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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   51 water tanks in the state are completely dry, only 25 percent water is left in 327.

Chandigarh-Haryana News: प्रदेश में 51 जलघर पूरी तरह सूखे, 327 में बचा केवल 25 प्रतिशत पानी

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13 जिलों में जल संकट, पश्चिमी यमुना नहर और भाखड़ा बांध से छह-छह जिलों में होती है पेयजल आपूर्ति
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चंडीगढ़। भाखड़ा बांध से पानी में कटौती जारी रहने के कारण हरियाणा में बड़ा पेयजल संकट खड़ा हो गया है। हरियाणा के हक का पानी पंजाब नहीं दे रहा। इससे प्रदेश के 13 जिले बुरी तरह से जल संकट की चपेट में आ गए हैं। पानी न मिलने से प्रदेश में 51 जलघर पूरी तरह से सूख गए हैं जबकि 327 जलघरों में केवल 25 प्रतिशत ही नहरी पानी बचा है।
पानी की किल्लत ने सिंचाई और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को भी चिंता में डाल दिया है। पेयजल आपूर्ति से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुल 13 जिलों के 1613 जलघरों में पेयजल आपूर्ति को लेकर ब्योरा तैयार किया गया है। प्रदेश के 429 जलघरों में 25 से 50 प्रतिशत ही नहरी पानी शेष है। इसी तरह से 406 जलघरों में 50 से 75 प्रतिशत ही पानी है। 400 जलघर ऐसे हैं जिनमें 75 प्रतिशत से अधिक पानी है।
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इन जिलों में पूरी तरह से सूखे जलघर
भिवानी में यमुना नहर से जुड़े छह जलघर और भाखड़ा से पेयजल आपूर्ति वाले दो जलघर पूरी तरह से सूख गए हैं। हिसार में भाखड़ा और यमुना नहर से जुड़े एक-एक जलघर पूरी तरह से सूख चुके हैं। कैथल में सर्वाधिक नाै जलघर भाखड़ा से पेयजल आपूर्ति से जुड़े हैं, ये सभी पूरी तरह सूख गए हैं। करनाल में यमुना नहर से जुड़ा एक, सिरसा में भाखड़ा से जुड़े चार और सोनीपत में यमुना नहर से जुड़े 27 जलघरों में पानी नहीं बचा है।
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भाखड़ा और यमुना नहर पर आश्रित है पेयजल आपूर्ति
भाखड़ा नंगल बांध से 8500 क्यूसेक के बजाय केवल 4000 क्यूसेक पानी मिल रहा है। पर्याप्त पानी न मिलने के कारण सीधे ताैर से 13 जिले जल संकट से जूझ रहे हैं। प्रदेश में पश्चिमी यमुना नहर (डब्ल्यूजेसी) से झज्जर, रोहतक, जींद का कुछ क्षेत्र, भिवानी, नारनाैल और रेवाड़ी में पेयजल आपूर्ति होती है। भाखड़ा की बात करें तो इससे कैथल, हिसार, सिरसा, फतेहाबाद, जींद का कुछ क्षेत्र और भिवानी के कुछ क्षेत्र में भी पेयजल आपूर्ति होती है।


हरियाणा को पानी देने के फैसले पर पंजाब ने दायर की पुनर्विचार याचिका
पंजाब सरकार का आरोप बीबीएमबी ने कोर्ट में गलत तथ्य रखे
भाखड़ा बांध से हरियाणा को 4500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी देने के फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गई है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर पंजाब ने आदेश में संशोधन की मांग की है।
पंजाब सरकार ने याचिका में कहा है कि भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर आदेश प्राप्त किया है। किसी नीति निर्णय या किसी राज्य के अधिकारों पर असर डालने वाला मुद्दा हो, तो 1974 के नियम 7 के तहत बीबीएमबी को उसे केंद्र सरकार को भेजना होता है। यह मामला पहले ही केंद्र सरकार को भेजा जा चुका था और वहां से कोई निर्णय नहीं आया था। इसके बावजूद बीबीएमबी ने 30 अप्रैल को बैठक बुलाकर हरियाणा को पानी देने का एकतरफा फैसला कर लिया। पंजाब ने यह भी बताया कि बीबीएमबी की याचिका में हरियाणा के पानी मांगने का तो उल्लेख है, लेकिन यह तथ्य छिपा लिया गया कि हरियाणा सरकार ने खुद इस मामले को केंद्र सरकार को भेजने की मांग की थी। 2 मई को बैठक में 4500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ने का निर्णय लिया गया, लेकिन कोर्ट को यह जानकारी नहीं दी गई कि यह निर्णय केंद्रीय गृह सचिव ने लिया था, जबकि केंद्रीय गृह सचिव निर्णय लेने के लिए अधिकृत प्राधिकारी नहीं हैं। इस मामले पर अब जल्द सुनवाई होगी।


बीबीएमबी के पुनर्गठन की पंजाब ने शुरू की तैयारी
पंजाब सरकार बीबीएमबी के पुनर्गठन की तैयारी में भी जुट गई है। इसके लिए सरकार ने जल स्रोत विभाग के अधिकारियों को अपना वॉटर रेगुलेशन एक्ट तैयार करने के लिए मौजूदा जल संसाधनों, 1968 से बीबीएमबी में उसकी हिस्सेदारी के अनुसार हुए जल बंटवारे, बीबीएमबी पर राज्य सरकार के खर्चों और पानी की आपूर्ति को पूरा करने नए स्रोत तैयार करने की रिपोर्ट तैयार करने के लिए विभाग की अलग-अलग टीमों को लगाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान कह चुके हैं कि बीबीएमबी का नए सिरे से गठन करने के साथ पंजाब व अन्य राज्यों के जल संसाधनों और जरूरतों को देखते हुए नए मानक तैयार किए जाने चाहिए। उनका कहना है कि बीबीएमबी का जब गठन हुआ, तब पंजाब की आबादी, पानी की स्थिति और फसलों की पैदावार की स्थिति कुछ और थी।
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