलों तक पहुंचाने का प्रयास करता है। अलग-अलग प्रकाशकों को प्रिंटिंग का काम सौंपा गया है ताकि किताबें समय से छात्रों तक पहुंच सकें।
विनीत गर्ग, एसीएस, शिक्षा विभाग।
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