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Bhiwani News: 17 वर्षीय लड़की पर एसिड अटैक मामले में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की सख्ती के बाद एसपी कार्यालय ने भेजी रिपोर्ट

Sat, 29 Nov 2025 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी Updated Sat, 29 Nov 2025 01:39 AM IST
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The SP's office submitted a report after the National Human Rights Commission took a strong stand in the acid attack case on a 17-year-old girl.
भिवानी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की सख्ती के बाद भिवानी पुलिस ने 17 वर्षीय बालिका पर उसके पिता द्वारा किए गए एसिड हमले में कार्रवाई की रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध कराई है। आयोग ने एसिड अटैक पीड़िता मामले में मांगी गई रिपोर्ट समय पर उपलब्ध न कराने पर भिवानी एसपी को एक दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से दिल्ली तलब किया था। आयोग ने नोटिस जारी कर स्पष्ट किया था कि यदि 26 नवंबर तक रिपोर्ट मिल जाती है तो एसपी को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट मिलेगी।
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बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा की शिकायत पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने आठ अगस्त को भिवानी एसपी को नोटिस जारी कर मामले की रिपोर्ट मांगी थी। निर्धारित समय में रिपोर्ट न भेजी जाने पर 10 सितंबर को पहला रिमाइंडर और एक अक्तूबर को दूसरा रिमाइंडर नोटिस जारी किया गया। इसके बावजूद रिपोर्ट न मिलने पर एसपी को व्यक्तिगत उपस्थिति का नोटिस भेजा गया। इस पर 21 नवंबर को पुलिस की तरफ से आयोग को रिपोर्ट मुहैया कराई गई।
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प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस मामले में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया। पुलिस अधीक्षक भिवानी द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया था। पीड़ित लड़की के बयान दर्ज कर बाल कल्याण समिति भिवानी के माध्यम से पीड़िता की काउंसिलिंग कराई गई। पुलिस की रिपोर्ट में उल्लेख है कि चालान तैयार हो चुका है और जल्द ही कोर्ट में पेश कर दिया जाएगा।
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आयोग ने रिपोर्ट पर विचार करने के बाद पाया कि यद्यपि प्राथमिकी दर्ज कर जांच प्रारंभ की गई और आरोपी की गिरफ्तारी एवं चार्जशीट की कार्रवाई की गई लेकिन पीड़िता को हरियाणा विक्टिम कम्पनसेशन स्कीम 2020 के तहत सहायता राशि नहीं मिली। आयोग ने यह भी बताया कि हरियाणा सरकार की वित्तीय सहायता योजना तेजाब हमला पीड़ित महिलाएं एवं बालिकाएं के अंतर्गत पीड़िता को आर्थिक सहायता, मासिक पेंशन, तत्काल राहत और निशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान की जानी थी जो अभी तक नहीं दी गई। आयोग ने स्पष्ट किया कि पीड़िता की माता का देहांत हो चुका है और वर्तमान मामले में आरोपी उसका पिता है। ऐसे में उपायुक्त भिवानी की संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि पीड़िता को सुरक्षा, देखभाल, चिकित्सा उपचार, पुनर्वास और सभी प्रकार की आर्थिक सहायता सुनिश्चित करें।

आयोग ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए
आयोग ने उपायुक्त भिवानी को निर्देश दिए कि पीड़िता को हरियाणा विक्टिम कम्पनसेशन स्कीम 2020 तथा तेजाब हमला पीड़ित महिलाएं एवं बालिकाएं योजना के तहत मिलने वाली सभी सहायता और लाभ बिना देरी दिए प्रदान किए जाएं। जिला समाज कल्याण अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि आवेदन की समयबद्ध प्रक्रिया, निशुल्क एवं पूर्ण चिकित्सा उपचार, पुनर्वास और मासिक पेंशन आदि के प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही पीड़िता के नाबालिग भाई की सुरक्षा, देखभाल और भविष्य के लिए ठोस व्यवस्था की जाए।



एसिड अटैक जैसी जघन्य और अमानवीय घटनाएं न केवल एक बालिका या महिला के मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक संवेदनशीलता और न्याय व्यवस्था की कसौटी पर भी प्रश्नचिह्न हैं। ऐसे मामलों में अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि पीड़ित को समुचित सुरक्षा, चिकित्सा, पुनर्वास, शिक्षा, आजीविका एवं न्याय सुनिश्चित किया जाए ताकि पीड़ित न केवल शारीरिक रूप से स्वस्थ हो सके बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने में सक्षम हो। -प्रियंक कानूनगो, सदस्य राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
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