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Bhiwani News: सिंचाई प्रबंधन व जल बचाने के लिए खंड कार्यालय में प्रशिक्षण शिविर
Tue, 20 Feb 2024 02:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Tue, 20 Feb 2024 02:40 AM IST
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सिंचाई प्रबंधन व जल बचाने के लिए खंड कार्यालय में प्रशिक्षण शिविर लगाया।
बवानीखेड़ा। सिंचाई प्रबंधन व जल बचाने के लिए मिकाड़ा और हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान नीलोखेड़ी के तत्वावधान में खंड कार्यालय में प्रशिक्षण शिविर लगाया गया। प्रशिक्षण शिविर में बवानीखेड़ा खंड के नहरी पानी से खेतों की सिंचाई करने वाले 100 से अधिक किसानों ने अपनी उपस्थित दर्ज करवाई।
शिविर में जल समितियों के अधिकार, उद्देश्य और कर्तव्यों के बारे में विस्तार से बताया। नीलोखेड़ी से प्रशिक्षक अंकित व लोकपाल नवीन कुमार ने क्षेत्र के किसानों को जल बचाने के लिए सूक्ष्म सिंचाई के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जल समिति द्वारा ही जल प्रबंधन को सही से ढंग से लागू किया जा सकता है। मिकाड़ा के डिप्टी डायरेक्टर श्रीभगवान, जेई दीपक कुमार ने भी टैंकों के निर्माण के बारे बताया। उन्होंने बताया कितने एकड़ के लिए कितने वर्ग फीट के टैंक की आवश्यकता है। मिनी स्प्रिंकलर से हर फसल का उत्पादन भी बढ़ेगा और सिंचाई भी अधिक क्षेत्र में की जाएगी। सरकार हर खेत को पानी देने की योजना को धरातल पर उतरने के लिए किसानों को प्रशिक्षण दे रही है। गांव के गंदे पानी को भी सिंचाई के काबिल बनाने के लिए मिकाड़ा द्वारा एसटीपी प्लांट लगाया जा रहा है। जिसको स्थापित करने के लिए शतप्रतिशत अनुदान दिया जाता है।
प्रशिक्षकों ने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई के लिए किसानों को 70 से 85 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। नहरों के पानी को चेक डैम के माध्यम से स्टोरेज करके खेतों में सिंचाई के लिए सोलर, टैंक निर्माण और सूक्ष्म सिंचाई के लिए 70 से 85 प्रतिशत अनुदान मिलता है। इसमें किसानों को व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से भागीदार हो सकते हैं। शिविर के माध्यम से किसानों को जल समिति के अधिकार, जल बचाव की जरूरत, मिकाड़ा की विभिन्न योजनाओं के बताया गया। शिविर में प्रगतिशील किसान जयप्रकाश बल्हारा, किसान वजीर, सुरेंद्र, कश्मीर, सतीश, पवन, प्रेम, बलमत सहित सैकड़ों किसान उपस्थित रहे।
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शिविर में जल समितियों के अधिकार, उद्देश्य और कर्तव्यों के बारे में विस्तार से बताया। नीलोखेड़ी से प्रशिक्षक अंकित व लोकपाल नवीन कुमार ने क्षेत्र के किसानों को जल बचाने के लिए सूक्ष्म सिंचाई के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जल समिति द्वारा ही जल प्रबंधन को सही से ढंग से लागू किया जा सकता है। मिकाड़ा के डिप्टी डायरेक्टर श्रीभगवान, जेई दीपक कुमार ने भी टैंकों के निर्माण के बारे बताया। उन्होंने बताया कितने एकड़ के लिए कितने वर्ग फीट के टैंक की आवश्यकता है। मिनी स्प्रिंकलर से हर फसल का उत्पादन भी बढ़ेगा और सिंचाई भी अधिक क्षेत्र में की जाएगी। सरकार हर खेत को पानी देने की योजना को धरातल पर उतरने के लिए किसानों को प्रशिक्षण दे रही है। गांव के गंदे पानी को भी सिंचाई के काबिल बनाने के लिए मिकाड़ा द्वारा एसटीपी प्लांट लगाया जा रहा है। जिसको स्थापित करने के लिए शतप्रतिशत अनुदान दिया जाता है।
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प्रशिक्षकों ने बताया कि सूक्ष्म सिंचाई के लिए किसानों को 70 से 85 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। नहरों के पानी को चेक डैम के माध्यम से स्टोरेज करके खेतों में सिंचाई के लिए सोलर, टैंक निर्माण और सूक्ष्म सिंचाई के लिए 70 से 85 प्रतिशत अनुदान मिलता है। इसमें किसानों को व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से भागीदार हो सकते हैं। शिविर के माध्यम से किसानों को जल समिति के अधिकार, जल बचाव की जरूरत, मिकाड़ा की विभिन्न योजनाओं के बताया गया। शिविर में प्रगतिशील किसान जयप्रकाश बल्हारा, किसान वजीर, सुरेंद्र, कश्मीर, सतीश, पवन, प्रेम, बलमत सहित सैकड़ों किसान उपस्थित रहे।
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