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Chandigarh-Haryana News: बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के 1300 पद खाली, काम का दबाव बढ़ा
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पुरुष कार्यकर्ताओं की सात साल और महिला कार्यकर्ताओं की चार साल से नहीं हुई भर्ती
आशीष वर्मा
चंडीगढ़। एएनएम यानी बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य की रीढ़ माना जाता है। जमीन पर विभाग के सभी कार्यक्रम इन्हीं के कारण चलते हैं। मगर अब इन्हीं कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। राज्य में इनके करीब 1300 पद खाली पड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक महिला बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के कुल 2734 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 2137 पद भरे हैं जबकि 597 पद खाली पड़े हैं। वहीं, पुरुष बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के कुल 2832 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 2126 पद भरे हैं और 706 पद खाली हैं।
करीब 1300 पद खाली होने के कारण अन्य बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर काम का दबाव बढ़ गया है। ग्रामीण इलाकों में स्थित कई
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में एएनएम की वजह से काम प्रभावित हो रहे हैं। जिन सेंटरों में एएनएम नहीं हैं, वहां दूसरे सेंटर के एएनएम से काम चलाया जा रहा है।
मेवात, गुरुग्राम, यमुनानगर और सिरसा में एएनएम की कमी की वजह से कई स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि पुरुष बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं की पिछली भर्ती 2018 में हुई थी। उसके बाद से कोई भर्ती नहीं की गई। इसी तरह महिला कार्यकर्ताओं की भर्ती 2021 में निकाली गई थी। उसके बाद से नई भर्तियां नहीं हुई हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डाॅ. मनीष बंसल ने बताया कि अब भर्तियां हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से होती हैं। अभी हाल ही में संयुक्त पात्रता परीक्षा (सीईटी) हुई है। खाली पदों का ब्योरा आयोग को भेजा हुआ है। विभाग की ओर से पूरी कोशिश रहेगी कि जल्द से जल्द पद भरे जाएं।
एएनएम के जिम्मे 14 से ज्यादा स्वास्थ्य कार्यक्रम
बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का मुख्य कार्य प्राइमरी हेल्थ सेंटर में स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना है। स्वास्थ्य विभाग से संबंधित कोई भी कार्यक्रम चलाना हो तो बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को ही जिम्मेदारी दी जाती है। इन कार्यकर्ताओं के पास जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, टीकाकरण कार्यक्रम, परिवार नियोजन, मलेरिया उन्मूलन, डेंगू उन्मूलन, टीबी उन्मूलन, एनिमिया मुक्त अभियान, कुष्ठ रोग नियंत्रण, मिशन इंद्रधनुष, डायरिया नियंत्रण, एनसीडी कार्यक्रम, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, स्कूल हेल्थ कार्यक्रम, पोलियो उन्मूलन और राज्य सरकार के सहेली कार्यक्रम से भी जोड़ दिया गया है।
आबादी के हिसाब से एक हजार पदों की और जरूरत
हरियाणा में आबादी बढ़ने के साथ अस्पतालों और प्राइमरी हेल्थ सेंटरों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। कई अस्पताल अपग्रेड हो गए मगर बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं के पदों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों की एसोसिएशन कई बार मांग उठा चुकी है कि राज्य में बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के कम से कम एक हजार पद होने चाहिए। एसोसिएशन के महासचिव सहदेव आर्य सांगवान ने कहा कि नियमित पदों को नियमित के माध्यम से ही भरा जाए ताकि कार्यकर्ताओं का बोझ कम हो और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इस समय मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जिन गावों में एएनएम नहीं हैं वहां एंटी लार्वा एक्टिविटीज प्रभावित हो रही हैं।
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आशीष वर्मा
चंडीगढ़। एएनएम यानी बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को स्वास्थ्य की रीढ़ माना जाता है। जमीन पर विभाग के सभी कार्यक्रम इन्हीं के कारण चलते हैं। मगर अब इन्हीं कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। राज्य में इनके करीब 1300 पद खाली पड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक महिला बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के कुल 2734 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 2137 पद भरे हैं जबकि 597 पद खाली पड़े हैं। वहीं, पुरुष बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के कुल 2832 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 2126 पद भरे हैं और 706 पद खाली हैं।
करीब 1300 पद खाली होने के कारण अन्य बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर काम का दबाव बढ़ गया है। ग्रामीण इलाकों में स्थित कई
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में एएनएम की वजह से काम प्रभावित हो रहे हैं। जिन सेंटरों में एएनएम नहीं हैं, वहां दूसरे सेंटर के एएनएम से काम चलाया जा रहा है।
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मेवात, गुरुग्राम, यमुनानगर और सिरसा में एएनएम की कमी की वजह से कई स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने बताया कि पुरुष बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं की पिछली भर्ती 2018 में हुई थी। उसके बाद से कोई भर्ती नहीं की गई। इसी तरह महिला कार्यकर्ताओं की भर्ती 2021 में निकाली गई थी। उसके बाद से नई भर्तियां नहीं हुई हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डाॅ. मनीष बंसल ने बताया कि अब भर्तियां हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से होती हैं। अभी हाल ही में संयुक्त पात्रता परीक्षा (सीईटी) हुई है। खाली पदों का ब्योरा आयोग को भेजा हुआ है। विभाग की ओर से पूरी कोशिश रहेगी कि जल्द से जल्द पद भरे जाएं।
एएनएम के जिम्मे 14 से ज्यादा स्वास्थ्य कार्यक्रम
बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का मुख्य कार्य प्राइमरी हेल्थ सेंटर में स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करना है। स्वास्थ्य विभाग से संबंधित कोई भी कार्यक्रम चलाना हो तो बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को ही जिम्मेदारी दी जाती है। इन कार्यकर्ताओं के पास जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम, टीकाकरण कार्यक्रम, परिवार नियोजन, मलेरिया उन्मूलन, डेंगू उन्मूलन, टीबी उन्मूलन, एनिमिया मुक्त अभियान, कुष्ठ रोग नियंत्रण, मिशन इंद्रधनुष, डायरिया नियंत्रण, एनसीडी कार्यक्रम, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, स्कूल हेल्थ कार्यक्रम, पोलियो उन्मूलन और राज्य सरकार के सहेली कार्यक्रम से भी जोड़ दिया गया है।
आबादी के हिसाब से एक हजार पदों की और जरूरत
हरियाणा में आबादी बढ़ने के साथ अस्पतालों और प्राइमरी हेल्थ सेंटरों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ है। कई अस्पताल अपग्रेड हो गए मगर बहुउद्देशीय कार्यकर्ताओं के पदों में बढ़ोतरी नहीं की गई है। बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मचारियों की एसोसिएशन कई बार मांग उठा चुकी है कि राज्य में बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के कम से कम एक हजार पद होने चाहिए। एसोसिएशन के महासचिव सहदेव आर्य सांगवान ने कहा कि नियमित पदों को नियमित के माध्यम से ही भरा जाए ताकि कार्यकर्ताओं का बोझ कम हो और लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इस समय मच्छर जनित रोगों की रोकथाम के लिए कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। जिन गावों में एएनएम नहीं हैं वहां एंटी लार्वा एक्टिविटीज प्रभावित हो रही हैं।