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मई में मिलेगा वाटर टेस्टिंग लैब का नया भवन
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संजय वर्मा
भिवानी। आखिरकार 40 साल बाद वाटर टेस्टिंग लैब को अत्याधुनिक मापदंडों पर आधारित नया भवन मिलेगा। इसके लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग करीब 47 लाख की लागत से अत्याधुनिक लैब तैयार करा रहा है, जिसका मई माह में काम पूरा हो जाएगा। अत्याधुनिक पानी जांच प्रयोगशाला में कर्मचारी और भी बेहतर ढंग से पानी की जांच कर पाएंगे और इसके नतीजे भी विभाग को जल्द मिलेंगे। साल भर में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की शहरी पेयजल शाखा द्वारा पूरे शहर से करीब 800 पानी जांच के नमूने लैब में जांचे गए, जिसमें से 15 फीसदी पानी के नमूनों की रिपोर्ट तय मापदंडों पर खरी नहीं उतरी। नए भवन की आधुनिक लैब में पानी के नमूनों की जांच में भी तेजी आएगी।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के भिवानी सर्कल में 80 के दशक में पानी नमूनों की जांच के लिए लैब बनाई गई थी। विभाग की ये खुद की लैब थी, जिसमें पेयजल आपूर्ति में दिए जा रहे पानी की संभावित स्थानों पर लिए गए नमूनों की ही जांच की जाती थी। नतीजा भी काफी समय बाद आता था। जबकि लैब भी विभाग के रिहायशी खंड में चल रही थी, जहां पर संकरी जगह के साथ साथ सुविधाओं का भी काफी अभाव बना हुआ था। करीब 40 साल बाद विभाग ने सर्कल में पानी जांच के लिए अत्याधुनिक लैब भवन तैयार कराने के लिए कदम उठाया। विभागीय अधिकारियों की मानें तो करीब 47 लाख रुपये के बजट से पानी जांच की नई लैब तैयार की जा रही है। जिसमें अलग अलग खंड बनाए जाएंगे, जिसमें पानी के नमूनों को सुरक्षित रखने के साथ साथ उनकी जांच में पाई जाने वाली कमियों के संबंध में भी त्वरित नतीजे मिलेंगे। विभागीय अधिकारियों ने यह भी संभावना जताई है कि मई के आखिर तक ये लैब बनकर तैयार हो जाएगी।
अधिकांश हिस्सों में पानी के नमूने आ रहे फेल
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के भिवानी सर्कल की सभी डिवीजनों में शहरी और ग्रामीण दायरे में लोगों को पीने के लिए उपलब्ध कराए जा रहे पानी की स्वच्छता की जांच के लिए सालाना संभावित लक्ष्य भी रखा हुआ है। इसी के तहत शहरी दायरे के साथ साथ ग्रामीण दायरे में भी पानी के नमूनों की एकत्रित करती हैं, जिन्हें लैब में जांच के लिए भेजा जाता है। यहां लैब में आने वाले अधिकांश पानी के नमूनों के नतीजे कसौटी पर खरे नहीं उतरते और कुछ तो फेल ही हो जाते हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि पब्लिक हेल्थ कई ग्रामीण इलाकों में भूमिगत यानी बोरवेल के जरिए लोगों तक पेयजल आपूर्ति पहुंचा रहा है, जहां का भूमिगत पानी अब पीने लायक नहीं बचा है।
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वर्जन -
मुख्य जलघर परिसर में ही पानी जांच लैब के लिए अलग से अत्याधुनिक भवन का निर्माण कराया जा रहा है। लैब पानी जांच से जुड़ी सभी सुविधाएं मिलेंगी। फिलहाल जहां से भी गंदे पानी की शिकायतें मिल रही हैं, वहां से नमूनों की जांच भी लैब में कराई जा रही है।
- प्रवीन जांगड़ा, एसडीओ शहरी पेयजल शाखा भिवानी।
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भिवानी। आखिरकार 40 साल बाद वाटर टेस्टिंग लैब को अत्याधुनिक मापदंडों पर आधारित नया भवन मिलेगा। इसके लिए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग करीब 47 लाख की लागत से अत्याधुनिक लैब तैयार करा रहा है, जिसका मई माह में काम पूरा हो जाएगा। अत्याधुनिक पानी जांच प्रयोगशाला में कर्मचारी और भी बेहतर ढंग से पानी की जांच कर पाएंगे और इसके नतीजे भी विभाग को जल्द मिलेंगे। साल भर में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की शहरी पेयजल शाखा द्वारा पूरे शहर से करीब 800 पानी जांच के नमूने लैब में जांचे गए, जिसमें से 15 फीसदी पानी के नमूनों की रिपोर्ट तय मापदंडों पर खरी नहीं उतरी। नए भवन की आधुनिक लैब में पानी के नमूनों की जांच में भी तेजी आएगी।
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के भिवानी सर्कल में 80 के दशक में पानी नमूनों की जांच के लिए लैब बनाई गई थी। विभाग की ये खुद की लैब थी, जिसमें पेयजल आपूर्ति में दिए जा रहे पानी की संभावित स्थानों पर लिए गए नमूनों की ही जांच की जाती थी। नतीजा भी काफी समय बाद आता था। जबकि लैब भी विभाग के रिहायशी खंड में चल रही थी, जहां पर संकरी जगह के साथ साथ सुविधाओं का भी काफी अभाव बना हुआ था। करीब 40 साल बाद विभाग ने सर्कल में पानी जांच के लिए अत्याधुनिक लैब भवन तैयार कराने के लिए कदम उठाया। विभागीय अधिकारियों की मानें तो करीब 47 लाख रुपये के बजट से पानी जांच की नई लैब तैयार की जा रही है। जिसमें अलग अलग खंड बनाए जाएंगे, जिसमें पानी के नमूनों को सुरक्षित रखने के साथ साथ उनकी जांच में पाई जाने वाली कमियों के संबंध में भी त्वरित नतीजे मिलेंगे। विभागीय अधिकारियों ने यह भी संभावना जताई है कि मई के आखिर तक ये लैब बनकर तैयार हो जाएगी।
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अधिकांश हिस्सों में पानी के नमूने आ रहे फेल
जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के भिवानी सर्कल की सभी डिवीजनों में शहरी और ग्रामीण दायरे में लोगों को पीने के लिए उपलब्ध कराए जा रहे पानी की स्वच्छता की जांच के लिए सालाना संभावित लक्ष्य भी रखा हुआ है। इसी के तहत शहरी दायरे के साथ साथ ग्रामीण दायरे में भी पानी के नमूनों की एकत्रित करती हैं, जिन्हें लैब में जांच के लिए भेजा जाता है। यहां लैब में आने वाले अधिकांश पानी के नमूनों के नतीजे कसौटी पर खरे नहीं उतरते और कुछ तो फेल ही हो जाते हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि पब्लिक हेल्थ कई ग्रामीण इलाकों में भूमिगत यानी बोरवेल के जरिए लोगों तक पेयजल आपूर्ति पहुंचा रहा है, जहां का भूमिगत पानी अब पीने लायक नहीं बचा है।
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मुख्य जलघर परिसर में ही पानी जांच लैब के लिए अलग से अत्याधुनिक भवन का निर्माण कराया जा रहा है। लैब पानी जांच से जुड़ी सभी सुविधाएं मिलेंगी। फिलहाल जहां से भी गंदे पानी की शिकायतें मिल रही हैं, वहां से नमूनों की जांच भी लैब में कराई जा रही है।
- प्रवीन जांगड़ा, एसडीओ शहरी पेयजल शाखा भिवानी।