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Chandigarh-Haryana News: 11 जिलों में अभी भी 16 प्रतिशत धान कटाई का काम शेष
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- बासमती धान की 72 प्रतिशत कटाई तो नाॅन बासमी धान की 97.12 प्रतिशत तक कटाई का हो चुका है काम, अगला एक सप्ताह चुनाैती भरा होगा
चंडीगढ़। हरियाणा में अगले एक सप्ताह और परेशानी हो सकती है। दरअसल, अभी भी प्रदेश के 11 जिलों में करीब 16 प्रतिशत धान की कटाई का कार्य शेष है। ऐसे में आगामी एक सप्ताह हरियाणा कृषि व कल्याण विभाग और आमजन के लिए चुनाैती भरा होने वाला है।
हरियाणा में बासमती धान का क्षेत्रफल करीब 22.64 लाख एकड़ है जबकि नाॅन बासमती धान का क्षेत्रफल 20.81 लाख एकड़ है। कृषि व कल्याण विभाग ने धान की कटाई का ब्योरा तैयार किया है। विभाग के अनुसार बासमती धान की कटाई का कार्य अभी तक 72 प्रतिशत ही हो सका है जबकि नाॅन बासमती धान की की कटाई का कार्य 97.12 प्रतिशत तक हो चुका है।
इस तरह से अभी तक बासमती और नाॅन बासमती धान की कटाई का कार्य 84.03 प्रतिशत हो चुका है। फिलहाल 11 जिलों में जींद, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, रोहतक में पराली जलाने के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। इसकी वजह भी यही बताई कि सिरसा में 69.05 प्रतिशत, चरखी दादरी में 55.26 प्रतिशत, सोनीपत में 75.33 प्रतिशत ही धान की कटाई का कार्य पूरा हुआ है।
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इसी तरह से पानीपत में 78.80 प्रतिशत, जींद में 72.15 प्रतिशत, हिसार में 65.41 प्रतिशत, झज्जर में 82.35 प्रतिशत, फतेहाबाद में 77.57 प्रतिशत, फरीदाबाद में 79.63 प्रतिशत व भिवानी में 74.65 प्रतिशत धान की कटाई हुई है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सेवा निवृत वैज्ञानिक रणबीर राठी का कहना है कि जिन जिलों में देरी से धान की रोपाई होती है वहां स्वाभाविक है कि देरी से ही धान की कटाई होगी, इसलिए संबंधित जिलों में अतिरिक्त सावधानी व सतर्कता की आवश्यकता होती है।
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चंडीगढ़। हरियाणा में अगले एक सप्ताह और परेशानी हो सकती है। दरअसल, अभी भी प्रदेश के 11 जिलों में करीब 16 प्रतिशत धान की कटाई का कार्य शेष है। ऐसे में आगामी एक सप्ताह हरियाणा कृषि व कल्याण विभाग और आमजन के लिए चुनाैती भरा होने वाला है।
हरियाणा में बासमती धान का क्षेत्रफल करीब 22.64 लाख एकड़ है जबकि नाॅन बासमती धान का क्षेत्रफल 20.81 लाख एकड़ है। कृषि व कल्याण विभाग ने धान की कटाई का ब्योरा तैयार किया है। विभाग के अनुसार बासमती धान की कटाई का कार्य अभी तक 72 प्रतिशत ही हो सका है जबकि नाॅन बासमती धान की की कटाई का कार्य 97.12 प्रतिशत तक हो चुका है।
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इस तरह से अभी तक बासमती और नाॅन बासमती धान की कटाई का कार्य 84.03 प्रतिशत हो चुका है। फिलहाल 11 जिलों में जींद, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, रोहतक में पराली जलाने के मामले अधिक सामने आ रहे हैं। इसकी वजह भी यही बताई कि सिरसा में 69.05 प्रतिशत, चरखी दादरी में 55.26 प्रतिशत, सोनीपत में 75.33 प्रतिशत ही धान की कटाई का कार्य पूरा हुआ है।
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इसी तरह से पानीपत में 78.80 प्रतिशत, जींद में 72.15 प्रतिशत, हिसार में 65.41 प्रतिशत, झज्जर में 82.35 प्रतिशत, फतेहाबाद में 77.57 प्रतिशत, फरीदाबाद में 79.63 प्रतिशत व भिवानी में 74.65 प्रतिशत धान की कटाई हुई है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सेवा निवृत वैज्ञानिक रणबीर राठी का कहना है कि जिन जिलों में देरी से धान की रोपाई होती है वहां स्वाभाविक है कि देरी से ही धान की कटाई होगी, इसलिए संबंधित जिलों में अतिरिक्त सावधानी व सतर्कता की आवश्यकता होती है।